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India-Bangladesh Border: बीएसएफ ने तस्करी को किया विफल, एक तस्कर गिरफ्तार, जवान घायल
Fri, 23 Jun 2023 06:55 PM IST
Jeet Kumar
एन. अर्जुन, कोलकाता
एन. अर्जुन, कोलकाता
Published by: Jeet Kumar
Updated Fri, 23 Jun 2023 06:55 PM IST
सार
बीएसएफ ने एक घायल तस्कर को गिरफ्तार कर लिया है। इस दौरान पशु तस्करों ने देसी बमों से जवानों पर हमला कर दिया, जिसमें एक जवान घायल बताया गया है।
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अंतरराष्ट्रीय सीमा पर गश्त करते जवान
- फोटो : पीटीआई
विस्तार
भारत-बांग्लादेश के अंतरराष्ट्रीय सीम पर सीमा सुरक्षा बल ने गुरुवार और शुक्रवार की दरम्यानी रात को एक पशु बड़ी पशु तस्करी को विफल कर दिया। इस दौरान बीएसएफ ने एक घायल तस्कर को गिरफ्तार कर लिया है। इस दौरान पशु तस्करों ने देसी बमों से जवानों पर हमला कर दिया, जिसमें एक जवान घायल बताया गया है।
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बीएसएफ के प्रवक्ता के मुताबिक नदिया जिले अंतरराष्ट्रीय सीमा पर गुरुवार और शुक्रवार की मध्यरात्रि को तस्करों के एक बड़े समूह ने अंधेरे का फायदा उठाते हुए इच्छामती नदी के माध्यम से पशुओं की तस्करी करने का प्रयास किया। 8वीं वाहिनी, सीमा सुरक्षा बल के जवानों ने तस्करों को चुनौती दी। इस पर तस्करों ने देसी बमों से जवानों पर हमला बोल दिया, जिसमें एक जवान घायल हो गया। पहले तो जवानों ने मिर्ची ग्रेनेड और पीएजी फायर किए। जब तस्कर और आक्रामक हुए तब आत्मरक्षा में जवानों को गोलीबारी करनी पड़ी। तब जाकर तस्कर भागने पर मजबूर हुए।
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बदमाशों को चुनौती देने पर, उन्होंने घायल तस्कर को वहीं छोड़ दिया और तेजी से भारतीय क्षेत्र के गांव कनीबामिनी की ओर भाग गए। बीएसएफ के जवानों ने घायल तस्कर को हिरासत मे लिया। गिरफ्ताार तस्कर की पहचान पश्चिम बंगाल के नदिया जिले के गांव कानीबामिनी निवासी हसनूर मंडल के रूप में हुई।
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हसनूर मंडल ने खुलासा किया कि वह मवेशियों की तस्करी के प्रयास के दौरान पीएजी के छर्रों से घायल हो गया था। उसने खुलासा किया कि मुंशीहाटी गांव के शेरो, रघु और कनीबामिनी गांव के सहर ने अपने तीन अन्य साथियों के साथ सीमा पार मवेशियों की तस्करी की साजिश रची थी। उनकी योजना सीमा चौकी इच्छामति के पुल का उपयोग करके मवेशियों को अपने बांग्लादेशी समकक्षों, अर्थात् ज़हौर (समूह के नेता), राजू और बांग्लादेश के पोलियानपुर के पास ग्राम रायपुर के सागर को सौंपने की थी। हसनूर मंडल ने कबूल किया कि उनके समूह के पास देसी बम थे। इसके अलावा, चाकू और पत्थर, जिनका उपयोग वे अपने पशु तस्करी अभियान को सुविधाजनक बनाने के लिए जवानों का ध्यान भटकाने और नुकसान पहुंचाने के लिए करना चाहते थे।