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तीन भारतीय करेंगे 7 दिन की अंतरिक्ष यात्रा, गगनयान परियोजना के लिए 10 हजार करोड़ मंजूर
Fri, 28 Dec 2018 04:55 PM IST
अनिल पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अनिल पांडेय
Updated Fri, 28 Dec 2018 04:55 PM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : PTI
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केंद्रीय मंत्रिमंडल ने शुक्रवार को गगनयान परियोजना को मंजूरी दे दी जिसके तहत तीन सदस्यीय दल को कम से कम सात दिनों के लिए अंतरिक्ष में भेजा जाएगा। केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने यह जानकारी दी। उन्होंने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि इस परियोजना पर 10 हजार करोड़ की लागत आएगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने स्वतंत्रता दिवस भाषण में गगनयान परियोजना की घोषणा की थी। उन्होंने कहा कि इस परियोजना को 2022 तक अमल में लाया जाएगा। इस महत्वाकांक्षी परियोजना में मदद के लिए भारत ने पहले ही रूस और फ्रांस के साथ समझौते किए हैं।
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अगर यह मिशन कामयाब हुआ तो अंतरिक्ष पर मानव मिशन भेजने वाला भारत दुनिया का चौथा देश होगा। पीएम मोदी ने कहा था कि यह मिशन 2022 तक पूरा होगा।
बता दें कि पिछले दिनों इसरो ने एक एस्केप मॉड्युल यानी कैप्सुल का सफलतापूर्वक परीक्षण किया था, जिसे अंतरिक्ष यात्री अपने साथ ले जा सकेंगे। अंतरिक्ष यात्री दुर्घटना होने पर कैप्सुल में सवार होकर पृथ्वी की कक्षा में सुरक्षित पहुंच सकते हैं। इसरो ने इस मॉड्यूल का विकास खुद ही किया है।
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Cabinet approves indigenous human spaceflight programme; Gaganyaan programme to carry 3 member crew for minimum 7 days in space at a total cost of Rs 10k crores.
— ANI (@ANI) December 28, 2018विज्ञापन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने स्वतंत्रता दिवस भाषण में गगनयान परियोजना की घोषणा की थी। उन्होंने कहा कि इस परियोजना को 2022 तक अमल में लाया जाएगा। इस महत्वाकांक्षी परियोजना में मदद के लिए भारत ने पहले ही रूस और फ्रांस के साथ समझौते किए हैं।
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अगर यह मिशन कामयाब हुआ तो अंतरिक्ष पर मानव मिशन भेजने वाला भारत दुनिया का चौथा देश होगा। पीएम मोदी ने कहा था कि यह मिशन 2022 तक पूरा होगा।
बता दें कि पिछले दिनों इसरो ने एक एस्केप मॉड्युल यानी कैप्सुल का सफलतापूर्वक परीक्षण किया था, जिसे अंतरिक्ष यात्री अपने साथ ले जा सकेंगे। अंतरिक्ष यात्री दुर्घटना होने पर कैप्सुल में सवार होकर पृथ्वी की कक्षा में सुरक्षित पहुंच सकते हैं। इसरो ने इस मॉड्यूल का विकास खुद ही किया है।