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BSF के जांबाज: गमले से किया एके-47 का मुकाबला, पढ़ें कैसे श्रीनगर एयरफील्ड में आतंकियों पर टूटे पड़े निहत्थे जवान

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Sat, 04 Jun 2022 04:03 PM IST
सार

केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने शुक्रवार को नई दिल्ली में सीमा सुरक्षा बल के अलंकरण समारोह और रुस्तमजी मेमोरियल लेक्चर में बीएसएफ के जोशीले प्रहरियों को सम्मान से नवाजा...

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bsf investiture ceremony 2022: Union Minister of State for Home Nityanand Rai honored BSF jawans for Police Medal for Gallantry
बीएसएफ के अलंकरण समारोह में गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय - फोटो : Agency

विस्तार

सीमा सुरक्षा बल 'बीएसएफ' के जांबाजों ने कभी तो श्रीनगर एयरफील्ड पर हुए बड़े आतंकी हमले को नाकाम किया, तो कहीं निहत्था जवान ही उग्रवादियों पर टूट पड़ा। एक बहादुर जवान ने तो गमले से ही 'एके-47' से लैस आतंकी का मुकाबला किया। ऐसी ही वीरता के उदाहरण पेश करने वाले बीएसएफ जवानों को वीरता के लिये पुलिस पदक से सम्मानित किया गया। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने शुक्रवार को नई दिल्ली में सीमा सुरक्षा बल के अलंकरण समारोह और रुस्तमजी मेमोरियल लेक्चर में बीएसएफ के जोशीले प्रहरियों को सम्मान से नवाजा।

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दीपक कुमार मंडल, द्वितीय कमान अधिकारी, 145 बटालियन

16 अक्टूबर 2017 के दिन दीपक कुमार मंडल द्वितीय कमान अधिकारी त्रिपुरा में तैनात थे। वे कार्यकारी कमांडेंट की भूमिका का निर्वहन कर रहे थे। इन्हें सोनामूरा के नजदीक सीमा सुरक्षा बल की गाड़ी के दुर्घटनाग्रस्त होने की सूचना मिली। वे आरक्षक बी. चंद्रकांत व आरक्षक प्रेम सिंह को लेकर घटनास्थल की ओर रवाना हुए। दीपक कुमार की नजर सीमा चौकी 'बेलारीदप्पा' के निकट गो-तस्करी करने वाले 25-30 संदिग्ध तस्करों पर पड़ी। इन्होने तस्करों को ललकारा। तस्करों ने बेहद उग्र होते हुए दीपक मंडल पर पत्थरों व तेजधार वाले हथियारों से हमला कर दिया। उन पर गाड़ी चढ़ा दी। 20 अक्तूबर को दीपक ने अंतिम सांस लेते हुए सर्वोच्च शहादत दी। उन्हें वर्ष 2020 के गणतंत्र दिवस पर बलिदानोपरांत 'वीरता के लिए पुलिस पदक' से सम्मानित किया गया।

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सुरजीत सिंह गुलेरिया, डीआईजी, सीमांत मुख्यालय, कश्मीर

श्रीनगर एयरफील्ड की सुरक्षा की जिम्मेदारी 182 बटालियन को दी गई थी। 03 अक्तूबर 2017 को अल सुबह तीन हथियारबंद आतंकवादियों ने कम ऊंचाई वाली चारदीवारी व कंसर्टिना कॉइल काटकर परिसर में प्रवेश किया। डीआईजी सुरजीत सिंह, सीमांत मुख्यालय कश्मीर में तैनात थे। हमले की सूचना मिलते ही वे मौके पर पहुंचे। आतंकियों की संभावित जगह का पता लगाया। जब वे प्रशासनिक भवन पहुंचे, तो एक आतंकी ने इन्हें लक्षित कर फायरिंग कर दी। जान की परवाह किए गुलेरिया ने आतंकी की पोजिशन का पता लगाया। वहां की घेराबंदी सुनिश्चित की। आतंकी को बाहर निकालने के लिए ग्रेनेड, आंसू गैस और स्मोक बम का इस्तेमाल किया। ईमारत से बाहर निकलकर आतंकी, जब मंदिर की तरफ दौड़ा तो बीएसएफ व एसओजी उसे बेअसर कर दिया। एसएस गुलेरिया को 'वीरता का पुलिस पदक' दिया गया है।

