OTS Scheme: एकमुश्त समाधान योजना में नहीं बढ़ा सकते भुगतान की समय सीमा, सुप्रीम कोर्ट का फैसला
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस कृष्ण मुरारी ने पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट का मार्च में दिया गया फैसला खारिज कर दिया। इसमें हाईकोर्ट ने कर्जदाता को स्टेट बैंक आफ इंडिया के साथ हुए ओटीएस करार के तहत बकाया राशि के भुगतान के लिए छह सप्ताह का अतिरिक्त समय दे दिया था।
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सुप्रीम कोर्ट ने कर्ज की एकमुश्त समाधान योजना (OTS scheme) के तहत बकाया राशि के भुगतान की समय सीमा बढ़ाने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि कोई भी कर्जदाता इस योजना में भुगतान की समय सीमा बढ़ाने की मांग नहीं कर सकता है। न ही वह इस तरह के अधिकार की मांग कर सकता है।
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस कृष्ण मुरारी ने पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट का मार्च में दिया गया फैसला खारिज कर दिया। इसमें हाईकोर्ट ने कर्जदाता को स्टेट बैंक आफ इंडिया के साथ हुए ओटीएस करार के तहत बकाया राशि के भुगतान के लिए छह सप्ताह का अतिरिक्त समय दे दिया था। शीर्ष अदालत ने कहा कि कर्जदार को भुगतान की समय सीमा बढ़ाने का दावा करने के लिए इससे संबंधित अधिकार को कानूनी तौर पर पेश करना होगा।
शीर्ष अदालत ने कहा कि ओटीएस योजना के तहत बकाया राशि के भुगतान को पुनर्निर्धारित करना और समय सीमा बढ़ाना समाधान योजना के अनुबंध को फिर से लिखने के समान होगा। संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत इसकी अनुमति नहीं है। इसमें कहा गया है कि भारतीय अनुबंध अधिनियम की धारा 62 के तहत आपसी सहमति से ही अनुबंध में संशोधन किया जा सकता है। संविधान का अनुच्छेद 226 कुछ आदेश जारी करने के लिए हाईकोर्टों की शक्ति से संबंधित है।
शीर्ष कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि कर्जदार यह दावा नहीं कर सकता कि उसने ओटीएस योजना में मंजूर प्रस्ताव के अनुसार भुगतान नहीं किया है, फिर भी उसे बकाया की अदायगी के लिए और समय दिया जाए।
एसबीआई ने दायर की थी अपील
एसबीआई ने पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ शीर्ष कोर्ट में अपील की थी। इसी अपील पर शीर्ष अदालत ने अपना फैसला सुनाया। एसबीआई सितंबर 2017 में ओटीएस योजना लेकर आई थी। इसमें एकमुश्त समाधान योजना के तहत प्रस्ताव की मंजूरी की तारीख से छह महीने में भुगतान करना जरूरी था, अन्यथा यह समझौता निष्प्रभावी हो जाएगा।