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Shortage of Police Men: कैसे रुकेंगे अपराध? जब 36 राज्यों-केंद्रशासित प्रदेशों में तय संख्या में नहीं है खाकी

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Mon, 17 Apr 2023 05:39 PM IST
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सार
Shortage of Police Men: केंद्रीय गृह मंत्रालय में राज्य मंत्री नित्यानंद राय के अनुसार, जहां तक पुलिस कर्मियों की कमी का संबंध है, सेवा में पुलिस कार्मिकों की रिक्तियां सेवानिवृति, त्यागपत्र, मृत्यु, सेवा से निष्कासन आदि जैसे कारकों की वजह से उत्पन्न होती है...
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BPRD data revealed, huge Shortage of police personnel in country
Shortage of police personnel - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

देश में तकरीबन सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में पुलिस कर्मियों का टोटा है। 36 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में कहीं पर भी निर्धारित संख्या में 'खाकी' यानी पुलिस कर्मी नहीं हैं। पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो 'बीपीआरएंडडी' द्वारा संकलित पुलिस संगठनों के आंकड़ों के मुताबिक, एक जनवरी 2022 को स्वीकृत संख्या के अनुसार देश में प्रति लाख लोगों पर पुलिस कर्मियों का अनुपात 196.23 है। अगर मौजूदा समय की वास्तविक संख्या की बात करें, तो वह आंकड़ा 152.80 है। पश्चिम बंगाल में प्रति लाख जनसंख्या पर पुलिस कर्मियों की स्वीकृत संख्या 160.76 है, जबकि वास्तविक संख्या केवल 97.66 है। असम में प्रति लाख जनसंख्या पर पुलिस कर्मियों की स्वीकृत संख्या 231.90 है और वास्तविक संख्या 175.57 है। नागालैंड में पुलिस कर्मियों की स्वीकृत संख्या 1212.39 है। इस राज्य में वास्तविक संख्या 1189.33 है।

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समय-समय पर राज्यों को एडवाइजरी

केंद्रीय गृह मंत्रालय में राज्य मंत्री नित्यानंद राय के अनुसार, भारत के संविधान की सातवीं अनुसूची की सूची-2 (राज्य सूची) के अंतर्गत 'पुलिस' राज्य का विषय है। भर्ती एक सतत प्रक्रिया है। जहां तक पुलिस कर्मियों की कमी का संबंध है, सेवा में पुलिस कार्मिकों की रिक्तियां सेवानिवृति, त्यागपत्र, मृत्यु, सेवा से निष्कासन आदि जैसे कारकों की वजह से उत्पन्न होती है। प्राथमिक रूप से यह राज्य सरकारों की जिम्मेदारी है कि वे अपने संबंधित राज्यों में पुलिस बलों में रिक्तियों को भरें। खाली पदों को भरने के लिए और लोगों की वैध आकांक्षाओं को पूरा करने की खातिर पुलिस प्रशासन में अपेक्षित सुधार लाने के लिहाज से केंद्र द्वारा समय-समय पर राज्यों को एडवाइजरी जारी की जाती है।

कोई भी राज्य पर्याप्त संख्या पर खरा नहीं उतरा

देश में प्रति लाख जनसंख्या पर पुलिस कर्मियों की स्वीकृत संख्या और वास्तविक संख्या में काफी अंतर है। पश्चिम बंगाल में प्रति लाख जनसंख्या पर पुलिस कर्मियों की स्वीकृत संख्या 160.76 है, जबकि वास्तविक संख्या 97.66 है। उत्तर प्रदेश में प्रति लाख जनसंख्या पर पुलिस कर्मियों की स्वीकृत संख्या 181.75 है, जबकि वास्तविक संख्या 133.86 है। तमिलनाडु में स्वीकृत संख्या 171.95 है और वास्तविक संख्या 154.25 है। राजस्थान में स्वीकृत संख्या 139.81 है और वास्तविक संख्या 120.39 है। पंजाब में प्रति लाख जनसंख्या पर पुलिस कर्मियों की स्वीकृत संख्या 280.21 है और वास्तविक संख्या 237.12 है।

महाराष्ट्र और बिहार भी पीछे रहे

महाराष्ट्र में प्रति लाख जनसंख्या पर पुलिस कर्मियों की स्वीकृत संख्या 186.36 है और वास्तविक संख्या 136.45 है। गुजरात में प्रति लाख जनसंख्या पर पुलिस कर्मियों की स्वीकृत संख्या 174.39 है और वास्तविक संख्या 137.82 है। बिहार में पुलिस कर्मियों की स्वीकृत संख्या 115.08 है, जबकि वास्तविक संख्या 75.16 है। असम में प्रति लाख जनसंख्या पर पुलिस कर्मियों की स्वीकृत संख्या 231.90 है और वास्तविक संख्या 175.57 है। आंध्र प्रदेश में प्रति लाख जनसंख्या पर पुलिस कर्मियों की स्वीकृत संख्या 200.54 है और वास्तविक संख्या 167.67 है।

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