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CAG: 26/11 आतंकी हमले के 14 साल बाद भी तटीय सुरक्षा मजबूत नहीं, सागर प्रहरी की जरूरतें भी अधूरी

Wed, 21 Dec 2022 09:58 AM IST
सुरेंद्र जोशी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Wed, 21 Dec 2022 09:58 AM IST
सार

कैग ने तटों की सुरक्षा के लिए आवश्यक ढांचा तैयार करने में देरी से हुई। मुंबई हमले के बाद गठित किए 'सागर प्रहरी बल' (SPB) को फास्ट इंटरसेप्टर क्रॉफ्ट्स मुहैया कराने में 13 से 61 माह का विलंब हुआ। जून 2021 तक कुछ नौसैनिक बंदरगाहों को सुरक्षा के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध नहीं थे।

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CAG flags delays in strengthen security of coastal assets
डॉर्नियर एयरक्राफ्ट। - फोटो : Social Media

विस्तार

देश के नियंत्रक व महालेखा परीक्षक (CAG) ने नौसेना की सभी तटीय संपत्तियों की सुरक्षा में देरी की आलोचना की है। कैग ने कहा कि 26/11 मुंबई हमले के बाद सुरक्षा मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCS) ने तीन साल में देश के सभी तटीय क्षेत्रों की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम के निर्देश दिए थे, लेकिन इसके लिए संसाधन जुटाने में 13 से 61 माह की देरी हुई। 

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राष्ट्रीय लेखाकार कैग ने तटों की सुरक्षा के लिए आवश्यक ढांचा तैयार करने में देरी से हुई। मुंबई हमले के बाद गठित किए 'सागर प्रहरी बल' (SPB) को फास्ट इंटरसेप्टर क्रॉफ्ट्स (FICs) मुहैया कराने में 13 से 61 माह का विलंब हुआ। यहां तक कि जून 2021 तक कुछ नौसैनिक बंदरगाहों को सुरक्षा के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध नहीं थे। जबकि सीसीएस ने फरवरी 2009 में इनकी मंजूरी दे दी थी। 
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सुरक्षा मामलों को लेकर कैग की यह रिपोर्ट मंगलवार को संसद में पेश की गई। इसमें कहा गया है कि सीसीएस ने सागर प्रहरी के गठन के बाद तीन साल में नौसेना के सभी तटीय केंद्रों की सुरक्षा के निर्देश दिए थे। कैग की रिपोर्ट में कहा गया है कि समुद्री गश्ती यान FICs उपलब्ध कराने में भारी विलंब हुआ। अधिकारी स्तर के कार्मिकों की भी पर्याप्त तैनाती नहीं की गई। 
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बता दें, भारतीय सुरक्षा संस्थानों ने 26 नवंबर 2008 को हुए मुंबई हमले के बाद देश के तटों की सुरक्षा सख्त करने के अनेक कदम उठाए हैं। पाकिस्तानी आतंकियों ने इस हमले में 10 देशों के 28 विदेशी नागरिकों समेत 166 लोगों की हत्या कर दी थी। ये आतंकी गुजरात के पोरबंदर तट से होते हुए मुंबई पहुंचे थे। 


इन खामियों का भी कैग ने किया जिक्र
कैग ने यह भी कहा है कि जिन बंदरगाहों पर  इन यानों को तैनात किया गया है, वहां भी इनका इस्तेमाल न्यूनतम हुआ। वहीं, बूस्ट गैस टर्बाइन (बीजीटी) को नौसेना द्वारा निर्धारित मात्रा से अधिक रखा गया। बीजीटी की खरीदी का आदेश देते समय इनके स्टॉक का ध्यान नहीं रखा गया, इस कारण नए बीजीटी की खरीदी पर 213.96 करोड़ रुपये का ज्यादा खर्च हो गया। इसी तरह रक्षा मंत्रालय की 'सैद्धांतिक मंजूरी' (एआईपी) की 260 सप्ताह की समय सीमा और अनुबंध पूरा करने की अवधि 95 सप्ताह होने के कारण नौसैनिक हेलिकॉप्टरों की मरम्मत में असाधारण देरी हुई। इस कारण हेलिकॉप्टर 10 सालों से ज्यादा समय तक खड़े रहे। रिपोर्ट में मंत्रालय के कई अन्य फैसलों में भी चूक की ओर ध्यान दिलाया गया है।

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