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Exclusive: सियाचिन में तैनात जवानों के लिए जूते खरीदने की प्रक्रिया पर उठे सवाल, नियमों को ताक पर रखने का आरोप

Thu, 23 May 2024 06:36 PM IST
Harendra Chaudhary हरेंद्र चौधरी
Updated Thu, 23 May 2024 06:36 PM IST
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सार
सेना के रिटायर्ड कर्नल अमित कुमार ने अमर उजाला को खास बातचीत में बताया कि उन्होंने जूतों की खरीद प्रक्रिया में एमजीएस ब्रांच द्वारा किए गए गंभीर भ्रष्टाचार के मामले को रक्षा मंत्रालय के समक्ष रखा है। उन्होंने इस मामले की शिकायत प्रधानमंत्री, रक्षा मंत्री, चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ, रक्षा मंत्रालय और रक्षा सचिव से की है।
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boots acquisition for indian army soldiers posted in siachen question arise exclusive
सियाचिन में तैनात सैनिकों के जूते खरीद प्रक्रिया पर उठे सवाल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

रक्षा मंत्रालय में जूतों की खरीद प्रक्रिया में कथित अनिमियतताओं का मामला सामने आया है। इस संबंध में एक व्हिसलब्लोअर ने एक शिकायती ई-मेल प्रधानमंत्री, रक्षा मंत्री, चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ, रक्षा सचिव और एडीजीपीआई को भेजा है, जिसमें उन्होंने टेंडर प्रक्रिया में एक खास कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए तय नियमों की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। आरोप लगाने वाले सेना के रिटायर्ड कर्नल हैं, जो भ्रष्टाचार के मामलों पर हमेशा मुखर रहते हैं। उनका आरोप है कि रक्षा मंत्रालय की एमजीएस ब्रांच (मास्टर जनरल ऑफ सस्टेनेंस ब्रांच, प्रोक्योरमेंट) ने सितंबर, 2023 में मल्टीपर्पज बूट की सप्लाई के लिए रिक्वेस्ट ऑफ पर्पोजल (आरएफपी) जारी किया था। एमजीएस ब्रांच ने इस प्रक्रिया में आरएफपी नीतियों का उल्लंघन किया है। उन्होंने इस मामले में खरीद प्रक्रिया पर रोक लगाने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। 


प्रधानमंत्री, रक्षा मंत्री से की शिकायत
इस मामले में शिकायतकर्ता सेना के रिटायर्ड कर्नल अमित कुमार ने अमर उजाला को खास बातचीत में बताया कि उन्होंने जूतों की खरीद प्रक्रिया में एमजीएस ब्रांच द्वारा किए गए गंभीर भ्रष्टाचार के मामले को रक्षा मंत्रालय के समक्ष रखा है। उन्होंने इस मामले की शिकायत प्रधानमंत्री, रक्षा मंत्री, चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ, रक्षा मंत्रालय और रक्षा सचिव से की है और मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग करते हुए टेंडर प्रक्रिया को रद्द करने और दोषी अफसरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। अमर उजाला के पास उनका शिकायती पत्र है। जिसमें उन्होंने लिखा है, "यह एक औपचारिक शिकायत और कानूनी नोटिस है। देश से ऊपर कुछ भी नहीं है और भ्रष्टाचार या भ्रष्ट आचरण पर कोई माफी नहीं मिलनी चाहिए। प्रथम दृष्टया यह मामला आरएफपी नीतियों के उल्लंघन का है, जो एक गंभीर अपराध है। वह भी खास तौर से तब, जब बल्क में खरीद हो रही हो, क्योंकि यह आम जनता का पैसा है, इसलिए इस मामले की जांच होनी चाहिए।" 


23,582 जोड़ी जूतों की होनी है खरीद
कर्नल अमित कुमार के मुताबिक रक्षा मंत्रालय की एमजीएस ब्रांच (मास्टर जनरल ऑफ सस्टेनेंस ब्रांच, प्रोक्योरमेंट) ने 14 सितंबर, 2023 में मल्टीपर्पज शूज की खरीद के लिए टेंडर जारी किया था। इसमें ऑरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स से जूतों की सप्लाई के लिए टेंडर मांगे गए थे। इस बल्क खरीद प्रक्रिया के तहत 23,582 जोड़ी जूते खरीदे जाने हैं, जिनकी कीमत लगभग 20 करोड़ रुपये के आसपास थी। अमर उजाला के पास उस रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (आरएफपी) की कॉपी है। इस टेंडर में हिस्सा लेने वाली कंपनियों को 21 जोड़ी जूते सैंपल के तौर पर यूजर ट्रायल के लिए उपलब्ध कराना जरूरी था। इस टेंडर में वे ही कंपनियां हिस्सा ले सकती थीं, जिनका तीन साल का औसत टर्नओवर 1000 करोड़ रुपये से ज्यादा का रहा हो। उनके लिए इंडियन फर्म या पीएसयू होना जरूरी है। ऐसी विदेशी फर्म जिनकी भारत में मैन्युफैक्चरिंग है। वे ओईएम तो उत्पादों को अपने नाम/ब्रांड में आउटसोर्सिंग करता है। ओईएम के पास पूर्ण स्वामित्व वाली भारतीय सहायक कंपनी हो जिसके पास मैन्युफैक्चरिंग सुविधा हो। ये कंपनियां ही इस टेंडर में हिस्सा लेने के योग्य हैं। 

