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सीमा विवाद : भारतीय इलाका खाली कराने की चुनौती कायम, दो कदम आगे व एक कदम पीछे की रणनीति पर चल रहा चीन
Sat, 20 Feb 2021 08:03 PM IST
सुरेंद्र जोशी
शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली
शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: सुरेंद्र जोशी
Updated Sat, 20 Feb 2021 08:03 PM IST
सार
-पैंगांग त्सो से पीछे हटी चीनी सेना, लेकिन भारत ने भी गश्त का खोया अधिकार
-दो कदम आगे बढ़कर चीन चल रहा है एक कदम पीछे हटने की रणनीति पर
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फाइल फोटो
- फोटो : ANI
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विस्तार
भारत-चीन के बीच पूर्वी लद्दाख सीमा पर तनाव खत्म करने के उपाय जारी हैं। दोनों देशों में समझौता हो चुका है। पैंगोंग झील क्षेत्र में चीन ने अपने स्थायी तंबू और सैन्य शिविर उखाड़ लिए हैं और इन्हें लेकर वह वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के पास जा रहा है। बदले में भारत ने भी कैलाश रेंज की चोटियों को खाली कर दिया है। हमारी सेना ने भी फिंगर 4-8 तक गश्त करने के अधिकार को छोड़ दिया है। सूत्रों का कहना है कि अब भी भारतीय इलाके चीन से खाली कराने की चुनौती कायम है। चीन दो कदम आगे व एक कदम पीछे हटने की रणनीति पर चल रहा है।
सूत्र बताते हैं कि गोगरापोस्ट, हॉटस्प्रिंग, डेपसांग पर अभी स्थिति साफ नहीं हो पाई है। दोनों देशों के बीच में बनी सहमति के अनुसार अब दोनों देशों के सैन्य कमांडर वार्ता की मेज पर बैठेंगे और अगले चरण का हल निकालेंगे।
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सूत्र बताते हैं कि गोगरापोस्ट, हॉटस्प्रिंग, डेपसांग पर अभी स्थिति साफ नहीं हो पाई है। दोनों देशों के बीच में बनी सहमति के अनुसार अब दोनों देशों के सैन्य कमांडर वार्ता की मेज पर बैठेंगे और अगले चरण का हल निकालेंगे।
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22 फरवरी को होगी अहम बैठक
रक्षा मंत्रालय और विदेश मंत्रालय दोनों की निगाह लद्दाख में चीनी घुसपैठ पर टिकी हुई है। चीन स्टडी ग्रुप की बैठक में भी यह मुद्दा काफी महत्वपूर्ण रहता है। 22 फरवरी 2021 को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, रक्षा सचिव, रक्षा उत्पादन सचिव, सीडीएस जनरल विपिन रावत तीनों सेनाओं के प्रमुखों की बैठक भी प्रस्तावित है। समझा जा रहा है कि इस बैठक में देश की सुरक्षा से जुड़े मुद्दे के साथ-साथ लद्दाख में चीन के साथ अगले चरण की बातचीत समेत अन्य पहुलओं पर चर्चा हो सकती है।
गोगरापोस्ट, डेपसांग और हॉटस्प्रिंग में चाहिए सम्मानजनक स्थिति
चीन से अगले चरण की बातचीत और सहमति में भारत की निगाह गोगरापोस्ट, डेपसांग और हॉटस्प्रिंग पर टिकी है। चीन डेपसांग से पीछे नहीं हटना चाहता। यूपीए सरकार के समय में भी चुमार और डेपसांग में चीन की सेना घुस आई थी, लेकिन बाद में उसे पीछे वास्तविक नियंत्रण रेखा पर लौटना पड़ा था। अभी चीनी पक्ष डेपसांग को अपना क्षेत्र बताकर अडियल रुख दिखा रहा है। गोगरापोस्ट और हॉट स्प्रिंग को लेकर भी उसके अलग-अलग दावे हैं।
गोगरापोस्ट, डेपसांग और हॉटस्प्रिंग में चाहिए सम्मानजनक स्थिति
चीन से अगले चरण की बातचीत और सहमति में भारत की निगाह गोगरापोस्ट, डेपसांग और हॉटस्प्रिंग पर टिकी है। चीन डेपसांग से पीछे नहीं हटना चाहता। यूपीए सरकार के समय में भी चुमार और डेपसांग में चीन की सेना घुस आई थी, लेकिन बाद में उसे पीछे वास्तविक नियंत्रण रेखा पर लौटना पड़ा था। अभी चीनी पक्ष डेपसांग को अपना क्षेत्र बताकर अडियल रुख दिखा रहा है। गोगरापोस्ट और हॉट स्प्रिंग को लेकर भी उसके अलग-अलग दावे हैं।
