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'मोदी के फैसले से देश की राजनीति पर पड़ेगा असर'
हिमांशु मिश्र/ अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Thu, 10 Nov 2016 04:23 AM IST
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साल 2014 में भाजपा का चुनावी मुद्दा तो विदेशी बैंकों में जमा काला धन था, मगर सत्ता हासिल करने के करीब ढाई साल बाद मोदी सरकार की काले धन के खिलाफ लड़ाई की जगह बदल गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 500 और 1000 रुपये के नोट बंद करने के एलानसे देश में जमा काले धन को निकालने के अपने इरादे जाहिर कर दिए हैं।
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आर्थिक मामलों के विशेषज्ञ और ब्रिटिश राजनेता लॉर्ड मेघनाथ देसाई मानते हैं कि विदेश से काले धन की वापसी की राह में कई तरह की कानूनी, तकनीकी अड़चनों के कारण सरकार के रुख में अचानक परिवर्तन आया। विशेषज्ञों का कहना है कि मोदी सरकार के इस फैसले से देश में काला धन रखने वालों की देर सबेर शामत अवश्य आएगी।
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लॉर्ड मेघनाथ देसाई कहते हैं लोकसभा चुनाव का यह बड़ा मुद्दा था। यह मुद्दा इतना बड़ा था कि इस मोर्चे पर असफलता सरकार और भाजपा की साख को झटका दे सकती थी। चूंकि विदेश में जमा काले धन लाने की प्रक्रिया बेहद जटिल है।
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इस मोर्चे पर सरकार को दूसरे देश के रुख पर निर्भर रहना पड़ता है। यही कारण है कि इस दिशा में शुरुआती कोशिशों का बड़ा नतीजा सामने न आने के बाद मोदी सरकार ने घरेलू काले धन के खिलाफ सख्ती का मन बनाया।
बकौल देसाई निश्चित रूप से इस फैसले का सबसे बड़ा असर देश की राजनीति पर पड़ेगा क्योंकि चुनावी व्यवस्था को काले धन ने अपनी चपेट में ले रखा है। इसके अलावा सरकार की माफी योजना का लाभ नहीं उठाने वाले ऐसे लोग बुरी तरह घिरेंगे जिन्होंने बड़े पैमाने पर काला धन इकट्ठा कर रखा है।
इस फैसले के निष्कर्ष पर आने से पहले हमें इस तथ्य पर भी गौर करना चाहिए कि इस समय काले धन की समानांतर अर्थव्यवस्था चल रही है। अनुमान के मुताबिक यह जीडीपी का करीब 40 फीसदी माना जाता है।
इंडियन स्टैटिस्टिकल इंस्ट्यिूट के प्रो अभिरूप सरकार के मुताबिक काले धन के खिलाफ सख्त कदम की जरूरत तो है, मगर इस बहाने बुधवार को जो कुछ हुआ उससे स्थिति में कोई बड़ा परिवर्तन नहीं आने वाला। बकौल सरकार इस मामले से जुड़ी बड़ी मछली अपना धन कैश में देश के अंदर नहीं बल्कि स्विस बैंकों में रखती हैं। मगर यह सही है कि देश में एक बड़ा वर्ग इस फैसले से प्रभावित होगा।