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13 राज्यों की 29 विधानसभा सीटों का विश्लेषण : उपचुनाव में भाजपा और कांग्रेस में कौन मजबूत हुआ? पढ़िए सभी 29 विधानसभा सीटों की डिटेल रिपोर्ट
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13 राज्यों में उपचुनाव हुए थे।
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अमर उजाला
विस्तार
30 और 31 अक्तूबर को 13 राज्यों के 29 विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव के नतीजे आ चुके हैं। हिमाचल प्रदेश और राजस्थान में भाजपा को बुरी तरह हार का सामना करना पड़ा तो कई राज्यों में भाजपा ने अपनी मजबूत पकड़ एक बार फिर से साबित कर दी। कांग्रेस ने जहां, हिमाचल प्रदेश और राजस्थान में अच्छी परफॉरमेंस दी, वहीं असम, बिहार, मध्य प्रदेश, मेघालय जैसे राज्यों में काफी कमजोर दिखी।आंकड़ों पर नजर डालें तो इस उपचुनाव में भाजपा और उसके सहयोगी दलों ने 13 सीटों पर कब्जा जमाया। वहीं कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों को 8 सीटों से ही संतोष करना पड़ा। पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी का जादू उपचुनाव में भी देखने को मिला। यहां उपचुनाव वाले चारों सीटों पर टीएमसी ने कब्जा कर लिया। इसमें दो सीटें फरवरी-मार्च में हुए आम चुनाव में भाजपा के खाते में गई थी। पढ़िए सभी 13 राज्यों की 29 विधानसभा सीटों की डिटेल रिपोर्ट...
किस राज्य की कितनी सीटों पर हुए चुनाव?
13 राज्यों में उपचुनाव हुए थे।
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| राज्य | विधानसभा सीटें |
| आंध्र प्रदेश | 01 |
| असम | 05 |
| बिहार | 02 |
| हरियाणा | 01 |
| हिमाचल प्रदेश | 03 |
| कर्नाटक | 02 |
| मध्य प्रदेश | 03 |
| महाराष्ट्र | 01 |
| मेघालय | 03 |
| मिजोरम | 01 |
| राजस्थान | 02 |
| तेलंगाना | 01 |
| पश्चिम बंगाल | 04 |
आंध्र प्रदेश और असम में क्या हुआ?
असम के मुख्यमंत्री हिमंत।
- फोटो :
अमर उजाला
1. आंध्र प्रदेश : एक सीट पर चुनाव, वाईएसआर कांग्रेस की जीत
2. असम : पांच सीट पर चुनाव, सभी पर भाजपा और सहयोगी पार्टी की बड़ी जीत
पांच विधानसभा सीट के लिए हुए उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने तीन और उसकी सहयोगी दल युनाइटेड पीपुल्स पार्टी (UPPL) ने बाकी दोनों सीटें जीत ली हैं। इसी के साथ असम में मुख्यमंत्री हिमंत बिश्व सरमा ने राज्य में अपनी मजबूती को बरकरार रखा है। इन सभी पांच सीटों पर अभी फरवरी-मार्च में ही आम चुनाव हुए थे। इन सभी सीटों पर जीत हासिल करने वाले उम्मीदवारों ने तब अपनी-अपनी पार्टी छोड़कर भाजपा जॉइन कर ली थी। इसके बाद यहां उपचुनाव कराने पड़े थे।
- वडवेल विधानसभा सीट पर चुनाव हुआ। इसमें सत्ताधारी वाईएसआर कांग्रेस पार्टी ने जीत हासिल की। वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के प्रत्याशी को 76.2% वोट मिले। भाजपा प्रत्याशी को 14.73% और कांग्रेस प्रत्याशी को 4.24% वोट मिले। 2.48% लोगों ने नोटा का बटन दबाया। वाईएसआर कांग्रेस ने यहां विधायक रहे जी वेंकटेश सुब्बाय की पत्नी देसारी सुधा को टिकट दिया था। जी वेंकटेश का कुछ समय पहले ही निधन हो गया था।
