रूस को साध भारत ने चीन पर बनाई कूटनीतिक बढ़त
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सीमा पार आतंकवाद मामले में नाराज चल रहे रूस को साध कर भारत ने ब्रिक्स समिट में पाकिस्तान के पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश कर रहे चीन पर कूटनीतिक बढ़त हासिल कर ली है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत अगर सीमा पार आतंकवाद पर ब्रिक्स के अन्य सदस्य देशों दक्षिण अफ्रीका और ब्राजील को भी साध लिया तो चीन पर कूटनीतिक दबाव और बढ़ा जाएगा। वैसे भी चीन पर दबाव बढ़ाने के लिए भारत ने ब्रिक्स की विस्तारित बैठक में बिम्सटेक के सदस्य देशों को सीमा पार आतंकवाद पर मुखर रुख अपनाने के लिए पहले ही राजी कर लिया है।
हालांकि अभी यह साफ नहीं है कि भारत के साथ रक्षा सहित विभिन्न क्षेत्रों में 16 अहम करार और आतंकवाद पर उसके समर्थन में खड़ा हो कर चीन की चिंता बढ़ाने वाला रूस पाकिस्तान के साथ होने वाले संयुक्त सैन्य अभ्यास को टालेगा या नहीं। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि अहम करारों और आतंकवाद पर रूस के कड़े रुख के बाद अब संयुक्त युद्घाभ्यास का मुद्दा महज सांकेतिक रह गया है।
जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर अरुण मोहंती कहते हैं कि निश्चित रूप से आतंकवाद पर भारत को रूस को अहम साथ मिला है। दोनों देशों को इस समय एक दूसरे की सख्त जरूरत थी। अमेरिका की ओर से लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों के कारण रूस को बड़े रक्षा सौदे की जरूरत थी जो भारत की पूरा कर सकता था। दूसरी ओर भारत भी अपने इस अभिन्न और सबसे विश्वस्त मित्र से समर्थन चाहता था। दोनों की मुराद पूरी हुई और निश्चित रूप से यह चीन और पाकिस्तान दोनों के लिए कूटनीतिक झटका है।
मोदी जिनपिंग मुलाकात पर निगाहें
एक अन्य विशेषज्ञ मेजर जनरल (रिटायर्ड) जीडी बक्सी भी मानते हैं कि भारत को बेहद अहम मौके पर मिला रूस का साथ पाकिस्तान के लिए सहानुभूति पैदा करने के चीन के अभियान को पलीता लगाएगा। बकौल बक्सी जब ब्रिक्स और बिम्सटेक केसदस्य देश एक सुर में आतंकवाद के खिलाफ बोलेंगे और जिसकी पूरी संभावना बनी दिख रही है तो ऐसी स्थिति में चीन के कूटनीतिक अभियान को झटका लगना स्वाभाविक है। इसके अलावा भारत की कूटनीतिक सफलता यह है कि उसने रिश्तों के मामले में विपरीत ध्रुव वाले अमेरिका और रूस दोनों को साधने में सफलता हासिल की है।
दुनिया की निगाहें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति की मुलाकात के बाद पीएम मोदी की चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात पर टिकी है। आतंकवाद पर रूस का साथ मिलने के बाद पीएम मोदी जिनपिंग के समक्ष भी सीमा पार आतंकवाद और जैश ए मोहम्मद के मुखिया मौलाना मसूद अजहर को आतंकवादी घोषित करने संबंधी मामला उठाएंगे। इस मुद्दे पर पाकिस्तान के पक्ष में कूटनीतिक मोर्चा खोलने वाले चीनी राष्ट्रपति के भावी रुख पर सबकी निगाहें रहेंगी।
आतंकवाद के सवाल पर रूस समेत बिम्सटेक के सदस्य देशों को साधने के बाद भारत ने दक्षिण अफ्रीका और ब्राजील से कूटनीतिक संपर्क साधा है। खुद पीएम मोदी इन देशों के राष्ट्राध्यक्षों के साथ होने वाली द्विपक्षीय वार्ता में सीमा पर आतंकवाद पर भारत के रुख पर समर्थन मांगेंगे।