बुल्ली बाई एप केस : शिकायतकर्ता को आ रहे धमकी भरे कॉल, एक आरोपी कोरोना संक्रमित निकला
मुंबई की एक अदालत ने बुल्ली बाई एप मामले में उत्तराखंड से गिरफ्तार आरोपियों श्वेता सिंह और मयंक रावल की पुलिस हिरासत की अवधि सोमवार को बढ़ाकर 14 जनवरी तक कर दी।
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बुल्ली बाई एप केस मामले में हुई गिरफ्तारियों के बाद अब शिकायतकर्ता को धमकी दिए जाने का मामला सामने आया है। एक शिकायतकर्ता ने पुलिस को जानकारी दी है कि उसे धमरी भरे कॉल आ रहे हैं। इस जानकारी के बाद मुंबई पुलिस के साइबर विभाग ने अज्ञात शख्स के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। उधर, दूसरी ओर इस मामले बेंगलुरु से गिरफ्तार किए गए आरोपी की कोरोना टेस्ट की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है।
स्थानीय पुलिस के एक अधिकारी ने शनिवार को बताया कि एक अज्ञात शख्स के खिलाफ गैर संज्ञेय मामला दर्ज किया गया है। उन्होंने कहा कि पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि फोन करने वाले को शिकायतकर्ता का मोबाइल नंबर कैसे मिला। अधिकारी ने कहा कि इसके अलावा कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई है और आगे की जांच जारी है। बुली बाई एप के माध्यम से विशेष समुदाय की महिलाओं को निशाना बनाया जा रहा था। उनकी तस्वीरों से छेड़छाड़ करके इंटरनेट पर अपलोड की जा रही थीं।
एक आरोपी कोरोना पॉजिटिव निकला, दो आरोपियों की हिरासत 14 जनवरी तक बढ़ी
बुल्ली बाई केस के आरोपी विशाल कुमार झा को बांद्रा कोर्ट ने सोमवार को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। इस दौरान कोविड जांच में रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर उसे बीएमसी के क्वारंटीन सेंटर में भेज दिया गया। आरोपी के वकील ने बताया कि विशाल 24 जनवरी तक न्यायिक हिरासत में रहेगा। इस दौरान वह अदालत में उपस्थित नहीं था।
वहीं मुंबई की एक अदालत ने बुल्ली बाई एप मामले में उत्तराखंड से गिरफ्तार आरोपियों श्वेता सिंह और मयंक रावल की पुलिस हिरासत की अवधि सोमवार को बढ़ाकर 14 जनवरी तक कर दी। पुलिस ने सोमवार को श्वेता सिंह (18) और मयंक रावल (21) की पुलिस हिरासत की अवधि बढ़ाने का अनुरोध करते हुए बांद्रा के मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट को बताया कि मामला अभी महत्वपूर्ण चरण में है। इसलिए आरोपियों से पूछताछ आवश्यक है। सिंह और रावल को पांच जनवरी को उत्तराखंड से गिरफ्तार किया गया था, जबकि झा की गिरफ्तारी चार जनवरी को बेंगलुरु से हुई थी।
जानिए क्या है 'बुल्ली बाई' ऐप विवाद?
- बुल्ली बाई(Bulli Bai App) लोगों को बरगलाने और वित्तीय लाभ कमाने के लिए देश भर में एक संदिग्ध समूह (उनमें से अधिकांश की पहचान अभी बाकी है) द्वारा विकसित एक एप है।
- एप को बनाने के पीछे का मकसद भारतीय महिलाओं (ज्यादातर मुस्लिम) की नीलामी के लिए रखना और बदले में पैसा कमाना है।
- 'बुल्ली बाई' एप माइक्रोसॉफ्ट के मालिकाना हक वाली ओपन सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट साइट GitHub पर बनाया गया था।
- बुल्ली बाई जैसी घटनाओं में, साइबर अपराधी इंटरनेट से लोकप्रिय महिलाओं, सेलेब्स, प्रभावशाली लोगों, पत्रकारों आदि की तस्वीरें लेते हैं और उनका उपयोग अपने वित्तीय लाभ के लिए करते हैं।
- ये ऑनलाइन स्कैमर्स सोशल मीडिया अकाउंट से इन महिलाओं की तस्वीरें चुराते हैं और उन्हें प्लेटफॉर्म पर लिस्ट कर देते हैं। इसलिए इन महिलाओं को हमेशा अपनी प्रोफाइल को लॉक करके रखना चाहिए या अपनी प्रोफाइल को प्राइवेट रखना चाहिए।
- एप पर प्रोफाइल में पीड़ितों की फोटो और दूसरे पर्सनल डिटेल शामिल थे, जो महिलाओं की सहमति के बिना बनाई गई और शेयर किए जा रहे थे।
- ट्विटर पर बुल्ली बाई एप से कई पोस्ट शेयर होने के तुरंत बाद, सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को ऐसे अपमानजनक पोस्ट को तत्काल प्रभाव से हटाने का निर्देश दिया।
मुस्लिम महिलाओं को ट्रोल करने वाले ट्रेड ग्रुप का सदस्य था
दिल्ली में स्पेशल सेल के डीसीपी केपीएस मल्होत्रा ने बताया कि सुल्ली डील्स के ऐप क्रिएटर ओंकारेश्वर ठाकुर को गिरफ्तार किया है। ठाकुर ने कबूल किया कि उसने जुलाई 2021 में गिटहब पर सुल्ली डील्स ऐप बनाया। ऐप से कई मुस्लिम महिलाओं की सहमति के बिना नीलामी के लिए उनकी तस्वीरें अपलोड की गई थीं।
ठाकुर ने जनवरी 2020 में ट्विटर हैंडल @gangescion का इस्तेमाल कर ट्विटर पर ट्रेडमहासभा के नाम से ग्रुप में शामिल हुआ था। सदस्यों ने मुस्लिम महिलाओं को ट्रोल करने की साजिश रची थी। हंगामे के बाद सभी लोगों ने सोशल मीडिया फुटप्रिंट्स को डिलीट कर दिया था।