- आंध्र प्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विशेषज्ञ डॉ. केपी कमलामम बताते हैं कि सुधा की जीत में कई फैक्टर शामिल है। उन्हें पति के निधन पर लोगों की सहानुभूति मिली और जगनमोहन रेड्डी के युवा नेतृत्व का फायदा भी मिला। यही कारण है कि इस उपचुनाव में 2019 के मुकाबले वाईएसआर ने वोट शेयरिंग में अच्छी बढ़त हासिल की। 2019 में हुए विधानसभा चुनाव में सुधा के पति जी वेंकटेश सुब्बाय को 60.7% वोट मिले थे। दूसरे नंबर पर रहे टीडीपी प्रत्याशी डॉ. ओबेलापुरम राजा शेखर ने 32.8% वोट हासिल किया था। उपचुनाव में टीडीपी काफी पीछे रह गई।
2. असम : पांच सीट पर चुनाव, सभी पर भाजपा और सहयोगी पार्टी की बड़ी जीत
पांच विधानसभा सीट के लिए हुए उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने तीन और उसकी सहयोगी दल युनाइटेड पीपुल्स पार्टी (UPPL) ने बाकी दोनों सीटें जीत ली हैं। इसी के साथ असम में मुख्यमंत्री हिमंत बिश्व सरमा ने राज्य में अपनी मजबूती को बरकरार रखा है। इन सभी पांच सीटों पर अभी फरवरी-मार्च में ही आम चुनाव हुए थे। इन सभी सीटों पर जीत हासिल करने वाले उम्मीदवारों ने तब अपनी-अपनी पार्टी छोड़कर भाजपा जॉइन कर ली थी। इसके बाद यहां उपचुनाव कराने पड़े थे।
- भभानीपुर सीट से भाजपा के फणीधर तलुकदार ने जीत हासिल की। तलुकदार को कुल 56.41% वोट मिले। दूसरे नंबर पर कांग्रेस प्रत्याशी शैलेंद्र नाथ दास रहे। शैलेंद्र के पक्ष में 33.88% मतदान हुआ। इसी साल हुए यहां चुनाव में फणीधर ने एआईयूडीएफ से चुनाव में जीत हासिल की थी। बाद में फणीधर ने भाजपा का दामन थाम लिया था।
- गोसाईंगांव से भाजपा की सहयोगी पार्टी यूपीपीएल के जिरोन बासुमत्री ने जीत हासिल की। जिरोन का वोट शेयर 39.64% रहा, जबकि दूसरे नंबर पर रहे कांग्रेस प्रत्याशी जॉवेल टुडू को 20.58% वोट मिले। पिछले चुनाव में बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट के मजेंद्र नरजैरी ने जीत हासिल की थी। दूसरे नंबर पर यूपीपीएल के सोमनाथ नरजैरी थे। इस बार बोडोलैंड कहीं लड़ाई में ही नहीं दिखी।
- मोरैनी से भाजपा की रूपज्योति कुर्मी ने जीत हासिल की है। रूपज्योति के पक्ष में 62.38% वोट पड़े, जबकि दूसरे नंबर पर रहे कांग्रेस प्रत्याशी लुहित कोनवार को महज 17.3% वोट मिले। पिछले चुनाव में रूपज्योति कांग्रेस के प्रत्याशी के तौर पर जीते थे, बाद में उन्होंने भाजपा जॉइन कर ली थी। इसके चलते यहां उपचुनाव कराने पड़ गए।
- तमुलपुर से भाजपा की सहयोगी पार्टी यूपीपीएल ने जीत हासिल की है। यूपीपीएल के उम्मीदवार जोलेन डायमेरी को 59.62% वोट मिले थे। दूसरे नंबर पर निर्दलीय उम्मीदवार गणेश कचरी को 20.29% वोट मिले। पिछले चुनाव में भी यूपीपीएल को ही जीत मिली थी। तब पार्टी ने लेहो राम बोरो को उम्मीदवार बनाया था। हालांकि बाद में लेहो ने पार्टी छोड़ दी थी। जिसके बाद ये सीट खाली हो गई थी।
- थौरा सीट से भाजपा प्रत्याशी सुशांत बोरगोइन को जीत मिली है। सुशांत को 61.99% वोट मिले थे। दूसरे नंबर पर निर्दलीय उम्मीदवार धैज्य कोनवार रहे। धैज्य को 27.52% वोट मिले। पिछले चुनाव में सुशांत बोरगोइन ने इसी सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़कर जीत हासिल की थी। हालांकि, बाद में उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया था। इसके चलते यहां फिर से चुनाव कराने पड़े। पिछले चुनाव में सुशांत को 50.2% वोट मिले थे। दूसरे नंबर पर भाजपा के प्रत्याशी कौशल दौवरी थे।
हरियाणा और बिहार का रिजल्ट
बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार।
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3. बिहार की दो सीटों पर जेडीयू का कब्जा
