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BSF Raising Day: गुजरात के भुज में मनेगा बीएसएफ का 61वां रेजिंग डे, केंद्रीय गृहमंत्री शाह लेंगे परेड की सलाम

Thu, 20 Nov 2025 07:23 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Thu, 20 Nov 2025 07:23 PM IST
सार

बीएसएफ का 59वां स्थापना दिवस समारोह, झारखंड के हजारीबाग में आयोजित किया गया था। जबकि गत वर्ष सीमा सुरक्षा बल की स्थापना दिवस परेड दिल्ली से बाहर राजस्थान के जैसलमेर (पाकिस्तान से लगते बॉर्डर) में आयोजित हुई थी।

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BSF Raising Day Gujarat Bhuj Union Home Minister Amit Shah in attendance at Parade news and updates
बीएसएफ रेजिंग डे परेड 2023 के दौरान गृह मंत्री अमित शाह। - फोटो : PIB

विस्तार

सीमा सुरक्षा बल 'बीएसएफ' का 61वां स्थापना दिवस समारोह इस बार गुजरात के 'भुज' में मनाया जाएगा। हालांकि बीएसएफ का स्थापना दिवस 'एक' दिसंबर को मनाया जाता है, लेकिन कई दफा स्थापना दिवस की परेड, कई दिन बाद भी होती रही है। पिछले साल 8 दिसंबर को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राजस्थान के जोधपुर में बीएसएफ स्थापना दिवस की भव्य परेड की सलामी ली थी। इस दफा यह समारोह 21 नवंबर को बीएसएफ की 176 वीं वाहिनी परिसर, हरिपार 'भुज' में आयोजित होगा। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, शुक्रवार को बीएसएफ के स्थापना दिवस समारोह में बतौर मुख्य अतिथि की हैसियत से शिरकत करेंगे। 
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बीएसएफ का 59वां स्थापना दिवस समारोह, झारखंड के हजारीबाग में आयोजित किया गया था। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने समारोह में कहा था, 'जीवन पर्यंत कर्तव्य' का जो नारा, बीएसएफ को दिया गया था, वह चरितार्थ हो रहा है। 1900 से अधिक बीएसएफ जवानों ने देश के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया है। माइनस 40 डिग्री से लेकर 45 डिग्री तापमान में बीएसएफ के जवान देश की रक्षा करते हैं। बता दें कि पहले सभी केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के 'स्थापना दिवस' पर आयोजित होने वाली परेड, दिल्ली एनसीआर में ही आयोजित होती थी। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि भारत सरकार ने अब ऐसे कार्यक्रम देश के विभिन्न हिस्सों में आयोजित करने का निर्णय लिया है। इन बलों की वार्षिक परेड, देश के अलग-अलग हिस्सों में आयोजित होगी। इसके पीछे मकसद है कि देश और सीमाओं की सुरक्षा में लगे केंद्रीय बलों एवं राष्ट्र की जनता के बीच आत्मीयता का संबंध स्थापित हो। 
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गत वर्ष, सीमा सुरक्षा बल की स्थापना दिवस परेड, दिल्ली से बाहर राजस्थान के जैसलमेर (पाकिस्तान से लगते बॉर्डर) में आयोजित हुई थी। वर्ष 2022 में अमृतसर में सीमा सुरक्षा बल का स्थापना दिवस मनाया गया। यह दूसरा अवसर था जब बीएसएफ की रेजिंड डे परेड दिल्ली से बाहर आयोजित हुआ। अमृतसर में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने परेड की सलामी ली थी। हालांकि, स्थापना दिवस परेड में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को शामिल होना था, लेकिन किन्हीं कारणों के चलते वे परेड में शामिल नहीं हो सके। देश के सबसे बड़े केंद्रीय अर्धसैनिक बल 'सीआरपीएफ' का रेजिंग डे, कई वर्षों से दिल्ली से बाहर आयोजित किया जा रहा है। 

देश की पहली रक्षा पंक्ति 'बीएसएफ', हिमालय में बर्फीली सरहदों की चौकसी करने वाले हिमवीर यानी 'आईटीबीपी' व सबसे बड़े शांति रक्षक बल 'सीआरपीएफ' के स्थापना दिवस यानी जन्मदिन पर होने वाले भव्य आयोजन परेड समारोह की तिथियों के बदलाव पर विभिन्न एक्स पैरामिलिट्री वेलफेयर संगठनों द्वारा कड़ा एतराज जताया गया है। एलॉयंस ऑफ ऑल एक्स पैरामिलिट्री फोर्सेस वेलफेयर एसोसिएशन के महासचिव रणबीर सिंह ने कहा, बॉर्डर गार्डिंग फोर्स 'बीएसएफ' की स्थापना एक दिसंबर 1965 को हुई थी। हर साल एक दिसंबर को आयोजित होने वाले 'स्थापना दिवस' परेड समारोह की तिथि में इस बार बदलाव कर उसे 21 नवंबर कर दिया गया है। यह परेड समारोह गुजरात के 'भुज' में आयोजित होगा। इस परेड की सलामी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह लेंगे।  

