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Boycott: PAK के दोस्त तुर्किये-अजरबैजान का सामान नहीं ले जाएंगे ट्रक चालक; ऑपरेशन सिंदूर के बाद बदला माहौल
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बायकॉट
- फोटो : Adobe Stock
भारत के एहसानों को भूलकर पाकिस्तान का साथ देना टर्की को चार हजार करोड़ रुपये महंगा पड़ सकता है। अजरबैजान को भी पाकिस्तान की दोस्ती की कीमत तीन हजार करोड़ रुपये वार्षिक की चपत लगा सकती है। देशभर के व्यापारियों ने तुर्किये और अजरबैजान से आयात होने वाली वस्तुओं पर पहले ही एक तरफा प्रतिबंध लगा दिया है। 16 मई को दिल्ली में व्यापारियों की एक बड़ी बैठक में तुर्किये और अजरबैजान से सभी व्यापारिक रिश्तों को तोड़ने पर निर्णय लिया जा सकता है।
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वहीं, देश के ट्रक ऑपरेटर संगठनों की बैठक में पाकिस्तान के दोस्त देश तुर्किये और अजरबैजान से आने वाली किसी भी वस्तु को देश में एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुंचाने से इनकार कर दिया है। व्यावसायिक ट्रक ऑपरेटर संगठनों ने भी व्यापारियों के सुर में अपना सुर मिलाते हुए केंद्र सरकार से इन देशों से व्यापारिक रिश्ते बंद करने की मांग कर रहे हैं। व्यापारी केंद्र सरकार से टर्की और अजरबैजान की एयरलाइंस पर भी प्रतिबंध लगाने की मांग कर सकते हैं।
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क्या आयात करता है भारत?
यदि यह निर्णय अमल में लाया जाता है तो इससे भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव के समय में पाकिस्तान का साथ देने वाले तुर्किये और अजरबैजान को हर साल तीन से चार हजार करोड़ का नुकसान हो सकता है। तुर्किये से हर साल भारत को करोड़ों रुपये का नमक और खाद्य सामग्री, रसायन, आभूषण, पशुओं के उत्पाद, खनिज तेल और परमाणु रिएक्टर के पुर्जे का आयात होता है। यदि व्यापारियों का निर्णय पूरा हुआ तो इन देशों को हर साल हजारों करोड़ रुपये का नुकसान होगा। हालांकि, इसके बदले इन देशों में भी भारत के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने की मांग उठ सकती है।
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टर्की-अजरबैजान के सामान नहीं ले जाएंगे ट्रक ऑपरेटर
ऑल इंडिया मोटर एंड गुड्स ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेन्द्र कपूर ने अमर उजाला से कहा कि देश भर के ट्रक ऑपरेटर तुर्किये और अजरबैजान से आयातित किसी भी सामान को देश के दूसरे स्थानों पर पहुंचाने के लिए अपनी सेवा नहीं देंगे। बुधवार को ट्रक ऑपरेटर संगठन की बैठक में यह निर्णय लिया गया है और राष्ट्रीय स्तर पर इस निर्णय का पालन किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि हमने भारत सरकार से आग्रह किया है कि तुर्किये और अजरबैजान की भारत विरोधी नीतियों को देखते हुए इन दोनों देशों से आने वाले सामान और सेवाओं पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगाया जाए। उन्होंने कहा कि हम देशभर के सभी ट्रांसपोर्टरों, व्यापारियों और व्यापारिक संगठनों से अपील करते हैं कि इन राष्ट्रविरोधी देशों के उत्पादों और सेवाओं का पूर्ण बहिष्कार करें।
राजेन्द्र कपूर ने कहा कि एक तरफ सीमा पर हमारे सैनिक अपना खून बहा रहे हैं और दूसरी ओर इन्हीं देशों से व्यापार किया जाए, यह किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है। एक नागरिक के तौर पर हमारी जिम्मेदारी है कि हम अपने सैनिकों का हर स्तर पर साथ दें। सीमा पर हमारे सैनिक उनके साथ लड़ रहे हैं। ऐसे में हम देश में ऐसी ताकतों का विरोध करेंगे जो भारत और हमारे सैनिकों को नुकसान पहुंचाते हैं।
कपूर के अनुसार, हमारी संस्था के पदाधिकारियों ने बुधवार देर शाम हुई कार्यकारिणी की मीटिंग में राष्ट्रहित को सर्वोपरि मानते हुए यह निर्णय लिया है कि आने वाले समय में तुर्किये और अजरबैजान से संबंधित कोई भी व्यापारिक गतिविधि हमारे सदस्यों द्वारा नहीं की जाएगी।