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ब्रेस्ट इंप्लांट से खतरनाक कैंसर, अब तक नौ की मौत

Thu, 23 Mar 2017 04:36 AM IST
amamrujala.com-presented By: संदीप भट्ट
amamrujala.com-presented By: संदीप भट्ट Updated Thu, 23 Mar 2017 04:36 AM IST
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Breast Implant Due to Dangerous Cancer
न्यूयॉर्क टाइम्स न्यूज सर्विस वाशिंगटन। फैशन को लेकर ब्रेस्ट इंप्लांट कराने वालों के लिए बेहद कष्टदायी खबर है। अमेरिका में 2011 के बाद ब्रेस्ट इंप्लांट कराने वाली नौ महिलाओं की मौत की पुष्टि सरकारी एजेंसी एफडीए ने की है। एफडीए के मुताबिक वर्ष 2011 में ही ब्रेस्ट इंप्लांट कराने वाली महिलाओं में पहली बार एक खतरनाक कैंसर होने का पता चला था। यह संख्या बहुत कम है क्योंकि बड़ी तादाद में दुनिया के भीतर ऐसे मामलों की रिपोर्टिंग ही नहीं होती है।
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एफडीए को 1 फरवरी तक ब्रेस्ट इंप्लांट के चलते होने वाले कैंसर से जुड़ी कुल 359 रिपोर्ट प्राप्त हुईं। इन रिपोर्ट नौ मौतों की पुष्टि ब्रेस्ट कैंसर के कारण नहीं, बल्कि रोग प्रतिरोधी तंत्र में असाध्य और अलग किस्म का कैंसर के चलते हुई हैं। ‘एनाप्लास्टिक लार्ज-सेल लिम्फोमा’ के रूप में इंप्लांट से जुड़ा कैंसर स्तन में फैल जाता है। आमतौर पर ‘स्कार टिश्यू’ के कैप्सूल में पाया जाने वाला यह स्वरूप जानलेवा नहीं होता है और इसका इलाज भी हो सकता है लेकिन इंप्लांट के बाद यह खतरनाक रूप में बदल जाता है।  
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अमेरिकन सोसायटी ऑफ प्लास्टिक सर्जन के मुताबिक अमेरिका में वर्ष 2016 के भीतर करीब 2 लाख 90 हजार महिलाओं ने स्तनों का आकार बढ़ाने के लिए इंप्लांटेशन कराया था, जिनमें से 1 लाख 09 हजार महिलाओं ने ब्रेस्ट कैंसर के बाद उनका रिकंस्ट्रक्शन कराया। अधिकांश मामलों में ‘लिम्फोमा’ की शिकायत मिलने पर ही इंप्लांट को हटाया जाता है और उन टिश्यूज को भी हटा दिया जाता है जो इंप्लांट स्थल के आसपास बीमारी बढ़ाते हैं। इनमें से कुछ महिलाओं को ‘कीमोथैरेपी’ और ‘रेडिएशन’ तक कराना पड़ा।
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इस दुर्लभ कैंसर का पता तब चलता है जब इंप्लांट कराने वाली महिलाओं को स्तन में गांठ, सूजन, दर्द या रक्तस्राव होता है। एफडीए यह नहीं बता पाया कि ऐसे कितने मामले हैं क्योंकि अधिकृत रिपोर्टिंग बहुत कम मामलों की हुई है। अधिकांश महिलाएं ‘टैक्चर्ड इंप्लांट’ कराती हैं, जबकि सबसे अधिक शिकायतें इसी में पाई गई हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ सदर्न कैलिफोर्निया, मेडिसिन के शोधकर्ता और प्लास्टिक सर्जन डॉ. एलेक्स के. वोंग ने बताया कि जब इस तरह के इंप्लांट को हटाया जाता है तो ‘छीलने की ध्वनि’ स्पष्ट सुनी जा सकती है जबकि सहज या स्मूथ इंप्लांट में ऐसा नहीं होता है। 

जोखिम भरे होते हैं अधिकांश इंप्लांट

Breast Implant Due to Dangerous Cancer
सरकारी एजेंसी एफडीए के मुताबिक ‘सहज (स्मूथ) इंप्लांट’ के बजाय जटिल व ‘टैक्सचर्ड इंप्लांट’ में इस तरह की समस्या आने की संभावना ज्यादा रहती है। एफडीए को प्राप्त कुल 359 रिपोर्टों में से 231 के इंप्लांट की सूचना मिल पाई है। इनमें से 28 इंप्लांट सहज रूप से हुए और 203 टैक्सचर्ड इंप्लांट थे। यानी अधिकांश ब्रेस्ट इंप्लांट जोखिम भरे होते हैं जो दुर्लभ कैंसर को जन्म दे सकते हैं।   

भारत में तेजी से बढ़ा है ब्रेस्ट इंप्लांट

भारत जैसे विकासशील देश में पहली बार 1973 में ब्रेस्ट सर्जरी हुई थी और गोपनीयता के कारण इंप्लांट कराने वाली महिला का नाम छुपाया गया था। लेकिन अब देश में इसका चलन बहुत तेजी से बढ़ गया है। वर्ष 2010-11 के दौरान ब्रेस्ट इंप्लांट सर्जरी के  मामले में भारत का स्थान दुनिया में सातवें नंबर पर आ चुका है। देश में अब 30 से अधिक उम्र की महिलाएं ही नहीं युवा लड़कियों द्वारा भी इंप्लांट के मामले बढ़े हैं।

अमेरिका ने दिया डॉक्टरों को सुझाव

एफडीए ने सुझाव दिया है कि इंप्लांट सर्जरी कराने के लंबे समय बाद यदि महिलाओं में स्तन संबंधी कोई शिकायत आनी शुरू होती है तो डॉक्टरों को तुरंत ‘लिम्फोमा’ की संभावनाओं की जांच करनी चाहिए। इसके अलावा भी डॉक्टरों को चाहिए कि बिना किसी शिकायत के भी वे इंप्लांट कराने वाली महिलाओं की समय-समय पर जांच करते रहें ताकि बीमारी खतरनाक रूप में न पहुंच जाए।
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