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आरक्षण बिल का समर्थन करके सिब्बल ने उड़ाई इसके प्रावधानों की धज्जियां

Wed, 09 Jan 2019 11:18 PM IST
गौरव द्विवेदी डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: गौरव द्विवेदी Updated Wed, 09 Jan 2019 11:18 PM IST
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By supporting the General reservation bill, Sibal said rubbishes its provisions
कपिल सिब्बल

राज्यसभा में आर्थिक आधार पर आरक्षण के बिल का समर्थन करके पूर्व केन्द्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने इसमें निर्धारित प्रावधानों की धज्जियां उड़ाई। सिब्बल ने कहा कि सरकार द्वारा लाया गया यह विधेयक संविधान की आधारभूत संरचना से खिलवाड़ करने वाला है और इसका उल्लंघन करता है। उन्होंने संसद में लाए गए इस बिल को कमल का हमला, एक और जुमला करार दिया। सिब्बल ने कहा कि इस बिल के मौजूदा प्रावधानों को संसद की मंजूरी मिल जाने और इसके अधिनियम का स्वरूप ले लेने के बाद इसे लागू कराने में अड़चने ही अड़चने हैं। उन्होंने चर्चा में आरक्षण के पूर्व के आधार और बिल में निर्धारित आधार पर भी सवाल उठाया।

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सिब्बल के अनुसार अभी आरक्षण का मुख्य आधार सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्ग आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों को दे रही है। इससे आरक्षण के दोनों आधारों को लेकर भ्रमित कर देने वाली स्थिति पैदा होगी। सिब्बल के अनुसार देश में पहले ही एससी, एसटी, ओबीसी के लिए जातिगत आधार पर आरक्षण देने की व्यवस्था है। वह सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े की श्रेणी में आते हैं। दूसरी तरफ सरकार ने आर्थिक आधार पर दस प्रतिशत आरक्षण देने का निर्णय लिया है। बिल के प्रावधान में आठ लाख रुपये से कम की सालाना आय या पांच एकड़ जमीन या अन्य जो शर्तें निर्धारित करती हैं, वह देश की 98 फीसदी आबादी पर लागू होती हैं। 
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सरकार ने इसका कोई आंकड़ा लिए बिना यह कदम उठाया है कि कहां किस आयवर्ग के कितने लोग हैं। कहां कितने सवर्ण और किस आय वर्ग के हैं। कितने लोग आयकर देते हैं? कितने लोग सरकार द्वारा तय प्रावधान के दायरे में आते हैं। सरकार ने इस पर कोई अध्ययन नहीं कराया है। सिब्बल के अनुसार मंडल कमीशन के गठन के बाद उसकी रिपोर्ट और इसके लागू होने में 10 साल लग गए थे। यहां सरकार एक दिन में आर्थिक आधार पर आरक्षण देने की पहल कर रही है। 
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सिब्बल ने कहा कि मंडल कमीशन ने 10 प्रतिशत आर्थिक आधार पर आरक्षण देने की सिफारिश की थी, लेकिन इंदिरा साहनी के मामलें में 9 जजों की सुप्रीम कोर्ट ने इसे संविधान सम्मत नहीं माना। कपिल सिब्बल ने कहा कि संविधान के आधारभूत ढांचे से खिलाफ प्रावधान लाने पर इसमें तमाम संवैधानिक अड़चने आएंगी। लोगों में आरक्षण पाने के लिए आय की गलत रिपोर्ट बनाने की होड़ लगेगी, क्योंकि केवल तीन प्रतिशत से कुछ अधिक लोग ही आयकर देते हैं। उन्हीं की आय प्रमाणित है।

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