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मुख्य आरक्षक श्याम सिंह, 182 बटालियन

मुख्य आरक्षक श्याम सिंह 03 अक्तूबर 2017 को प्रशासनिक भवन के स्थित सिग्नल सेंटर में तैनात थे। इन्हें लगातार गोलियां चलने की आवाज सुनाई दी। वे जैसे ही सिग्नल सेंटर के बाहर निकले, तभी सामने से आ रहे आतंकी ने इन्हे लक्ष्य कर फायरिंग कर दी। एक गोली इनकी जांघ में लग गई। श्याम सिंह ने हिम्मत नहीं हारी। पास रखा एक गमला उठाया और उसे आतंकी पर दे मारा। आतंकी असंतुलित हो गया और पहली मंजिल की ओर भाग गया। हथियार विहीन होने के बावजूद मुख्य आरक्षक श्याम सिंह ने पराक्रम और शौर्य का परिचय दिया। इन्हें भी गणतंत्र दिवस पर 'वीरता के लिए पुलिस पदक' से सम्मानित किया गया है।

सहायक उप-निरीक्षक, रमेशन एन, 182 बटालियन

सहायक उप-निरीक्षक रमेशन एन भी श्रीनगर एयर फील्ड की सुरक्षा में तैनात थे। उन्होंने अधीनस्थ अधिकारी मेस में लगातार हो रही फायरिंग की आवाज सुनी। इतने में गोली चलाता एक आतंकी उनकी तरफ आ रहा था। आतंकी की कमरे में घुसने की कोशिश को नाकाम कर दिया। दरवाजे को अंदर से बंद कर लिया। कमरे में इनके साथ एएसआई राकेश कुमार भी मौजूद थे। आतंकवादी जब कमरे में प्रवेश नहीं कर सका, तो वापस सीढ़ियों की तरफ लौटने लगा। तब दोनों एएसआई, पोजिशन ले चुके थे। रमेशन एन ने सूझ-बूझ का परिचय देते हुए दरवाजे को थोड़ा खोल दिया। कुछ देर बाद उन्होंने आतंकवादी को अपनी तरफ रेंगते हुए देखा। इन्होंने फायरिंग कर आतंकी का सफाया कर दिया। राकेश कुमार ने आतंकी के हथियार को कब्जे में ले लिया। रमेशन एन को 'वीरता के लिये पुलिस पदक' से नवाजा गया है।

एएसआई रोहित जोशी, 182 बटालियन

जब श्रीनगर एयरफील्ड पर हमला हुआ तो रोहित जोशी 'रेडियो मैकेनिक' अधीनस्थ अधिकारी मेस में थे। फायरिंग की आवाज सुनकर रोहित कमरे से बाहर आए। तभी एक आतंकी का इनसे सामना हो गया। आतंकी ने जोशी पर फायरिंग कर दी। जान की परवाह किए बगैर वे आतंकवादी से भिड़ गए। उसका हथियार छीनने का प्रयास किया। चूंकि हथियार, आतंकी के शरीर से बंधा हुआ था, इसलिए जोशी उसे नहीं छीन सके। आतंकी की एक गोली, जोशी के पेट में लगी। घायल अवस्था में उन्होंने आतंकी को धकेल दिया। वापस अपने कमरे में आए और मोबाइल फोन से आतंकी की पोजिशन, हथियार व स्वयं के घायल होने की सूचना वरिष्ठ अधिकारियों को दी। इन्हें भी 'वीरता के लिए पुलिस पदक' से सम्मानित किया गया।