राज्य के दो विधानसभा सीटों पर उपचुनाव हुए। दोनों ही सीटों पर भाजपा की सहयोगी दल जनता दल यूनाइटेड यानी JDU के उम्मीदवारों ने जीत हासिल की। राजनीतिक विशेषज्ञ रमाशंकर श्रीवास्तव बताते हैं कि उपचुनाव में आमतौर पर सत्ताधारी पार्टियों की ही जीत होती है। 2020 के आम चुनाव में भी इन दोनों सीटों पर जेडीयू का ही कब्जा था। हालांकि उपचुनाव के नतीजे राजद और कांग्रेस को जरूर परेशान करने वाले हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि दोनों ही पार्टियां लगातार जेडीयू को कमजोर बताते रहे हैं।
4. हरियाणा में अभय चौटाला फिर जीते
राज्य के दो विधानसभा सीटों पर उपचुनाव हुए। दोनों ही सीटों पर भाजपा की सहयोगी दल जनता दल यूनाइटेड यानी JDU के उम्मीदवारों ने जीत हासिल की। राजनीतिक विशेषज्ञ रमाशंकर श्रीवास्तव बताते हैं कि उपचुनाव में आमतौर पर सत्ताधारी पार्टियों की ही जीत होती है। 2020 के आम चुनाव में भी इन दोनों सीटों पर जेडीयू का ही कब्जा था। हालांकि उपचुनाव के नतीजे राजद और कांग्रेस को जरूर परेशान करने वाले हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि दोनों ही पार्टियां लगातार जेडीयू को कमजोर बताते रहे हैं।
- कुशेश्वरस्थान सीट से जेडीयू के अमन भूषण को सबसे ज्यादा 45.72% वोट मिले, जबकि राजद के गणेश भारती दूसरे नंबर पर रहे। गणेश को 36.02% वोट मिले। पिछले साल 2020 में यहां आम चुनाव हुए थे। तब जेडीयू के शशीभूषण हजारी ने जीत हासिल की थी।
- तारापुर सीट से जेडीयू के उम्मीदवार राजीव कुमार सिंह ने राजद के उम्मीदवार अरुण कुमार साह को 3821 मतों से हरा दिया। राजीव को 46.62% वोट मिले थे, जबकि दूसरे नंबर पर राजद के अरुण कुमार को 44.35% वोट मिले। 2020 में हुए आम चुनाव में जेडीयू के मेवा लाल चौधरी ने यहां से जीत हासिल की थी। तब मेवा लाल को 37.3% वोट मिले थे।
4. हरियाणा में अभय चौटाला फिर जीते
- यहां ऐलनाबाद सीट पर इंडियन नेशनल लोक दल (INLD) प्रमुख ओम प्रकाश चौटाला के बेटे अभय चौटाला ने कांग्रेस उम्मीदवार पवन बेनीवाल और भाजपा-जेपी उम्मीदवार गोविंद कांडा को हरा दिया है। यह सीट अभय के ही इस्तीफा देने से खाली हुई थी। इस बार अभय को 43.49% वोट मिले हैं। दूसरे नंबर पर भाजपा के उम्मीदवार गोबिंद कांडा रहे। गोबिंद को 39.05% वोट मिले। 2019 में हुए आम चुनाव में अभय चौटाला को 38.1% वोट मिले थे। तब भाजपा ने पवन बेनीवाल को 30.1% वोट मिले थे। राजनीतिक विशेषज्ञ रमाशंकर श्रीवास्तव के अनुसार किसान आंदोलन के बीच भाजपा का हरियाणा में वोट शेयर बढ़ना हरियाणा भाजपा के लिए थोड़ी राहत का संकेत है।
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर।
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अमर उजाला
5. हिमाचल प्रदेश में भाजपा की करारी हार
यहां सत्ताधारी पार्टी भाजपा की हार न केवल मंडी लोकसभा सीट पर हुई, बल्कि तीन विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव में भी हुई। हिमाचल की हार भाजपा के लिए बड़ी चुनौती है। ऐसा इसलिए क्योंकि ये भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा का गृह राज्य है। जिस मंडी लोकसभा सीट पर भाजपा को हार मिली वो मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के क्षेत्र में आती है।
मंडी संसदीय सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी और पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की पत्नी प्रतिभा सिंह ने, जबकि विधानसभा उपचुनाव में अर्की सीट पर कांग्रेस के संजय अवस्थी, जुब्बल-कोटखाई सीट पर कांग्रेस के रोहित ठाकुर और फतेहपुर सीट पर कांग्रेस के भवानी सिंह पठानिया ने जीत हासिल की।
अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से ठीक पहले भाजपा की करारी हार ने सीएम जयराम ठाकुर के नेतृत्व पर सवाल खड़े करने शुरू कर दिए हैं। राजनीतिक विशेषज्ञ प्रदीप भास्कर बताते हैं कि 2017 विधानसभा चुनाव में हारने के बाद पूर्व सीएम प्रेम कुमार धूमल की कुर्सी जयराम ठाकुर को दे दी गई थी। लेकिन इन चार साल के कार्यकाल में जयराम ठाकुर कई मोर्चों पर फेल रहे। इसका खामियाजा उपचुनाव में पार्टी को हार के रूप में भुगतना पड़ा।
यहां सत्ताधारी पार्टी भाजपा की हार न केवल मंडी लोकसभा सीट पर हुई, बल्कि तीन विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव में भी हुई। हिमाचल की हार भाजपा के लिए बड़ी चुनौती है। ऐसा इसलिए क्योंकि ये भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा का गृह राज्य है। जिस मंडी लोकसभा सीट पर भाजपा को हार मिली वो मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के क्षेत्र में आती है।
मंडी संसदीय सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी और पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की पत्नी प्रतिभा सिंह ने, जबकि विधानसभा उपचुनाव में अर्की सीट पर कांग्रेस के संजय अवस्थी, जुब्बल-कोटखाई सीट पर कांग्रेस के रोहित ठाकुर और फतेहपुर सीट पर कांग्रेस के भवानी सिंह पठानिया ने जीत हासिल की।
अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से ठीक पहले भाजपा की करारी हार ने सीएम जयराम ठाकुर के नेतृत्व पर सवाल खड़े करने शुरू कर दिए हैं। राजनीतिक विशेषज्ञ प्रदीप भास्कर बताते हैं कि 2017 विधानसभा चुनाव में हारने के बाद पूर्व सीएम प्रेम कुमार धूमल की कुर्सी जयराम ठाकुर को दे दी गई थी। लेकिन इन चार साल के कार्यकाल में जयराम ठाकुर कई मोर्चों पर फेल रहे। इसका खामियाजा उपचुनाव में पार्टी को हार के रूप में भुगतना पड़ा।
- अर्की विधानसभा सीट पर कांग्रेस के संजय अवस्थी ने भाजपा उम्मीदवार रतन सिंह पाल को 3219 वोटों से हराया। 30 अक्टूबर को हुए मतदान में अर्की सीट पर कुल 60550 वोट पड़े थे और कांग्रेस के संजय अवस्थी को इसमें से 30798 मत मिले। दूसरे नंबर पर रहने वाले भाजपा के रतन सिंह पाल को 27579 वोट मिले। आखिरी राउंड में भाजपा प्रत्याशी को अधिक वोट मिले, मगर वह संजय अवस्थी की लीड को पार नहीं कर पाए और 3219 वोटों से हार गए। 2017 में हुए आम चुनाव में यहां से पूर्व सीएम और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने जीत हासिल की थी। इसी साल जुलाई में उनकी मौत के बाद ये सीट खाली हो गई थी। वीरभद्र सिंह ने 2017 में 54.2% वोट हासिल किया था।
- जुब्बल-कोटखाई सीट पर सुबह से ही मुकाबला कांग्रेस के रोहित ठाकुर और भाजपा से बागी होकर, निर्दलीय चुनाव लड़ने वाले चेतन बरागटा के बीच रहा। यहां रोहित ठाकुर ने बरागटा को 6293 वोटों से हराया। उपचुनाव के दौरान जुब्बल-कोटखाई सीट पर 30 अक्टूबर को 56607 लोगों ने वोट दिया। इसमें से रोहित ठाकुर को 29955 वोट मिले। भाजपा के पूर्व मंत्री नरेंद्र बरागटा के बेटे और निर्दलीय चुनाव लड़ने वाले चेतन सिंह बरागटा दूसरे नंबर पर रहे। उन्हें 23662 मत मिले। यहां भाजपा ने चेतन बरागटा की जगह नीलम सरैइक को टिकट दिया था जो कभी भी मुकाबले में नजर नहीं आईं। सुबह से ही तीसरे नंबर पर रहीं नीलम को महज 2644 वोट मिले।
