बजट से नई नौकरियों के रास्ते खुले, पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने से महंगाई भी बढ़ेगी
देश की पहली महिला पूर्णकालिक वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने नरेंद्र मोदी सरकार 2.0 का पहला बजट पेश करते हुए अगले दस वर्ष का खाका पेश कर दिया। बजट से साफ हो गया है कि सरकार आने वाले दस साल में देश को किस दिशा में लेकर जाना चाहती है। पहली नजर में सरकार ने गरीब और मध्यम वर्ग को राहत बरकरार रखी है।
कृषि और किसानों के लिए ज्यादा कल्याणकारी योजनाओं को बनाने का रास्ता बनाए रखा है। बेरोजगारी सरकार के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय बनी हुई थी, विमानन और इन्श्योरेंस सेक्टर में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को सौ फीसदी की अनुमति देकर और इन्फ्रास्ट्रक्चर में निवेश को बढ़ाकर युवाओं के लिए रोजगार की चिंता दिखा दी है।
निर्माण क्षेत्र में भी कई अनुकूल परिवर्तन करने के कारण अर्थव्यवस्था के गति पकड़ने की उम्मीद है। हालांकि, सरकार ने पेट्रोल-डीजल के दामों में दो रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर दी है, इसके कारण जिसके कारण माल ढुलाई बढ़ेगी और कई अन्य चीजों के दाम बढ़ेंगे। इस तरह अब तक काबू में रही महंगाई के बढ़ने की भी आशंका तेज हो गई है।
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता गोपाल कृष्ण अग्रवाल ने कहा कि सरकार ने हर मद में खर्च किया जाने वाला धन बढ़ाया है। इसमें आधारभूत ढांचे से लेकर कल्याणकारी योजनाएं तक शामिल हैं। घरों को खरीदने के लिए 3.50 लाख रुपये की छूट दी है, किराया कानून में परिवर्तन और रेंटल हाउस के विचार को आगे बढ़ाने से भी घरों के निर्माण में तेजी आएगी।
उन्होंने कहा कि इसके साथ ही ज्यादा निवेश से रोजगार के अवसरों में वृद्धि होगी और युवाओं को बेहतर मौके मिलेंगे। बैंकों को 70 हजार करोड़ रुपये नकदी उपलब्ध कराने की बात कही गई है। इससे बैंक लोगों को ज्यादा कर्ज दे सकेंगे और इससे भी रोजगार के अवसरों में इजाफा होगा।
व्यापारिक नेताओं की मिली जुली प्रतिक्रिया
व्यापारियों के संगठन कैट ने कहा है कि सरकार ने गरीब व्यापारियों के लिए पेंशन देने का एलान कर बड़ा काम किया है। इसी प्रकार 250 करोड़ वाली कंपनियों की बजाय 400 करोड़ रुपये प्रति वर्ष का टर्न ओवर रखने वाली कंपनियों को भी 25 फीसदी के कार्पोरेट टैक्स के दायरे में लाने से देश की 99 फीसदी कंपनियां आ जाएंगी। इससे भी व्यापारियों को मदद मिलेगी। हालांकि, सोने जैसी धातुओं के ड्यूटी में वृद्धि करने से कुछ व्यापारियों ने बजट की आलोचना की है।
सरकार का टैक्स कलेक्शन बढ़ा
जीएसटी लागू हुए दो वर्ष हो गये हैं। बजट में भी यह साफ हुआ है कि जीएसटी के कारण सरकार की आय में काफी बढ़ोतरी हुई है। इससे सरकार के पास अतिरिक्त पैसा आया है जो कल्याणकारी योजनाओं को आगे बढ़ाने में काम आएगा। पिछले वित्त वर्ष के 10,02,741 करोड़ रुपये की तुलना में इस वर्ष सरकार के पास 13.46 फीसदी ज्यादा टैक्स कलेक्शन होने की उम्मीद है।
इस वर्ष यह राशि 11,37,686 रहने का अनुमान है। जीएसटी लागू होने के पूर्व वर्ष 2013-14 में केंद्र सरकार का टैक्स कलेक्शन 6,38,596 करोड़ रहा था। जीएसटी के कारण टैक्स देने वालों की संख्या में भी तेज बढ़ोतरी हुई है। वर्ष 2017-18 में 8,44,46,376 लोगों ने टैक्स दिया है। इस वर्ष यह संख्या और भी बढ़ने की उम्मीद है।