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Bombay High Court: 'बच्चियों को भी नहीं बख्शा जा रहा, यह कैसे हालात', बदलापुर मामले में हाईकोर्ट की टिप्पणी

Thu, 22 Aug 2024 08:21 AM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Thu, 22 Aug 2024 08:21 AM IST
सार

मामला सामने आने के बाद मंगलवार को बदलापुर में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुआ था। इस बीच बुधवार को शहर में इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई थीं। पुलिस ने बताया कि आंदोलन के दौरान हुई हिंसा के सिलसिले में 72 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

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Badlapur Case Bombay High Court Takes Cognizance Of Sexual Harassment Case Hearing Today
बॉम्बे हाईकोर्ट - फोटो : एएनआई

विस्तार

बॉम्बे हाईकोर्ट ने बदलापुर में एक स्कूल में नाबालिग लड़कियों के साथ यौन उत्पीड़न के मामले में स्वतः संज्ञान लिया है। मामले की सुनवाई आज यानी गुरुवार को हुई। जस्टिस रेवती मोहिते डेरे और जस्टिस पृथ्वीराज चव्हाण की खंडपीठ ने मामले में सुनवाई की। इस दौरान कोर्ट ने कहा कि अब चार साल की मासूम बच्चियां भी सुरक्षित नहीं हैं। उन्हें भी नहीं बख्शा जा रहा। यह कैसे हालात हैं। अगर स्कूल ही सुरक्षित नहीं हैं तो शिक्षा के अधिकार और बाकी चीजों का क्या मतलब। हाईकोर्ट ने मामले की जानकारी छिपाने के आरोप में स्कूल प्रशासन के खिलाफ पॉक्सो के तहत केस दर्ज करने को कहा है। कोर्ट ने सरकार से केस डायरी और प्राथमिकी की कॉपी भी मांगी है। मामले की अगली सुनवाई 27 अगस्त को होगी।

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कोर्ट ने सरकार से पूछा कि क्या बच्चियों ने स्कूल प्रशासन से यौन शोषण की शिकायत की थी। सरकार ने इसका जवाब हां कहकर दिया। कोर्ट ने पूछा कि क्या पुलिस ने स्कूल के खिलाफ केस दर्ज किया। पॉक्सो के तहत घटना की जानकारी छिपाने पर स्कूल प्रशासन को भी आरोपी बनाने का प्रावधान है। सरकार ने कहा कि SIT का गठन किया गया है। अब केस दर्ज किया जाएगा। कोर्ट ने पुलिस को फटकार लगाते हुए कहा कि बच्ची के परिजन ने जैसे ही एफआईआर दर्ज कराई, स्कूल अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया जाना चाहिए था।
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कोर्ट ने कहा कि हम यह जानकर भी हैरान हैं कि पुलिस ने दूसरी बच्ची के परिजन का बयान भी दर्ज नहीं किया था। हमने संज्ञान लिया, तब पुलिस ने ऐसा किया। आपने आधी रात के बाद बयान दर्ज किया। आप ऐसा कैसे कर सकते हैं? इतनी देरी क्यों? बताइए। बच्चियों ने खुद घटना जानकारी दी है। इसके लिए बहुत हिम्मत जरूरी होती है। कोर्ट ने सख्त लहजे में कहा कि राज्य सरकार और पुलिस की ओर से किसी भी तरह की लापरवही हुई या मामले को दबाने की कोशिश की गई, तो हम कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेंगे।
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दरअसल, बदलापुर पूर्व के एक नामी स्कूल में दो बच्चियों के साथ यौन उत्पीड़न का मामला सामने आया है। पीड़ितों में से एक चार साल की है और दूसरी छह साल की है। घटना 12 और 13 अगस्त को घटी थी। आरोपी अक्षय शिंदे को गिरफ्तार कर लिया गया है। वह 1 अगस्त, 2024 को टॉयलेट साफ करने के लिए अनुबंध के आधार पर स्कूल में भर्ती किया गया था। स्कूल ने लड़कियों के शौचालयों की सफाई के लिए कोई महिला कर्मचारी नियुक्त नहीं की थी। इसका फायदा उठाते हुए आरोपी ने 12 और 13 अगस्त की कक्षाओं के दौरान बच्चों के साथ बदसलूकी की।

मामला सामने आने के बाद मंगलवार को बदलापुर में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुआ था। इस बीच बुधवार को शहर में इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई थीं। पुलिस ने बताया कि आंदोलन के दौरान हुई हिंसा के सिलसिले में 72 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। सरकार ने मामले की जांच के लिए वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी आरती सिंह की अध्यक्षता में एक विशेष जांच दल (एसआईटी) के गठन का आदेश दिया है।