- फतेहपुर विधानसभा सीट पर कांग्रेस के भवानी सिंह पठानिया और भाजपा उम्मीदवार बलदेव ठाकुर के बीच आखिरी डेढ़ घंटे से पहले तक कांटे का मुकाबला रहा और उसके बाद पठानिया ने 5789 वोट से जीत दर्ज की।30 अक्टूबर को मतदान में फतेहपुर विधानसभा सीट पर कुल 57095 लोगों ने वोट दिया था। इसमें से 24449 वोट लेकर कांग्रेस के भवानी सिंह पठानिया ने जीत दर्ज की। दूसरे नंबर पर रहे भाजपा के बलदेव ठाकुर को 18660 वोट मिले।
कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई।
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6. कर्नाटक में सीएम अपने जिले की सीट नहीं बचा पाए
यहां दो विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव में भाजपा ने एक सीट पर जीत हासिल की, जबकि दूसरी सीट पर कांग्रेस ने छीन ली। कर्नाटक में हाल ही में मुख्यमंत्री बदले गए हैं। बीएस येदियुरप्पा की जगह बसवराज बोम्मई को पार्टी ने सीएम की कुर्सी सौंप दी है। राजनीतिक विशेषज्ञों की मानें तो प्रदेश में हुए इस बड़े उलटफेर का नतीजा उपचुनाव में एक सीट पर मिली हार है।
यहां दो विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव में भाजपा ने एक सीट पर जीत हासिल की, जबकि दूसरी सीट पर कांग्रेस ने छीन ली। कर्नाटक में हाल ही में मुख्यमंत्री बदले गए हैं। बीएस येदियुरप्पा की जगह बसवराज बोम्मई को पार्टी ने सीएम की कुर्सी सौंप दी है। राजनीतिक विशेषज्ञों की मानें तो प्रदेश में हुए इस बड़े उलटफेर का नतीजा उपचुनाव में एक सीट पर मिली हार है।
- 2018 में हुए आम चुनाव में हंगल विधानसभा से भाजपा के प्रत्याशी सीएम उदासी ने जीत हासिल की थी। तब भाजपा को 49.3% वोट मिले थे। दूसरे नंबर पर कांग्रेस के मने श्रीनिवास थे और उन्हें 45.3% वोट मिले थे। इस बार उपचुनाव में कांग्रेस के श्रीनिवास ने 50.98% वोट हासिल करके चुनाव जीत लिया। भाजपा के शिवराज सरानप्पा को 46.65% वोट मिले। आंकड़ों से साफ है कि यहां कांग्रेस का वोट प्रतिशत बढ़ गया है, जबकि भाजपा का घट गया। सबसे ज्यादा चर्चा इसी सीट की है। ऐसा इसलिए क्योंकि ये मुख्यमंत्री बसवराज के गृहनगर की सीट है। बोम्मई ने खुद चुनाव में काफी बढ़-चढ़कर प्रचार किया था, लेकिन इस हार से उनके नेतृत्व पर अब सवाल खड़े होने लगे हैं।
- सिंदगी विधानसभा सीट पर भाजपा के प्रत्याशी भूसनूर रमेश बलप्पा ने जीत हासिल की। भूसनूर को 57.31% वोट मिले, जबकि दूसरे नंबर पर रहे कांग्रेस के अशोक मलप्पा को 38.27% वोट से ही संतोष करना पड़ा। 2018 में हुए आम चुनाव में इस सीट से जनता दल सेक्युलर के प्रत्याशी मंगुली मलप्पा ने जीत हासिल की थी। मलप्पा को 44.5% वोट मिले थे, जबकि दूसरे नंबर पर भाजपा के भूसनूर रमेश थे। जो इस बार विधायक चुने गए हैं।
मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान फेल हुए या पास?
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान।
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7. मध्य प्रदेश में शिवराज का जलवा कायम
मध्यप्रदेश में खंडवा लोकसभा के साथ-साथ तीन विधानसभा सीटों पर भी उपचुनाव हुए थे। इनमें जोबट, पृथ्वीपुर और रैगांव शामिल है। जोबट और पृथ्वीपुर में भाजपा को जीत मिली, जबकि रैगांव में भाजपा ने अपनी सीट गंवा दी। हालांकि ओवरऑल नतीजों ने शिवराज सिंह चौहान को पास कर दिया।
मध्यप्रदेश में खंडवा लोकसभा के साथ-साथ तीन विधानसभा सीटों पर भी उपचुनाव हुए थे। इनमें जोबट, पृथ्वीपुर और रैगांव शामिल है। जोबट और पृथ्वीपुर में भाजपा को जीत मिली, जबकि रैगांव में भाजपा ने अपनी सीट गंवा दी। हालांकि ओवरऑल नतीजों ने शिवराज सिंह चौहान को पास कर दिया।
