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बृहन्मुंबई महानगरपालिका: बीएमसी में बाढ़मुक्त मुंबई का नारा, मीठी नदी का होगा कायाकल्प, 45949.21 करोड़ का बजट पेश
Fri, 04 Feb 2022 02:11 AM IST
देव कश्यप
सुरेन्द्र मिश्र, मुंबई।
सुरेन्द्र मिश्र, मुंबई।
Published by: देव कश्यप
Updated Fri, 04 Feb 2022 02:11 AM IST
सार
बीएमसी के आम बजट में इस बार मानसूनी बारिश के दौरान जमजमाव पर नियंत्रण पाने की योजनाओं पर ज्यादा फोकस किया गया है। बीएमसी आयुक्त इकबाल सिंह चहल ने बृहस्पतिवार को वित्तीय वर्ष 2022-2023 के लिए 45,949.21 करोड़ का बजट पेश किया जो पिछले साल के 39038.83 करोड़ के मुकाबले 17.7 फीसदी ज्यादा है।
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बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी)
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
एशिया की सबसे वैभवशाली नगर निकाय बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) ने इस बार वार्षिक बजट में बाढ़मुक्त मुंबई का नारा दिया है। बजट में प्रमुखता के साथ देश की आर्थिक राजधानी मुंबई को बाढ़मुक्त बनाने के लिए भारी भरकम खर्च का प्रस्ताव किया गया है जिसमें मुंबई के बीचोबीच बहने वाली मीठी नदी का कायाकल्प करने की योजना भी शामिल है।
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बीएमसी आयुक्त इकबाल सिंह चहल ने बृहस्पतिवार को वित्तीय वर्ष 2022-2023 के लिए 45,949.21 करोड़ रुपये का बजट पेश किया जो पिछले साल के 39038.83 करोड़ रुपये के मुकाबले 17.7 फीसदी ज्यादा है। आम बजट में इस बार मानसूनी बारिश के दौरान जमजमाव पर नियंत्रण पाने की योजनाओं पर ज्यादा फोकस किया गया है। मुंबई में मानसून के दौरान डूबने वाले पुराने 386 स्थानों की पहचान की गई है और 256 बाढ़ वाले ठिकानों पर मानसून शुरू होने से पहले जलजमाव की समस्या से निपटने के लिए शुरू कार्य पूरे कर लिए जाने का दावा किया गया है।
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बता दें कि बीएमसी में बीते 30 साल से शिवसेना की सत्ता है। लेकिन बारिश के मौसम में हर साल मुंबई डूब जाती है। इससे आम नागरिकों बेहाल हो जाते है और सत्ताधारी दल के शतप्रतिशत नाला सफाई के दावे पानी में डूब जाते हैं। चूंकि जल्द ही बीएमसी चुनाव होने वाले हैं। इसलिए महाराष्ट्र और बीएमसी में सत्तासीन शिवसेना कोई जोखिम मोल नहीं लेना चाहती।
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नदी पुनरुत्थान और प्रदूषण नियंत्रण की योजना
बीएमसी के बजट में मुंबई को बाढ़मुक्त बनाने की योजना मीठी नदी के कायाकल्प के बिना परवान नहीं चढ़ सकती। इसलिए मीठी नदी के लिए अलग से 565.36 करोड़ रुपये खर्च का प्रस्ताव किया गया है। इसके अलावा मुंबई की अन्य नदियों दहिसर, पोइसर और ओशिवरा के पुनरुत्थान के लिए 200 करोड़ रुपये का प्रस्ताव किया गया है। अभी तक मीठी नदीं के चौड़ीकरण और गहराई का काम 95 फीसदी और और चहरदीवारी का 80 फीसदी काम पूरा हुआ है जिससे नदी की क्षमता में वृद्धि हुई है। इसके साथ ही बजट में मीठी नदी के विकास और प्रदूषण नियंत्रण की योजना को चार चरणों लागू करने का प्रस्ताव किया गया है।
मीठी नदी ने मुंबई में मचाई थी तबाही
गौरतलब है कि 26 जुलाई 2005 में मीठी नदी ने मुंबई में तबाही मचाई थी। इसके बाद से मुंबई महानगर क्षत्रीय विकास प्राधिकरण (एमएमआरडीए) के नक्शे से गायब हो चुकी और गंदे नाले में तब्दील हुई मीठी नदी फिर से अस्तित्व में आई। विहार झील से निकलने वाली मीठी नदी का वेग पवई तालाब पहुंचने के बाद बढ़ जाता है। माहिम की खाड़ी में विलीन होने से पहले मीठी नदी पवई, साकीनाका, कुर्ला, कालीना, वाकोला, बांद्रा-कुर्ला कांप्लेक्स, धारावी और माहिम से होकर गुजरती है।