रणबीर सिंह के मुताबिक, आईटीबीपी जिसकी स्थापना 24 अक्टूबर 1962 को हुई थी। हर साल केंद्रीय स्तर पर 24 अक्टूबर को आयोजित होने वाले स्थापना दिवस परेड की तिथि में इस बार बदलाव किया गया है। इस बार यह परेड समारोह 22 नवंबर को उधमपुर में आयोजित होगी। इससे पहले भी 62वें और 63वें आईटीबीपी स्थापना दिवस परेड समारोह के केंद्रीय स्तर पर होने वाले आयोजनों की तिथियों में बदलाव किया गया था। सबसे बड़े केंद्रीय अर्धसैनिक बल 'सीआरपीएफ' की स्थापना 27 जुलाई 1939 में नीमच में हुई थी। इस तिथि में भी कई बदलाव किया गया। कभी 27 जुलाई तो कभी 31 अक्टूबर को सरदार पटेल के जन्मदिन पर स्थापना दिवस समारोह आयोजित हुआ। 

एलॉयंस के पदाधिकारी के अनुसार, 31 अक्टूबर के ही दिन जब केंद्रीय गृह मंत्री बूटा सिंह, सीआरपीएफ सेंटर झाडोदा कलां में सलामी ले रहें थे तो उसी दिन तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या कर दी गई। बाद में उस तिथि को बदलकर 19 मार्च किया गया। वजह, इस दिन सरदार पटेल ने सीआरपीएफ को कलर (झंडा) प्रदान किया था। 19 मार्च 2024 को जगदलपुर छत्तीसगढ़ में सीआरपीफ का 85वां स्थापना दिवस परेड समारोह आयोजित हुआ, लेकिन अगले साल आयोजित होने वाली स्थापना दिवस परेड को 19 मार्च के बजाय 17 अप्रैल कर दिया गया। यह निर्णय, केंद्रीय गृह मंत्री की इन समारोह में बतौर मुख्य अतिथि के तौर पर उपस्थित होने की टाइमिंग को लेकर लिया गया। 
 
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आईटीबीपी के पूर्व आईजी एसके शर्मा ने इस प्रकार के सेरेमोनियल कार्यक्रमों की तिथियों में बदलाव पर चिंता जताई है। बिहार चुनावों के दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखने व निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की सैंकड़ों कम्पनियों की तैनाती की गई, जिससे बार्डर आउट पोस्ट पर तैनात जवानों को अतिरिक्त ड्यूटी करनी पड़ रही है। अब नवंबर में केंद्रीय स्तर पर आयोजित होने वाले आईटीबीपी के स्थापना दिवस परेड समारोह में भी सैकड़ों जवान बांट जोह रहे हैं कि कब वीआईपी अपनी सुविधानुसार समय व तिथि निर्धारित कर सलामी सम्मान लेने आएं। 

सीआरपीएफ के पूर्व एडीजी एचआर सिंह ने कहा, कई मौकों पर वीआईपी द्वारा चुनावों, महत्वपूर्ण कार्यक्रमों व स्वदेशी विदेशी दौरे की व्यस्तताओं के कारण या फोर्सेज महानिदेशकों द्वारा अपने निजी बेनिफिट के लिए उपरोक्त स्थापना दिवस सेरेमोनियल फंक्शन में बदलाव किए जा रहे हैं। पिछले कई वर्षों से तयशुदा तिथियों में बदलाव हो रहा है। इससे न केवल जवानों की दिनचर्या में फर्क पड़ता है, बल्कि पूरे बल के कार्मिकों के मनोबल को भी चोट पहुंचती है। अर्धसैनिक बलों के ऐसे गरिमामयी स्थापना दिवस परेड समारोहों का आयोजन वास्तविक तिथियों पर ही होना चाहिए।

पूर्व केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल के अध्यक्ष एक्स आईजी बीएसएफ एसएस कोटियाल ने विरोध जताते हुए कहा कि इस प्रकार से तिथियों के बदलाव से फोर्स जवानों के मनोबल पर प्रतिकूल असर पड़ता है। उन्होंने इस प्रकार के बदलाव पर केंद्रीय गृह मंत्री को पत्र लिखकर नाराजगी व्यक्त की है। 

रणबीर सिंह द्वारा सेना का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां पर होने वाले स्थापना दिवस परेड समारोहों की सलामी कर्नल, ब्रिगेडियर, मेजर जनरल या जनरल मुख्य अतिथि के तौर पर सलामी लेते हैं तो फिर वीआईपी या सम्माननीय मुख्य अतिथि की अनुपलब्धता के चलते क्यों न फोर्सेस एडीजी या डीजी स्वयं सलामी सम्मान लें। रणबीर सिंह के मुताबिक, बार-बार तिथियों व समारोहों स्थलों के बदलने से हर साल करोड़ों रुपए इस प्रकार के आयोजनों में खर्च किए जाते हैं। बेहतर होगा कि स्थापना दिवस परेड समारोह का आयोजन पहले की तरह राजधानी दिल्ली में ही किया जाए, ताकि मुख्य अतिथि को परेड समारोह स्थल तक भाग लेने में कोई दिक्कत न हो।
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