- जोबट में भाजपा की सुलोचना रावत ने 46.92% वोट पाकर जीत हासिल की। दूसरे नंबर पर कांग्रेस के महेश रावत पटेल थे। महेश को 42.77% वोट से ही संतोष करना पड़ा। 2018 में हुए आम चुनाव में ये सीट कांग्रेस के खाते में गई थी। कांग्रेस के प्रत्याशी रहे कलावती भूरिया ने इस सीट से जीत हासिल की थी। तब उन्हें 34.8% वोट मिले थे। दूसरे नंबर पर भाजपा के माधो सिंह को 33.3% वोट से ही संतोष करना पड़ा था।
- पृथ्वीपुर सीट जीतकर भाजपा ने बड़ी बढ़त हासिल की है। ऐसा इसलिए क्योंकि इस सीट पर 2018 में हुए आम चुनाव में भाजपा चौथे नंबर पर थी। तब भाजपा के उम्मीदवार को महज 7.0% वोट से ही संतोष करना पड़ा था। कांग्रेस के उम्मीदवार बृजेंद्र सिंह राठौर ने यहां से 35% वोट के साथ जीत हासिल की थी। दूसरे नंबर पर समाजवादी पार्टी और तीसरे पर बहुजन समाज पार्टी के नंदराम कुशवाहा थे। इस बार भाजपा के उम्मीदवार डॉ. शिशुपाल यादव ने 53.12% वोट हासिल किया। दूसरे नंबर पर कांग्रेस के प्रत्याशी नीतेंद्र सिंह राठौर रहे। उपचुनाव में न केवल भाजपा का वोट शेयर बढ़ा है, बल्कि कांग्रेस की हार करीब 15 हजार से भी ज्यादा वोटों से हुई है।
- जोबट और पृथ्वीपुर में भले ही जीत हुई है, लेकिन रैगांव में भाजपा ने अपनी सीट गंवा दी। यहां कांग्रेस की उम्मीदवार कल्पना वर्मा ने 50.8% वोट हासिल करके जीत हासिल की। भाजपा की प्रतिमा बागरी ने 42.25% वोट पाया। 2018 में हुए आम चुनाव के मुकाबले भाजपा ने न केवल अपनी सीट गंवाई है, बल्कि वोट शेयर भी कम हुआ है। तब यहां से भाजपा के जुगुल किशोर को जीत मिली थी। उनका वोट शेयर 45.5% था। कांग्रेस की उम्मीदवार कल्पना को 33.5% वोट मिले थे।
मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा। (फाइल फोटो)
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8. महाराष्ट्र में कांग्रेस ने अपनी सीट बचाई
यहां देगुलर सीट पर कांग्रेस ने अपना कब्जा बरकरार रखा है। यहां कांग्रेस के ए. जितेश रावसाहब ने BJP के सुभाष पिराजीराव को 41933 वोट के अंतर से हराया है। 2019 में हुए आम चुनाव में भी यहां कांग्रेस के प्रत्याशी को ही जीत मिली थी। तब कांग्रेस के उम्मीदवार रहे अंतापुरकार रावसाहेब जयवंता को 50.7% वोट मिला था। शिवसेना के सबने सुभाष पिराजीराव दूसरे नंबर पर थे। इस बार उपचुनाव में कांग्रेस के अंतापुरकार जीतेश रावसाहेब ने 57.03% वोट हासिल किया। भाजपा के सबने सुभाष 35.5% वोट के साथ हार गए।
9. मेघालय में भाजपा की सहयोगी दलों का जलवा
यहां तीन सीटों पर हुए उपचुनाव में भाजपा की सहयोगी पार्टी एनपीपी ने दो और यूडीपी ने एक सीट पर जीत हासिल की है। मेघालय में एनपीपी को भाजपा ने समर्थन देकर सरकार बनाई है। एनपीपी के चीफ कॉनराड संगमा ही मुख्यमंत्री हैं। एनपीपी को भाजपा के दो और यूडीपी के छह विधायकों का समर्थन है।
यहां राजाबाला सीट पर एनपीपी के एमडी अब्दुस सल्लाह को जीत मिली है। 2018 में हुए आम चुनाव में ये सीट कांग्रेस के खाते में थी। इसी तरह मावफलांग सीट से यूडीपी के इगूनसन लिंगदोह जीते हैं। 2018 आम चुनाव में ये सीट निर्दलीय उम्मीदवार के खाते में थी। मावरीन्ग्नेंग सीट से 2018 आम चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार की जीत हुई थी। इस बार ये सीट एनपीपी के खाते में गई है।
