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वह ट्रेन की पटरी पर खड़ा हिलाता रहा हाथ, और फिर...
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Updated Wed, 14 Feb 2018 07:05 PM IST
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प्रतीकात्मक चित्र
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वो ट्रेन का इंतजार कर रहा था कि उसकी नजर ट्रेन की पटरियों पर पड़ी जहां एक आदमी खून से लथपथ पड़ा था। तभी उसने देखा कि उसी ट्रैक पर ट्रेन आ रही है। उसने अपनी जान की परवाह किए बिना ही ट्रेन को रोकने के लिए ट्रैक पर खड़ा हो गया और उस घायल व्यक्ति की जान बचा ली।
मामला मुंबई के चरनी रोड स्टेशन का है। 26 साल के एमबीए के छात्र श्रवण प्रेम तिवारी ट्रेन के इंतजार में प्लैटफॉर्म नंबर 4 पर खड़े थे कि तभी उसकी नजर ट्रैक पर गिरे हुए उस घायल आदमी पर पड़ी और वह आनन फानन में ट्रैक की तरफ दौड़ पड़ा। उसने देखा कि वह आदमी खून से लथपथ ट्रैक पर गिरा हुआ है उसके सिर और पैरों से खून बह रहा है। आ रही ट्रेन को रोकने के लिए तब तक हाथ हिलाता रहा जब तक ट्रेन रुक नहीं गई।
तिवारी ने बताया कि जब मैंने उसे देखा तो मुझे लगा वो मर चुका है लेकिन जैसे ही मैंने उसके नाक के पास उंगली रखी मुझे उसकी सांसें चल रही थी। मैं जैसे ही उसके लिए मदद मांगने को मुड़ा मैंने देखा कि मरीन लाइंस से ट्रेन स्टेशन की तरफ आ रही है।
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मामला मुंबई के चरनी रोड स्टेशन का है। 26 साल के एमबीए के छात्र श्रवण प्रेम तिवारी ट्रेन के इंतजार में प्लैटफॉर्म नंबर 4 पर खड़े थे कि तभी उसकी नजर ट्रैक पर गिरे हुए उस घायल आदमी पर पड़ी और वह आनन फानन में ट्रैक की तरफ दौड़ पड़ा। उसने देखा कि वह आदमी खून से लथपथ ट्रैक पर गिरा हुआ है उसके सिर और पैरों से खून बह रहा है। आ रही ट्रेन को रोकने के लिए तब तक हाथ हिलाता रहा जब तक ट्रेन रुक नहीं गई।
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तिवारी ने बताया कि जब मैंने उसे देखा तो मुझे लगा वो मर चुका है लेकिन जैसे ही मैंने उसके नाक के पास उंगली रखी मुझे उसकी सांसें चल रही थी। मैं जैसे ही उसके लिए मदद मांगने को मुड़ा मैंने देखा कि मरीन लाइंस से ट्रेन स्टेशन की तरफ आ रही है।
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उसकी जिंदगी बच गई है
श्रवण तिवारी
मुझे उस समय कुछ नहीं सूझा, मुझे लगा ट्रेन उसे कुचलती हुई गुजर जाएगी। मैं बिना समय गंवाए ट्रेन की तरफ हाथ हिलाता रहा और तब तक हिलाता रहा जब तक ट्रेन रुक नहीं गई।
तिवारी बताते हैं कि ट्रेन स्टेशन को छोड़ चलने को तैयार थी लेकिन जब ड्राइवर ने मुझे देखा तो उसने तुरंत ही ट्रेन को रोका। मैं मदद के लिए चिल्ला रहा था, कुछ यात्रियों ने मुझे सुना और वह भी मदद के लिए दौड़े। हमने उसे तुरंत ही ट्रैक से हटाया और पास के अस्पताल में ईलाज के लिए ले गए।
उस समय स्टेशन पर पुलिस भी मौजूद थी लेकिन वो मदद के लिए आगे नहीं आए जिससे घायल इंसान को मदद मिलने में देरी भी हुई। घायल इंसान अश्विन सांवत हैं। तिवारी ने बताया कि मैंने उसके परिवार वालों को उसकी दुर्घटना की जानकारी दी। तिवारी ने बताया कि उसकी जिंदगी बच गई है।
तिवारी बताते हैं कि ट्रेन स्टेशन को छोड़ चलने को तैयार थी लेकिन जब ड्राइवर ने मुझे देखा तो उसने तुरंत ही ट्रेन को रोका। मैं मदद के लिए चिल्ला रहा था, कुछ यात्रियों ने मुझे सुना और वह भी मदद के लिए दौड़े। हमने उसे तुरंत ही ट्रैक से हटाया और पास के अस्पताल में ईलाज के लिए ले गए।
उस समय स्टेशन पर पुलिस भी मौजूद थी लेकिन वो मदद के लिए आगे नहीं आए जिससे घायल इंसान को मदद मिलने में देरी भी हुई। घायल इंसान अश्विन सांवत हैं। तिवारी ने बताया कि मैंने उसके परिवार वालों को उसकी दुर्घटना की जानकारी दी। तिवारी ने बताया कि उसकी जिंदगी बच गई है।