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रिश्वत का खेल: 800 फाइलें और 10 करोड़ की काली कमाई, ED की गिरफ्त में गुजरात का IAS, सरकार ने किया सस्पेंड

Mon, 05 Jan 2026 03:19 PM IST
हिमांशु चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला,अहमदाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,अहमदाबाद Published by: हिमांशु चंदेल Updated Mon, 05 Jan 2026 03:19 PM IST
सार

ED Arrest Gujarat IAS Officer: गुजरात के आईएएस अधिकारी राजेंद्रकुमार पटेल को रिश्वत से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी ने गिरफ्तार किया। 48 घंटे से अधिक हिरासत में रहने पर सरकार ने उन्हें निलंबित कर दिया।

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Bribery linked money laundering case ED arrest Gujarat IAS officer government suspended
आईएएस पर ईडी की कार्रवाई - फोटो : ANI

विस्तार

गुजरात प्रशासन में बड़ा झटका लगा है। रिश्वत से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्रवाई के बाद राज्य सरकार ने वरिष्ठ आईएएस अधिकारी राजेंद्रकुमार पटेल को निलंबित कर दिया है। यह मामला जमीन के उपयोग में बदलाव यानी सीएलयू मंजूरी के बदले रिश्वत वसूली से जुड़ा है, जिसने पूरे प्रशासनिक तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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राजेंद्रकुमार पटेल 2015 बैच के आईएएस अधिकारी हैं और हाल तक सुरेंद्रनगर के कलेक्टर रहे। ईडी ने उन्हें 2 जनवरी को गिरफ्तार किया था। उसी दिन अहमदाबाद की विशेष पीएमएलए अदालत ने उन्हें 7 जनवरी तक ईडी की हिरासत में भेज दिया। गिरफ्तारी के बाद 48 घंटे से ज्यादा समय तक हिरासत में रहने के कारण सामान्य प्रशासन विभाग ने उन्हें निलंबित करने का आदेश जारी किया।
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निलंबन क्यों किया गया?
राज्य सरकार के आदेश में कहा गया है कि अखिल भारतीय सेवा (अनुशासन और अपील) नियम, 1969 के तहत यदि कोई अधिकारी 48 घंटे से अधिक समय तक हिरासत में रहता है, तो उसे स्वतः निलंबित माना जाता है। इसी नियम के तहत 2 जनवरी से पटेल का निलंबन प्रभावी माना गया है। अगले आदेश तक यह निलंबन जारी रहेगा।
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रिश्वत का पूरा तंत्र
ईडी के मुताबिक, सीएलयू आवेदन मंजूर करने के लिए प्रति वर्ग मीटर पांच से 10 रुपये तक की रिश्वत तय की गई थी। यह पैसा 'स्पीड मनी' के रूप में वसूला जाता था ताकि फाइलें तेजी से पास हो सकें। यह रकम बिचौलियों के जरिए कलेक्टर कार्यालय से होकर गुजरती थी। डिजिटल सबूतों में रिश्वत का पूरा हिसाब-किताब दर्ज मिला है।


800 से ज्यादा मामलों की जांच
जांच में सामने आया है कि अब तक 800 से ज्यादा सीएलयू मामलों में रिश्वत दी गई। इससे 10 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध कमाई हुई, जो मनी लॉन्ड्रिंग के दायरे में आती है। ईडी का कहना है कि इस पूरे नेटवर्क में पटेल मुख्य लाभार्थी और अंतिम निर्णय लेने वाले अधिकारी थे।

कलेक्टर की भूमिका पर सवाल
ईडी के अनुसार, संबंधित समय में कलेक्टर होने के नाते पटेल के पास सीएलयू मंजूरी का पूरा अधिकार था। सौराष्ट्र घरखेड़, किरायेदारी और कृषि भूमि अध्यादेश 1949 और गुजरात भूमि राजस्व संहिता 1879 के तहत वे अंतिम प्राधिकारी थे। इसी पद का इस्तेमाल कर उन्होंने फाइलों की गति और नतीजों को प्रभावित किया।

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