यहां देगुलर सीट पर कांग्रेस ने अपना कब्जा बरकरार रखा है। यहां कांग्रेस के ए. जितेश रावसाहब ने BJP के सुभाष पिराजीराव को 41933 वोट के अंतर से हराया है। 2019 में हुए आम चुनाव में भी यहां कांग्रेस के प्रत्याशी को ही जीत मिली थी। तब कांग्रेस के उम्मीदवार रहे अंतापुरकार रावसाहेब जयवंता को 50.7% वोट मिला था। शिवसेना के सबने सुभाष पिराजीराव दूसरे नंबर पर थे। इस बार उपचुनाव में कांग्रेस के अंतापुरकार जीतेश रावसाहेब ने 57.03% वोट हासिल किया। भाजपा के सबने सुभाष 35.5% वोट के साथ हार गए।
9. मेघालय में भाजपा की सहयोगी दलों का जलवा
यहां तीन सीटों पर हुए उपचुनाव में भाजपा की सहयोगी पार्टी एनपीपी ने दो और यूडीपी ने एक सीट पर जीत हासिल की है। मेघालय में एनपीपी को भाजपा ने समर्थन देकर सरकार बनाई है। एनपीपी के चीफ कॉनराड संगमा ही मुख्यमंत्री हैं। एनपीपी को भाजपा के दो और यूडीपी के छह विधायकों का समर्थन है।
यहां राजाबाला सीट पर एनपीपी के एमडी अब्दुस सल्लाह को जीत मिली है। 2018 में हुए आम चुनाव में ये सीट कांग्रेस के खाते में थी। इसी तरह मावफलांग सीट से यूडीपी के इगूनसन लिंगदोह जीते हैं। 2018 आम चुनाव में ये सीट निर्दलीय उम्मीदवार के खाते में थी। मावरीन्ग्नेंग सीट से 2018 आम चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार की जीत हुई थी। इस बार ये सीट एनपीपी के खाते में गई है।
मिजोरम और राजस्थान में क्या हुआ?
राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत। (फाइल फोटो)
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अमर उजाला
10. मिजोरम में सत्ताधारी पार्टी की जीत
यहां सत्ताधारी पार्टी मिजो नेशनल फ्रंट के उम्मीदवार के. लालडावांग्लियाना को जीत मिली है। लालडावांग्लियाना को 39.89% वोट मिले हैं। दूसरे नंबर पर जोरम पीपुल्स मूवमेंट के उम्मीदवार रहे। इन्हें 31.02% वोट मिले। 2018 में हुए आम चुनाव में ये सीट निर्दलीय उम्मीदवार एंड्रयू एच थांगलीना के खाते में गई थी।
11. राजस्थान में कांग्रेस का जलवा
यहां दो विधानसभा सीटों के लिए उपचुनाव हुए। वल्लभनगर में कांग्रेस 20,606 मतों से जीती तो धरियावद में 18,725 मतों से जीत दर्ज की। धरियावद सीट पर कांग्रेस के नागराज को 39.16% वोट मिले। भाजपा के उम्मीदवार खेत सिंह को महज 26.08% वोट से ही संतोष करना पड़ा। यहां निर्दलीय उम्मीदवार थावरचंद ने भाजपा से भी ज्यादा वोट हासिल किया। उन्हें 28.66% वोट मिले। 2018 में हुए आम चुनाव में ये सीट भाजपा के खाते में थी, लेकिन अब भाजपा को यहां से हार का सामना करना पड़ा। तब भाजपा को 51.2% वोट मिला था।
वल्लभनगर सीट पर तो भाजपा चौथे नंबर पर रही। यहां कांग्रेस के उम्मीदवार प्रीति गजेंद्र सिंह शेखावत को 35.9% वोट मिले। दूसरे नंबर पर राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के उदयलाल दांगी को 24.15% वोट मिले। तीसरे नंबर पर निर्दलीय उम्मीदवार रहे एम रणधीर सिंह ने 23.04% वोट हासिल किया। चौथे नंबर पर भाजपा उम्मीदवार को 11.71% वोट से ही संतोष करना पड़ा। 2018 में भी ये सीट कांग्रेस के कब्जे में ही थी।
यहां सत्ताधारी पार्टी मिजो नेशनल फ्रंट के उम्मीदवार के. लालडावांग्लियाना को जीत मिली है। लालडावांग्लियाना को 39.89% वोट मिले हैं। दूसरे नंबर पर जोरम पीपुल्स मूवमेंट के उम्मीदवार रहे। इन्हें 31.02% वोट मिले। 2018 में हुए आम चुनाव में ये सीट निर्दलीय उम्मीदवार एंड्रयू एच थांगलीना के खाते में गई थी।
11. राजस्थान में कांग्रेस का जलवा
