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सरकार ने अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने की उम्मीद छोड़ी: पी चिदंबरम

Sat, 01 Feb 2020 07:37 PM IST
आसिम खान न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: आसिम खान Updated Sat, 01 Feb 2020 07:37 PM IST
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Budget 2020: Central Government left hope of bringing economy back on track says P Chidambaram
पी. चिदंबरम (फाइल फोटो) - फोटो : ANI

पूर्व वित्त मंत्री और कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने मोदी सरकार के बजट 2020-21 पर अपनी प्रतिक्रिया जताते हुए कहा कि सरकार ये मानने को तैयार नहीं है कि देश की अर्थव्यवस्था पर संकट है। सरकार ने अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने की उम्मीद भी छोड़ दी है। चिदंबरम ने लंबे बजट पर चुटकी लेते हुए कई सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मैं 160 मिनट तक चले लंबे भाषण को देखा लेकिन मुझे कोई ऐसी घोषणा, यादगार विचार या बयान नहीं दिखा जिससे पता चले कि सरकार का क्या संदेश देने का का इरादा था।

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चिदंबरम का कहना है कि बजट में रोजगार सृजन के लिए कुछ भी नहीं कहा गया है। बजट से लगता है कि सरकार अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने, निजी निवेश को प्रोत्साहित करने और रोजगार के अवसर सृजित करने की उम्मीद छोड़ चुकी है। सरकार इस बात से गुरेज कर रही है कि उसे अर्थव्यवस्था को लेकर वैश्विक और व्यापक चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। सरकार ने अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित कर आगे बढ़ाने, निजी निवेश को प्रोत्साहन देने, रोजगार सृजन, विश्व व्यापार में भारत की हिस्सेदारी बढ़ाने के बजाए सभी महत्वपूर्ण हिस्सों को छोड़ दिया है।
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चिदंबरम ने सवाल किया कि क्या वित्त मंत्री ने आर्थिक समीक्षा नहीं पढ़ी, मुझे लगता है कि नहीं पढ़ी। जनता ऐसा बजट नहीं चाहती थी, इसके लिए भाजपा को वोट नहीं दिया था। उनका कहना है कि एलआईसी को निजी बीमा कंपनियों के आने से प्रतिस्पर्धा करनी पड़ रही है लेकिन निजी क्षेत्र की भागीदारी को लेकर इस पर चर्चा होनी चाहिए थी संसद में भी इस पर बहस हो। चिदंबरम का कहना है कि पिछली छह तिमाहियों में विकास दर लगातार गिरकर पांच प्रतिशत से कम हो गई है। ऐसे में 2020-21 में विकास दर की गति कैसे बढ़ेगी, न तो वो सामने है और न ही आंकड़ों में दर्शाया जा सकता है। 
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वित्त मंत्री का छह से साढ़े 6.5 प्रतिशत की विकास दर का दावा अपने आपमें या तो आश्चर्यचकित करता है या गैर जिम्मेराना है। उन्होंने कहा कि पहली बार बजट में खाद्य सब्सिडी कम कर दी गई है। पिछले साल खाद्य सब्सिडी एक लाख 84 हजार करोड़ रुपये थी। वित्त मंत्री ने एक लाख 15 हजार करोड़ रुपये खाद्य सब्सिडी प्रस्तावित की है।  देश के गरीब की थाली में जो खाना जाना है खाद्य सुरक्षा कानून के तहत उसमें कटौती हुई है। किसान की फसल की खरीदी का जो पैसा है उसमें 68.650 करोड़ की कटौती कर दी गई है। 

इसी प्रकार लगभग 9 हजार करोड़ रुपया किसान के खाद्य की सब्सिडी कम कर ली है जो गरीब के ऊपर एक गहरा प्रहार करने वाला है। किसानों की आय न तो दोगुनी हुई और 75 प्रतिशत किसानों को पीएम किसान योजना का लाभ नहीं मिल रहा है। चिदंबरम ने कहा कि ये सरकार आर्थिक सुधारों में विश्वास नहीं करती है। एक तरफ  संविधान पर राजनैतिक हमला बोलती है, प्रजातंत्र को पंगु बनाने का प्रयास करती है। 

संवैधानिक अधिकारों को पांव के तले रौंदती है और दूसरी तरफ आर्थिक चुनौतियों का सामना करने से गुरेज करती है। उनका कहना है कि माइनिंग, निर्माण और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में रोजगार की असीम संभावनाएं हैं लेकिन सरकार ने इस पर ध्यान नहीं दिया है। वित्त मंत्री ने बजट में निजी निवेश को प्रोत्साहन, रोजगार सृजन,  युवाए विकास दर और दक्षता बढ़ाने की दिशा में भी कोई बात नहीं कही।  


अर्थव्यवस्था चिंताजनक है: कपिल सिब्बल
कांग्रेस सांसद कपिल सिब्बल ने बजट पर प्रतिक्रिया जताते हुए कहा कि राजकोषीय घाटे के आंकड़े से साफ है कि अर्थव्यवस्था चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि वित्त मंत्री ने भी ये माना है कि राजकोषीय घाटा 3.8 प्रतिशत है। सिब्बल का कहना है वित्त मंत्री देश को बताएं कि अगर केंद्रीय और राज्यों का घाटा जोड़ा जाए तो यह आठ प्रतिशत से ज्यादा है जो चिंता का विषय है।

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