Cadre review: दूर हुई पदोन्नति, साल की अंतिम कैडर समीक्षा रिपोर्ट में भी CRPF, BSF का नाम नहीं, कहां अटकी फाइल
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विस्तार
केंद्रीय गृह मंत्रालय के तहत अर्धसैनिक बल, बीएसएफ और सीआरपीएफ की कैडर समीक्षा फाइल, अभी कहीं पर अटकी हुई है। इस साल की अंतिम कैडर समीक्षा रिपोर्ट में इन दोनों बलों का नाम नहीं है। इसके अलावा 23 केंद्रीय विभागों की कैडर समीक्षा फाइलें अभी सोच-विचार के लिए लंबित हैं। केंद्र में 16 विभाग ऐसे हैं, जिनकी कैडर समीक्षा पूरी हो चुकी है, लेकिन अभी कैबिनेट की मंजूरी मिलना बाकी है। दो विभागों के लिए कैडर रिव्यू कमेटी की बैठक हो चुकी है। एक विभाग की कैडर समीक्षा, कैडर रिव्यू कमेटी के समक्ष विचाराधीन है। दिसंबर की कैडर रिव्यू समीक्षा रिपोर्ट में व्यय विभाग के पास कोई फाइल पेंडिंग नहीं है। चार विभाग ऐसे हैं, जिनमें कैडर कंट्रोलिंग अथॉरिटी द्वारा सूचना/जवाब/स्पष्टीकरण मांगा गया है।
दो साल पहले होनी थी दो बलों की कैडर समीक्षा
डीओपीटी के नियमानुसार, हर पांच साल में कैडर समीक्षा पूरी होना जरूरी है। मौजूदा स्थिति में किसी विभाग की फाइल, कैडर रिव्यू कमेटी के पास है, तो कहीं पर उस फाइल को कैबिनेट की मंजूरी नहीं मिल सकी है। सीआरपीएफ का पिछला कैडर रिव्यू 2016 में हुआ था। बल के लिए कैडर रिव्यू कमेटी 'सीआरसी' की बैठक 15 दिसंबर 2015 को हुई थी, जबकि उसे 29 जून 2016 को कैबिनेट की मंजूरी मिली थी। इसी तरह बीएसएफ के कैडर रिव्यू को 12 सितंबर 2016 को कैबिनेट की स्वीकृति प्रदान की गई थी। डीओपीटी की 6 दिसंबर को जारी कैडर समीक्षा रिपोर्ट में सीआरपीएफ और बीएसएफ का नाम ही नहीं है। इनके रिव्यू की क्या स्थिति है, फाइल किसकी टेबल पर है, इसकी जानकारी तक नहीं दी गई है। नियमानुसार, दोनों बलों की कैडर रिव्यू प्रक्रिया दो साल पहले ही पूरी हो जानी चाहिए थी।
इन बलों में पदोन्नति को लेकर चिंता
केंद्रीय अर्धसैनिक बल, बीएसएफ और सीआरपीएफ में खासतौर पर सिपाही से लेकर सहायक कमांडेंट तक की रैंक वाले कर्मी परेशान हैं। वजह, इन्हें समय पर पदोन्नति नहीं मिल रही। नियमानुसार, हर पांच साल में कैडर समीक्षा की प्रक्रिया पूरी हो जानी चाहिए। सीआरपीएफ और बीएसएफ में सिपाही को पहली पदोन्नति, 18 से 20 साल में मिल रही है। सीधी भर्ती के जरिए सेवा में आने वाले सहायक कमांडेंट को मौजूदा समय में डिप्टी कमांडेंट बनने में लगभग 15 साल लग रहे हैं। अगर कोई निरीक्षक है, तो उसे सहायक कमांडेंट के पद पर पहुंचने में लगभग 15 वर्ष लग जाते हैं। दो साल से कैडर अधिकारियों की समीक्षा फाइल एक टेबल से दूसरी टेबल पर घूम रही है। कभी तो मामला अदालत में होने की बात कह दी जाती है, तो कभी विचार विमर्श या जरूरी कमेंट्स मांगने के लिए फाइल विशेषज्ञों की मेज पर पहुंच जाती है। नतीजा, पिछले पांच वर्ष में सीआरपीएफ, बीएसएफ, आईटीबीपी, एसएसबी, सीआईएसएफ और असम राइफल्स में 50 हजार से अधिक कर्मियों ने नौकरी छोड़ दी है।
'समूह ए' अधिकारियों की सेवाएं 1986 से संगठित
पांच केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल/सीएपीएफ, जिसमें बीएसएफ, सीआरपीएफ, एसएसबी, सीआईएसएफ और आईटीबीपी शामिल हैं। इन बलों में 'समूह ए' अधिकारियों की सेवाएं 1986 से संगठित हैं, लेकिन अधिकारियों को उसका लाभ नहीं मिल सका। 2006 के दौरान जब छठे केंद्रीय वेतन आयोग ने आईएएस, आईपीएस व आईआरएस सहित अन्य सभी संगठित समूह ए सेवाओं 'ओजीएएस' के लिए गैर कार्यात्मक वित्तीय उन्नयन 'एनएफएफयू' योजना शुरू की तो कैडर अधिकारियों ने भी इसका लाभ देने की मांग की।