यहां दो विधानसभा सीटों के लिए उपचुनाव हुए। वल्लभनगर में कांग्रेस 20,606 मतों से जीती तो धरियावद में 18,725 मतों से जीत दर्ज की। धरियावद सीट पर कांग्रेस के नागराज को 39.16% वोट मिले। भाजपा के उम्मीदवार खेत सिंह को महज 26.08% वोट से ही संतोष करना पड़ा। यहां निर्दलीय उम्मीदवार थावरचंद ने भाजपा से भी ज्यादा वोट हासिल किया। उन्हें 28.66% वोट मिले। 2018 में हुए आम चुनाव में ये सीट भाजपा के खाते में थी, लेकिन अब भाजपा को यहां से हार का सामना करना पड़ा। तब भाजपा को 51.2% वोट मिला था।
वल्लभनगर सीट पर तो भाजपा चौथे नंबर पर रही। यहां कांग्रेस के उम्मीदवार प्रीति गजेंद्र सिंह शेखावत को 35.9% वोट मिले। दूसरे नंबर पर राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के उदयलाल दांगी को 24.15% वोट मिले। तीसरे नंबर पर निर्दलीय उम्मीदवार रहे एम रणधीर सिंह ने 23.04% वोट हासिल किया। चौथे नंबर पर भाजपा उम्मीदवार को 11.71% वोट से ही संतोष करना पड़ा। 2018 में भी ये सीट कांग्रेस के कब्जे में ही थी।
बंगाल में टीएमसी, तेलंगाना में बीजेपी
ममता बनर्जी की फाइल फोटो
- फोटो :
अमर उजाला
12. भाजपा ने तेलंगाना में जीत हासिल की
यहां हुजूराबाद विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार एताला राजेंद्र को जीत हासिल हुई। राजेंद्र को 51.96% वोट मिले। दूसरे नंबर पर सत्ताधारी पार्टी यानी तेलंगाना राष्ट्र समिति के उम्मीदवार रहे। 2018 में हुए आम चुनाव में ये सीट टीआरएस के खाते में ही गई थी।
13. पश्चिम बंगाल में ममता का दमदार प्रदर्शन
राज्य में चार विधानसभा सीटों पर उपचुनाव हुए और सभी सीटें तृणमूल कांग्रेस यानी टीएमसी के खाते में गई। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इसी साल हुए आम चुनाव में शानदार जीत हासिल की थी। अब उपचुनाव में भी जीत मिलने से सरकार पर उनकी पकड़ और भी मजबूत हो गई है।
यहां हुजूराबाद विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार एताला राजेंद्र को जीत हासिल हुई। राजेंद्र को 51.96% वोट मिले। दूसरे नंबर पर सत्ताधारी पार्टी यानी तेलंगाना राष्ट्र समिति के उम्मीदवार रहे। 2018 में हुए आम चुनाव में ये सीट टीआरएस के खाते में ही गई थी।
13. पश्चिम बंगाल में ममता का दमदार प्रदर्शन
राज्य में चार विधानसभा सीटों पर उपचुनाव हुए और सभी सीटें तृणमूल कांग्रेस यानी टीएमसी के खाते में गई। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इसी साल हुए आम चुनाव में शानदार जीत हासिल की थी। अब उपचुनाव में भी जीत मिलने से सरकार पर उनकी पकड़ और भी मजबूत हो गई है।
- दीनहाता में इसी साल हुए आम चुनाव में भाजपा के उम्मीदवार निशित प्रमाणिक जीते थे। हालांकि बाद में उन्होंने टीएमसी जॉइन कर ली थी। तब 47.9% वोट के साथ भाजपा जीती थी, लेकिन उपचुनाव में पार्टी को केवल 11.31% वोट मिले।
- गोसाबा में टीएमसी के उम्मीदवार सुब्रता मंडल ने शानदार जीत हासिल की। सुब्रता को 87.19% वोट मिले, जबकि भाजपा के उम्मीदवार को महज 9.65% वोट के साथ संतोष करना पड़ा। इसी साल हुए आम चुनाव में यहां से टीएमसी के उम्मीदवार जयंत नासकार ने जीत हासिल की थी।
- खरदाहा में टीएमसी उम्मीदवार शोभानदेब चटोपाध्याय ने जीत हासिल की। उन्हें 73% वोट मिले। दूसरे नंबर पर भाजपा के जॉय साहा रहे। जॉय साहा को 13.07% वोट मिले। इसके पहले आम चुनाव में इस सीट से टीएमसी के उम्मीदवार काजल सिन्हा को जीत मिली थी।
- शांतिपुर में टीएमसी उम्मीदवार बृजकिशोर गोस्वामी को 54.04% वोट मिले। दूसरे नंबर पर भाजपा के निरंजन बिस्वास रहे। निरंजन को 23.22% वोट मिले। आम चुनाव में यहां भाजपा ने जीत हासिल की थी। हालांकि जीत के बाद भाजपा उम्मीदवार ने टीएमसी जॉइन कर ली।