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नेताजी सुभाष चंद्र बोस को शरण देने वाले गांव को मोबाइल नेटवर्क का इंतजार, BSNL के पास नहीं है टावर लगाने के पैसे

Mon, 06 Jul 2020 05:55 PM IST
Harendra Chaudhary जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Mon, 06 Jul 2020 05:55 PM IST
सार

1944 में नेता जी अपनी फौज के साथ निकटवर्ती गांव जेसामी में पहुंचे थे और फिर वहां से रुजाजो आए। लिहाजा, वह लड़ाई का दौर था, ब्रिटिश आर्मी लगातार बम गिरा रही थी। सुभाष चंद्र बोस, जब इस गांव से जा रहे थे, तो उन्होंने लोगों को यहां की तकदीर बदलने का भरोसा दिलाया था...

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BSNL does not have money to build towers, waiting for mobile network for village giving shelter to Netaji Subhash Chandra Bose
बपोसूयुवी स्वारो, रुजाजो गांव, नागालैंड - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

नागालैंड का 'रुजाजो' गांव, जिसने नेताजी सुभाष चंद्र बोस को 1944 में शरण दी थी, आज 76 साल गुजरने के बाद भी इस गांव में मोबाइल टावर नहीं लग सका है। बनारस की सुभाष संस्था के पदाधिकारी तमल सान्याल ने प्रधानमंत्री कार्यालय के समक्ष मोबाइल टावर का मुद्दा उठाया था।
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वहां से जवाब मिला है कि बीएसएनएल के पास टावर लगाने के लिए फंड नहीं है। हालांकि उन्होंने यह भी लिखा है कि जब नागालैंड में 4जी तकनीक के उपकरण लगेंगे, तो इस गांव पर विचार किया जाएगा।

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नेता जी अपनी फौज के साथ निकटवर्ती गांव जेसामी में पहुंचे थे और फिर वहां से रुजाजो आए। लिहाजा, वह लड़ाई का दौर था, ब्रिटिश आर्मी लगातार बम गिरा रही थी। सुभाष चंद्र बोस, जब इस गांव से जा रहे थे, तो उन्होंने लोगों को यहां की तकदीर बदलने का भरोसा दिलाया था।
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बच्चों के लिए अच्छा स्कूल होगा, साफ पानी मिलेगा और चावल मिल लगेगी। नेताजी जब यहां से जाने लगे तो बोले, आप चिंता न करें। मुझे यह गांव हमेशा याद रहेगा।

BSNL does not have money to build towers, waiting for mobile network for village giving shelter to Netaji Subhash Chandra Bose
रुजाजो गांव, नागालैंड - फोटो : Amar Ujala

तमल सान्याल, जिन्होंने इस गांव में मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराने के लिए नागालैंड प्रशासन के साथ कई बार पत्राचार किया है, वे बताते हैं कि 1944 में सुभाष चंद्र बोस और उनकी सेना नौ दिन तक इस गांव में रही थी।

पिछले साल जब मैं इस गांव में पहुंचा था तो सौ वर्ष से ज्यादा आयु के बपोसूयुवी स्वोरो ने पुरानी यादें ताजा की थीं। उस वक्त सुभाष चंद्र बोस ने इस गांव को अपना मुख्यालय बना लिया था। वे गांव में ऊंचाई पर स्थित पत्थरों के बीच में बैठक करते थे।

इसकी वजह यह थी कि ब्रिटिश आर्मी लगातार नेताजी पर नजर रख रही थी। दुश्मन का विमान उनकी टोह लेने के लिए गांव के ऊपर मंडराता रहता था। बमबारी होती रहती थी। नेताजी के साथ हजारों सैनिक भी गांव में ही रह रहे थे।

सभी लोगों ने नेताजी का भरपूर सहयोग किया। मदद के नाम पर लोगों के पास केवल चावल था। इंडियन नेशनल आर्मी (आईएनए) का पेट भरने के लिए लोगों ने लगातार कई दिन तक चावल निकाला।

जब नेताजी यहां से जाने लगे तो उन्होंने इस गांव को गोद लेने की बात कही थी। 'रुजाजो' गांव आज भी उनका इंतजार कर रहा है। बतौर सान्याल, आजादी के इतने दशक बाद भी करीब साढ़े आठ सौ घरों वाला यह गांव न तो हैरिटेज स्थलों की सूची में जगह पा सका और न ही नेता जी के भरोसे की किसी ने सुध ली।

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रुजाजो गांव, नागालैंड - फोटो : Amar Ujala

इस गांव को हैरीटेज घोषित कराने के लिए कई पत्र लिखे गए, मगर कोई सुनवाई नहीं हुई। वह मकान, जिसमें नेताजी नौ दिन तक रहे, बदहाल हो चुका है। गांव में मोबाइल टावर, अच्छा सरकारी स्कूल, हर घर में स्वच्छ पेयजल, राइस मिल और रोजगार, इनमें से कुछ नहीं है।

लोगों को मोबाइल फोन पर बातचीत करने के लिए दूसरे गांव में जाना पड़ता है। मोबाइल टावर लगाने के लिए नागालैंड प्रशासन से बात की गई है। बीएसएनएल को मांग पत्र सौंपा गया, मगर अभी तक कोई सार्थक पहल नहीं नजर नहीं आ रही है।

गत वर्ष दीमापुर में बीएसएनएल के अधिकारियों ने बताया था कि यहां टावर लगाने के लिए सर्वे हुआ है। जमीन मिल गई है। टेंडर भी जारी हो गया। दो टावर लगाने की बात हुई थी। इसके बाद पीएमओ तक यह मामला पहुंचाया गया।

तमन सान्याल के अनुसार, अब वहां से जवाब आया है कि बीएसएनएल के पास फंड की कमी है। जब नागालैंड में 4जी नेटवर्क आएगा, तो यहां टावर लगाने के लिए विचार करेंगे। यहां के लोगों को रोजगार की तलाश में दूसरी जगह पर न जाना पड़े, इसके लिए राइस मिल खोलने का प्रस्ताव नागालैंड सरकार के समक्ष रखा जाएगा।

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