सियाचिन में तैनात सैनिकों के लिए चाहिए विशेष जूते
कर्नल अमित बताते हैं कि ये मल्टीपर्पज जूते सुपर हाई एल्टीट्यूड इलाकों जैसे सियाचिन जैसे बर्फीले इलाकों में तैनात सैनिकों के लिए खरीदे जाने थे। खरीदने से पहले इनका यूजर ट्रायल जरूरी था। टेंडर की शर्तों के मुताबिक ये जूते माइनस 50 के तापमान को झेलने की क्षमता रखते हों। 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली हवाओं को सह सकते हों। साथ ही, ये वाटरप्रूफ होने चाहिए और बर्फ भी इनके अंदर प्रवेश न कर पाए। ये जूते पहनने में आरामदायक होने के साथ स्टैंडर्ड यूके साइज में हों। इनमें डबल लेयर हो, जिनमें अंदर की लेयर में ऊनी मौजे बिना किसी दिक्कत के पहने जा सकें। साथ ही, ये कठिन हालात में इस्तेमाल करने योग्य हों। वजन में हल्के हों, ताकि पहाड़ों में बर्फ में आवाजाही में आसानी हो। बूट की हील ऐसी हो, जो फिसले नहीं, जिसकी ग्रिप भी अच्छी हो। इसके अलावा बर्फ में चलने के लिए क्रैम्पॉन्स लगाने के बाद आरामदायक हों। साथ ही, ये जूते आसानी से साफ हो सकें और इनका रखरखाव आसान हो।  

जूतों पर मार्किंग की अनुमति कैसे दी?
कर्नल अमित कुमार ने बताया कि इस टेंडर में शामिल एक कंपनी ने अपने जूतों पर मार्किंग की थी। जो कि आरएफपी की शर्तों का उल्लंघन है। वह कहते हैं कि आरएफपी क्लॉज के पार्ट II, 4(बी) में, पेज नंबर संख्या 9 पर यूजर ट्रायल की शर्तों में साफ-साफ लिखा है, "वेंडर यह सुनिश्चित करेंगे कि सैंपल पर किसी भी तरह की मार्किंग और वेंडर की पहचान न हो। अगर सैंपल पर इन निर्देशों का पालन नहीं होता है, उन्हें खारिज कर दिया जाएगा। कॉन्ट्रैक्ट खत्म होने के बाद बाद ही जूते पर मार्किंग क्लॉज लागू होगा।" वह कहते हैं कि आरएफपी नीतियों के खिलाफ कैसे किसी कंपनी को जूतों पर मार्किंग की अनुमति दी गई और एमजीएस ब्रांच ने मार्किंग वाले शूज टेंडर प्रक्रिया में कैसे स्वीकार कर लिए। यह सरासर आरएफपी शर्तों का उल्लंघन है। वह कहते हैं कि उन्हें संदेह है कि यह भ्रष्टाचार का बड़ा मामला है और एक कंपनी को फायदा पहुंचाने की नीयत से ऐसा किया गया है। आखिर एमजीएस ब्रांच ने मार्किंग वाले शूज रिजेक्ट क्यों नहीं किए, जबकि शर्तों में ऐसा करने की बात कही गई है।  

एमजीएस ब्रांच ने साधी चुप्पी
रक्षा मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि इस टेंडर में पांच वेंडर्स ने हिस्सा लिया था। सभी ने 21-21 जोड़ी जूते यूजर ट्रायल के लिए उपलब्ध कराए थे। अभी उनका ट्रायल जारी है। इस महीने के आखिर तक या जून में यूजर ट्रॉयल रिपोर्ट आने के बाद टेंडर अवॉर्ड कर दिया जाएगा। वहीं, इंडियन आर्मी के पीआरओ कर्नल सुधीर चमोली ने आधिकारिक रूप से बताया कि यह कार्यालय न तो खरीद प्रक्रिया में काम करता है और न ही इस संबंध में किसी तथ्यात्मक जानकारी से अवगत है। वहीं इस संदर्भ में अमर उजाला ने 22 मई को सेना भवन स्थित एमजीएस ब्रांच को ईमेल कर इस मामले को लेकर स्पष्टीकरण मांगा गया, तो उनकी तरफ से अभी तक कोई जवाब नहीं आया है।
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