विशेषज्ञ बोले-भारत ने अवसर खो दिया
रक्षा और विदेश मामलों के जानकार रंजीत कुमार कहते हैं कि भारत ने कैलाश रेंज की चोटियों से पीछे हटकर डेपसांग से चीन को पीछे धकेलने का अवसर खो दिया है। वहीं चीन का पक्ष सौदेबाजी पर उतरा हुआ है। गोगरापोस्ट और हॉटस्प्रिंग में भी भारत के पास उसे एलएसी पर भेजने की चुनौती है।
तकनीकी रूप से अप्रैल की स्थिति में गई चीनी सेना, हम भी पीछे हटे
लद्दाख सीमा पर फौज के पीछे हटने के सवाल पर विदेश और रक्षा मंत्रालय के सूत्र कहते हैं चीन की सेना पैंगोंग क्षेत्र में अप्रैल 2020 की स्थिति में लौट रही है। इस पर रंजीत कुमार का कहना है कि चीन के साथ-साथ भारत ने अपने दावों से समझौता किया है। भारतीय सेना फिंगर 4-8 तक गश्त करने जाती थी। फिंगर 4 पर हमारी सैन्य चौकी थी। अब भारतीय सेना वहां से पीछे हटकर फिंगर 3 पर आ गई है। चीन की सेना फिंगर 8 से पीछे चली गई है। रंजीत का कहना है कि अपनी ही जमीन पर पीछे हटे हैं और गश्ती करने के अधिकार को भी कम किया है।
तकनीकी रूप से अप्रैल की स्थिति में गई चीनी सेना, हम भी पीछे हटे
लद्दाख सीमा पर फौज के पीछे हटने के सवाल पर विदेश और रक्षा मंत्रालय के सूत्र कहते हैं चीन की सेना पैंगोंग क्षेत्र में अप्रैल 2020 की स्थिति में लौट रही है। इस पर रंजीत कुमार का कहना है कि चीन के साथ-साथ भारत ने अपने दावों से समझौता किया है। भारतीय सेना फिंगर 4-8 तक गश्त करने जाती थी। फिंगर 4 पर हमारी सैन्य चौकी थी। अब भारतीय सेना वहां से पीछे हटकर फिंगर 3 पर आ गई है। चीन की सेना फिंगर 8 से पीछे चली गई है। रंजीत का कहना है कि अपनी ही जमीन पर पीछे हटे हैं और गश्ती करने के अधिकार को भी कम किया है।
चीन की यह रणनीति पुरानी
चीन की एक पुरानी रणनीति है। पड़ोसी देश की सीमा में दो कदम घुसता है, कुछ दिन तनाव की स्थिति बनाता है और इसके बाद एक कदम पीछे हटकर समझौता कर लेता है। कुछ समय बाद फिर वह इसी को दोहराता है। इसे चीन की सीमा विस्तार की सबसे खतरनाक नीति के तौर पर देखा जाता है।
मई 2020 में चीन की लद्दाख में घुसपैठ के बाद चीन के नई दिल्ली में राजदूत ने इसी तरह का संकेत दिया था। जुलाई 2020 में एनएसए अजीत डोभाल और उनके चीनी समकक्ष वांग यी के बीच में गलवां वैली को लेकर इसी आधार पर सहमति बनी थी और दोनों देश बफर जोन बनाने की शर्त पर तैयार हुए थे। इसमें भारतीय सेना को अपनी ही जमीन पर पीछे लौटने तथा चीन की फौज के एलएसी पर पुराने तैनाती स्थल पर चले जाने पर सहमति बनी थी।
मई 2020 में चीन की लद्दाख में घुसपैठ के बाद चीन के नई दिल्ली में राजदूत ने इसी तरह का संकेत दिया था। जुलाई 2020 में एनएसए अजीत डोभाल और उनके चीनी समकक्ष वांग यी के बीच में गलवां वैली को लेकर इसी आधार पर सहमति बनी थी और दोनों देश बफर जोन बनाने की शर्त पर तैयार हुए थे। इसमें भारतीय सेना को अपनी ही जमीन पर पीछे लौटने तथा चीन की फौज के एलएसी पर पुराने तैनाती स्थल पर चले जाने पर सहमति बनी थी।
चीन की चाल घोड़े जैसी
चीन मामलों के जानकार प्रो. स्वर्ण सिंह, पूर्व विदेश सचिव शशांक समेत तमाम राजनयिक इसे चीन की शतरंज की बिसात पर घोड़े जैसी चाल मानते हैं। माना जा रहा है कि लद्दाख क्षेत्र में पहले चरण का समझौता इसी रणनीति के तहत हुआ है। अगले चरण में भी इस तरह की स्थिति से इनकार नहीं किया जा रहा है।