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कोविड से जंग: कोरोना मरीजों के लिए ब्लैक फंगस के साथ 'ब्रेन फॉग' बना नई मुसीबत, 58 फीसदी मरीजों में दिख रहे लक्षण

Thu, 20 May 2021 07:02 PM IST
Harendra Chaudhary राहुल संपाल, अमर उजाला, नई दिल्ली
राहुल संपाल, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Thu, 20 May 2021 07:02 PM IST
सार

न्यूरोलॉजिस्ट का मानना है कि कोरोना संक्रमण के दौरान मरीजों में ब्लड क्लॉट यानी नसों में खून के थक्के जमना इसका कारण हो सकता है। संक्रमण होने पर शुरुआत में फेफड़ों और गले में सूजन आती है और संक्रमित होने के कुछ दिनों के अंदर मरीज का ब्लड गाढ़ा होने लगता है...

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Brain Fog become the new health problems after black fungus for Corona patients, know the symptoms of brain fog
ब्लैक फंगस - फोटो : istock

विस्तार

कोरोना संक्रमण के बीच लोगों में एक तरफ जहां ब्लैक फंगस के मामले बढ़ते दिखाई दे रहे हैं वहीं अब दूसरी तरफ कोरोना से ठीक होने के बाद मरीजों में ब्रेन फॉग के लक्षण भी दिखाई देने लगे हैं। ब्रेन फॉग से पीड़ित मरीज को अपने विचारों को व्यक्त करने या अपनी बात कहने में बेहद कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। यहां तक कि बोलने के दौरान प्रवाह भी बाधित होता है। अंतरराष्ट्रीय ई-पत्रिका मेडरिक्सिव ने भी अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि कोविड-19 के करीब 58 फीसदी मरीजों में ब्रेन फॉग या मानसिक दुविधा के लक्षण दिखाई दिए।

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आखिर क्या है ये ब्रेन फॉग

कोरोना वायरस संक्रमण से ठीक होने के बाद भी आज लोग कई तरह की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से परेशान हो रहे हैं। इनमें दिमाग से जुड़ी परेशानियां भी शामिल हैं। इन्हीं दिक्कतों को डॉक्टर्स ने ब्रेन फॉग यानी दिमाग का धुंधला होना मान रहे हैं। इसमें केंद्रीय तंत्रिका सही तरीके से काम नहीं करती। व्यक्ति की चेतना बार-बार बाधित होती है, जिसकी वजह से उसमे मानसिक थकान व दुविधा की स्थितियां पैदा होती हैं। ब्रेन फॉग ध्यान और याद्दाश्त को भी प्रभावित करती है। इससे प्रभावित व्यक्ति उचित निर्णय नहीं ले पाता।

न्यूरोलॉजिस्ट का मानना है कि कोरोना संक्रमण के दौरान मरीजों में ब्लड क्लॉट यानी नसों में खून के थक्के जमना इसका कारण हो सकता है। संक्रमण होने पर शुरुआत में फेफड़ों और गले में सूजन आती है और संक्रमित होने के कुछ दिनों के अंदर मरीज का ब्लड गाढ़ा होने लगता है। ये सब कोरोना वायरस की प्रवृत्ति के कारण होता है। जिसका मरीजों को पता नहीं चल पाता। रक्त संचार के दौरान शिराओं में खून के थक्के जमने से दिक्कतें शुरू हो जाती है।

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इलेक्ट्रोलाइट और शुगर का अंसतुलन

सफदरजंग अस्पताल में डिपार्टमेंट ऑफ कम्युनिटी मेडिसिन के डायरेक्टर, प्रोफेसर और हेड डॉ. जुगल किशोर ने अमर उजाला को बताया कि कोरोना संक्रमण के बाद व्यक्ति के शरीर में कई तरह के बदलाव होते हैं। इसमें बीमारी से जुड़ी कई नकारात्मक बातें होती हैं जो दिमाग पर असर करती हैं या कर चुकी होती है। इस स्थिति को ब्रेन फ़ॉग कहते हैं। इसमें वो बताने की कोशिश करते हैं कि कैसा महसूस कर रहे हैं। इसमें थकान, काम करने का मन न होना, ध्यान नहीं लगा पाना और याद्दाश्त कमजोर होने जैसी स्थिति शामिल है। कोविड इलाज के दौरान मरीजों में इलेक्ट्रोलाइट, शुगर के कम ज़्यादा होने के अलावा दिमाग तक ठीक से ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाना भी इस बीमारी की वजह होती है।

ऐसे पहचानें ब्रेन फॉग के लक्षण  

कोरोना वायरस का नया रूप शरीर के बाकी अंगों के अलावा दिमाग पर भी असर डाल रहा है। कोविड से ठीक होने के बाद थकान, शरीर में दर्द, सिरदर्द और सोने में दिक्कत सहित अन्य लक्षण ब्रेन फॉग के हो सकते हैं। हालांकि कुछ दिक्कतें फेफड़ों, दिल, गुर्दे या अन्य अंगों को पहुंची क्षति की वजह से भी हो सकती हैं। इन अंगों को पहुंचा नुकसान आपके सोचने और समझने की क्षमता को खराब कर सकते हैं और ब्रेन फॉग का कारण बन सकते हैं।

रमेश नगर में रहने वाले 45 वर्षीय कपड़ा व्यापारी रमेश शर्मा बताते हैं कि अप्रैल माह में वे कोरोना संक्रमित हुए थे। तबियत ज्यादा बिगड़ी तो घरवालों ने पंजाबी बाग के एक निजी अस्पताल में भर्ती करवाया। वहां करीब 15 से 20 दिन उपचार चला। इसके बाद जब घर आया तो अकेलापन, थकान, नींद, अवसाद, भूलने की बीमारी जैसे लक्षण दिखाई देने लगे। इसके बाद जब दोबारा चिकित्सकों से संपर्क किया उन्हें पूरी स्थिति बताई तो उन्होंने इसे ब्रेन फॉग बताया और मेंटल स्टेट एग्जामिनेशन स्केल टेस्ट करवाने की सलाह दी। ये 30 पाइंट का एक स्केल है, जिसमे कुछ सवाल पूछे जाते हैं और जवाब के आधार पर नम्बर दिए जाते हैं और मानसिक स्थिति का आकलन किया जाता है।

डॉक्टर जुगल किशोर ने बताया कि ब्रेन फॉग की अवस्था से गुजर रहे व्यक्ति को वही काम करना चाहिए जिससे सुकून मिले। इस दौरान एक्सरसाइज, योगा, किताबें पढ़ना, फिल्में देखना, संगीत सुनना और रचनात्मक गतिविधियां मानसिक तनाव से उबरने में मददगार साबित होती हैं और विचारों में स्पष्टता लाती हैं। इसके अलावा अच्छी नींद, भरपूर भोजन, शारीरिक गतिविधियां और तनाव प्रबंधन से ब्रेन फॉग का इलाज संभव है। इस दौरान शराब और बाकी नशे से बचें। इन सभी के बाद भी अगर किसी व्यक्ति को लगता है कि वह ब्रेन फॉग से ग्रसित है, तो उसे किसी डॉक्टर से सम्पर्क करना चाहिए।

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