24 अगस्त को महाराष्ट्र बंद बुलाया गया
महाविकास अघाड़ी ने घटना के विरोध में 24 अगस्त को महाराष्ट्र बंद बुलाया है।  कांग्रेस, शिवसेना (यूबीटी) और एनसीपी (एससीपी) ने 21 अगस्त को इसका एलान किया था। इससे पहले महाराष्ट्र के सीएम एकनाथ शिंदे ने 20 अगस्त को हुए विरोध प्रदर्शन को सियासत से प्रेरित बताया था। उन्होंने दावा किया कि ज्यादातर प्रदर्शनकारी बाहरी थे। इस पर गुरुवार को उद्धव ठाकरे ने कहा कि जो लोग सोचते हैं कि बदलापुर की घटना के विरोध के पीछे राजनीति है, वे या तो सामान्य नहीं हैं या दोषियों को बचा रहे हैं। 24 अगस्त को आहूत बंद के पीछे कोई राजनीतिक मकसद नहीं है। महिलाओं की सुरक्षा सभी की प्राथमिकता होनी चाहिए।

हरकत में सरकार और स्कूल प्रबंधन
इससे पहले मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने भी स्कूल के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा कि मामले की तेजी से जांच की जाएगी और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। घटना के लिए स्कूल प्रबंधन ने प्रिंसिपल, एक क्लास टीचर और एक महिला अटेंडेंट को निलंबित कर दिया है। राज्य सरकार ने  लापरवाही के लिए एक वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक सहित तीन पुलिस अधिकारियों को भी निलंबित करने का आदेश दिया है। दरअसल, विपक्षी दलों ने आरोप लगाया था कि लड़कियों के माता-पिता को बदलापुर पुलिस स्टेशन में 11 घंटे तक इंतजार करना पड़ा। 



कैसे हुआ खुलासा?
दरअसल, 14 अगस्त को एक बच्ची ने स्कूल से घर लौटने के बाद अपने माता-पिता से गुप्तांगों में दर्द की शिकायत की। बच्ची लगातार अपने माता-पिता से शिकायत करती रही तो माता-पिता को शक हुआ। उन्होंने लड़की से पूछताछ की तो घटना का पूरा सच पता चला। जब वह टॉयलेट गई तो पता चला कि अक्षय शिंदे नाम के 23 वर्षीय सफाईकर्मी ने उसके प्राइवेट पार्ट को छुआ था।

चिंतित माता-पिता ने उसी कक्षा की एक अन्य लड़की के माता-पिता से संपर्क किया तो उन्होंने भी कहा कि उनकी बेटी कुछ दिनों से स्कूल जाने से डर रही है। दोनों बच्चियों की हालत संदिग्ध होने पर माता-पिता ने तुरंत स्थानीय डॉक्टर से जांच कराया। उसमें बाद पता चला कि आरोपी ने बच्चियों के साथ बदसलूकी की थी। 


हस्तक्षेप के बाद मामला दर्ज किया गया
इसके बाद दोनों के परिजन ने 16-17 अगस्त की आधी रात करीब 12:30 बजे स्थानीय पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराने गए। हालांकि, अभिभावकों का आरोप है कि तत्कालीन थाना प्रभारी शुभदा शितोले ने उनकी शिकायत दर्ज करने के बजाय उन्हें कुछ घंटों तक बैठाए रखा और कहा कि वे सभी घटनाओं की जांच कर रहे हैं। इस बीच, जिला महिला एवं बाल कल्याण अधिकारी के हस्तक्षेप के बाद पुलिस ने 17 अगस्त की सुबह पॉक्सो के तहत मामला दर्ज किया और सरकारी अस्पताल में लड़कियों की मेडिकल जांच कराई। कुछ ही देर में आरोपी की गिरफ्तारी कर ली गई। 

स्कूल ने प्रिंसिपल को निलंबित किया
घटना के कई दिन बाद 19 अगस्त को स्कूल प्रशासन सक्रिय हुआ और कार्रवाई करते हुए प्रिंसिपल को निलंबित कर दिया। इसके साथ ही क्लास टीचर और एक महिला कमर्चारी को बर्खास्त कर दिया और सफाईकर्मियों को मुहैया कराने वाली एजेंसी के साथ अनुबंध समाप्त कर दिया। स्कूल ने सभी अभिभावकों से सार्वजनिक रूप से माफी भी मांगी।

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