हालांकि तब 'सीएपीएफ' को संगठित समूह 'ए' सेवा के रूप में मान्यता देने से इनकार कर दिया गया। इसके बाद कैडर अफसरों ने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। लंबी कानूनी लड़ाई लड़ने के बाद 3 सितंबर 2015 के दिन अदालत ने अपने फैसले में सीएपीएफ को 1986 से 'संगठित समूह ए सेवा' घोषित कर दिया। दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई। सर्वोच्च न्यायालय ने 5 फरवरी 2019 को दिए अपने फैसले में दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 3 जुलाई 2019 को अपनी एक घोषणा के जरिए 'सीएपीएफ संगठित सेवा ए' को मंजूरी प्रदान कर दी। तक कैडर अफसरों में भी यह उम्मीद जगी थी कि उन्हें एनएफएफयू के परिणामी लाभ मिल जाएंगे।
इन विभागों को है कैबिनेट की मंजूरी का इंतजार
इंडियन डिफेंस एस्टेट सर्विस, के लिए कैडर रिव्यू कमेटी की बैठक हो चुकी है। कैडर कंट्रोलिंग अथॉरिटी को अब केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी लेना बाकी है। इंडियन नेवल आर्मामेंट सर्विस, मिलिट्री इंजीनियरिंग सर्विस 'आईडीएसई' सर्वेयर एंड आर्किटेक्ट, सेंट्रल जियोलॉजिकल सर्विस ग्रुप 'ए', जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया केमिकल सर्विस ग्रुप 'ए', जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया जियोफिजिकल सर्विस ग्रुप 'ए' और जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया इंजीनियरिंग सर्विस ग्रुप 'ए' की फाइल कैबिनेट की मंजूरी मिलने का इंतजार कर रही है। इंडियन रेडियो रेग्यूलेटरी सर्विस, इंडियन कॉरपोरेट लॉ सर्विस और सेंट्रल हेल्थ सर्विस की फाइल को भी कैबिनेट की मंजूरी मिलने का इंतजार है। इंडियन ऑर्डिनेंस फैक्ट्री हेल्थ सर्विस के कैडर रिव्यू की फाइल, सीआरसी के निर्देश पर डीओडीपी और स्वास्थ्य मंत्रालय के पास जरूरी कार्यवाही के लिए भेजी गई है। इंडियन सिविल अकाउंट्स सर्विस, सेंट्रल इंजीनियरिंग सर्विस 'रोड्स', डिफेंस एरोनॉटिकल क्वॉलिटी एश्योरेंस सर्विस, इंडियन लीगल सर्विस और सर्वे ऑफ इंडिया ग्रुप 'ए' सर्विस की फाइल को भी केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी मिलने का इंतजार है।
इन विभागों की फाइल का है ये स्टेटस
इंडियन स्किल डेवलपमेंट सर्विस और सेंट्रल लेबर सर्विस की फाइल कैडर रिव्यू कमेटी 'सीआरसी' के पास है। सीआरसी बैठक हो चुकी है। रिवाइज्ड प्रपोजल प्राप्त हो चुका है। सेंट्रल वाटर इंजीनियरिंग सर्विस की फाइल पर विचार करने के लिए सीआरसी की बैठक होना बाकी है। डीओपीटी और व्यय विभाग के पास किसी भी विभाग की कैडर समीक्षा से संबंधित फाइल नहीं है। सेंट्रल इंजीनियरिंग सर्विस (सीईएस) (सीपीडब्लूडी), सेंट्रल इलेक्ट्रीकल एंड मेकेनिकल इंजीनियरिंग सर्विस (सीईएंडएमईएस) (सीपीडब्लूडी), सेंट्रल आर्किटेक्चर सर्विस (सीएएस) (सीपीडब्लूडी) और इंडियन पोस्टल सर्विस की फाइल सीसीए के पास है। जरूरी सूचना/जवाब/स्पष्टीकरण मांगा गया है। मिलिट्री इंजीनियरिंग सर्विस (आईडीएसई, सर्वेयर, आर्किटेक्ट) के बारे में कहा गया है कि इस सेवा का कैडर स्ट्रक्चर व स्ट्रेंथ तीसरे कैडर रिव्यू 'ग्रुप ए' के समान रहेगा। रेलवे सुरक्षा बल 'आईआरपीएफएस' के प्रपोजल को सीसीए ने वापस ले लिया है।