सहायक कमांडेंट, रमन गुप्ता, 182 बटालियन

रमन गुप्ता, गोगोलैंड में मुख्यालय के साथ स्थित श्रीनगर एयरफील्ड की सुरक्षा में तैनात थे। तीन अक्तूबर 2017 को तीन हथियारबंद आतंकवादियों ने अंधेरे का फायदा उठाते हुए परिसर में प्रवेश किया। रमन गुप्ता ने आतंकियों को घेरने के लिए क्यूआरटी को प्रशासनिक भवन के महत्वपूर्ण स्थानों पर तैनात कर दिया। अपनी जान की परवाह न करते हुए जैसे ही वे भवन में घुसने लगे, तो आतंकियों ने भयंकर फायरिंग कर दी। रमन गुप्ता ने एक वैकल्पिक योजना बनाई। भवन के पीछे की खिड़की में लगे एयर कंडीशनर को तोड़ दिया। गंभीर रूप से घायल बल कार्मिकों को बाहर निकाला। जिस चतुराईपूर्ण ढंग से अपने साथी सीमा प्रहरियों के अमूल्य जीवन की रक्षा की, इसके लिए उन्हें 'वीरता के लिए पुलिस पदक' से सम्मानित किया गया है।

बिभास तिर्की, सहायक कमांडेंट, 163 बटालियन

05 मार्च 2018 को जिला गिरीडीह के डुमरी ब्लॉक के नजदीक जंगलों में स्थित एक गांव में दुर्दांत नक्सलियों के छिपे होने की गुप्त सूचना मिली। तिर्की, झारखंड राज्य की एंटी नक्सल फोर्स जगुआर में तैनात थे। ऑपरेशन की कमान तिर्की को सौंपी गई। दुर्दांत नक्सलियों में 25 लाख का इनामी नक्सली, स्पेशल एरिया कमेटी सदस्य सुनील सोरेन उर्फ सुनील मांझी, जिसे पहाड़ियों का सबसे क्रूर सेनापति भी कहा जाता था, भी शामिल था। तलाशी के दौरान पकड़े गए एक माओवादी ने सुनील मांझी के एक घर में छिपे होने की सूचना दी। उस घर का दरवाजा बंद था। तिर्की ने अपनी जान की परवाह न करते हुए दरवाजे पर लात मारते हुए घर में प्रवेश किया। घर में प्रवेश करते ही इन्हें हथियार को लोड करने की आवाज सुनाई दी। तभी एक शख्स वहां से भागने लगा। तिर्की ने उसका पीछा किया। माओवादी एके-47 राइफल से लैस था। बिभास तिर्की व अन्य बलों ने उसे हथियार के साथ पकड़ लिया। इस पूरे ऑपरेशन के दौरान कुल 15 माओवादी पकड़े गए। 13 आधुनिक हथियारों जब्त किए गए। इन्हें भी 'वीरता के लिए पुलिस पदक' से सम्मानित किया गया है।

उप-निरीक्षक, सूरज करण मीणा, 182 बटालियन

सूरज करण मीणा, जो क्यूआरटी के कमांडर थे, उन्हें अचानक श्रीनगर एयरफील्ड की तरफ से फायरिंग और सायरन की आवाज सुनाई दी। वे प्रशासनिक भवन की ओर दौड़े। बीच में इनका सामना एक आतंकवादी से हो गया। आतंकी ने स्वचालित हथियार से भारी मात्रा में गोलाबारी कर दी। उस दौरान सूरज की छाती के दाहिनी ओर, दाहिने हाथ और बायीं जांघ पर गोली लगी। गंभीर रूप से घायल होने पर भी उन्होंने आतंकवादी को मुंहतोड़ जवाब देना जारी रखा। आतंकी को प्रशासनिक भवन से बाहर नहीं निकलने दिया। उप-निरीक्षक सूरज करण मीणा ने अपनी जान की परवाह किए बगैर जिस पराक्रम व कर्तव्यनिष्ठता का परिचय दिया, वह अनुकरणीय है। सीमा प्रहरी की इस जांबाजी को मान्यता प्रदान करते हुए उन्हें 'वीरता के लिए पुलिस पदक' से सम्मानित किया गया है।

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