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Maharashtra: 'किसी भी तरह की ढिलाई नहीं कर सकते स्वीकार', आग लगने की घटनाओं पर शिंदे सरकार को HC की कड़ी फटकार

Wed, 06 Dec 2023 02:52 PM IST
काव्या मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: काव्या मिश्रा Updated Wed, 06 Dec 2023 02:52 PM IST
सार

मुख्य न्यायाधीशडीके उपाध्याय और न्यायमूर्ति आरिफ डॉक्टर की खंडपीठ ने कहा कि यह मुद्दा बहुत ज्यादा गंभीर है। इसलिए इस मामले में किसी भी तरह की ढिलाई को स्वीकार नहीं किया जा सकता।

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Bombay High Court Slams Maharashtra Govt Over Rising Fire Cases In Mumbai
बॉम्बे हाईकोर्ट - फोटो : ANI

विस्तार

बॉम्बे हाईकोर्ट ने बुधवार को अग्नि सुरक्षा नियमों को ताक पर रखने के लिए महाराष्ट्र सरकार को कड़ी फटकार लगाई। उसने कहा कि हर दूसरे दिन मुंबई में आग लगने की कोई न कोई घटना होती है, जिसमें मासूम लोगों की जान चली जाती है।

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 यह मुद्दा बहुत ज्यादा गंभीर
मुख्य न्यायाधीश (सीजे) डीके उपाध्याय और न्यायमूर्ति आरिफ डॉक्टर की खंडपीठ ने कहा कि यह मुद्दा बहुत ज्यादा गंभीर है। इसलिए इस मामले में किसी भी तरह की ढिलाई को स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि आग लगने की घटनाएं लगातार बढ़ती दिख रही हैं। इस शहर में हर दूसरे दिन आग लगने की घटना होती है और लोगों की जान जाने की खबरें आती हैं। 
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यह बिल्कुल सही नहीं
बॉम्बे हाईकोर्ट ने फटकार लगाते हुए कहा कि यह अदालत का काम नहीं है कि वह सरकार को बताए कि क्या कदम उठाने की जरूरत है। सीजे उपाध्याय ने कड़े शब्दों में सरकार पर सवालों की बौछार करते हुए कहा, 'यह बिल्कुल सही नहीं है। क्या हम आपको (सरकार को) हर कार्रवाई के लिए प्रेरित करने के लिए यहां बैठे हैं? क्या यह हमारा काम है? यह सब यहां क्या हो रहा है?'
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हाल की घटनाओं का जिक्र
पीठ ने हाल ही में दक्षिण मुंबई में एक चार मंजिला आवासीय इमारत में आग लगने की घटना का भी जिक्र किया। इस हादसे में 82 वर्षीय एक महिला और उसके 60 वर्षीय बेटे की जान चली गई थी। उन्होंने कहा कि ये दो मौतें जिस तरह हुई है, क्या आप इस शहर के लोगों के लिए यही चाहते हो कि परिवार अपने प्रियजनों को खोते रहें? 

एक विशेषज्ञ समिति ने रिपोर्ट सौंपी
अतिरिक्त सरकारी वकील ज्योति चव्हाण ने अदालत को सूचित किया कि पिछले साल गठित एक विशेषज्ञ समिति ने फरवरी 2023 में अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। रिपोर्ट को विचार के लिए राज्य के शहरी विकास विभाग के समक्ष रखा गया है और विकास नियंत्रण एवं संवर्धन नियंत्रण (डीसीपीआर) 2034 में संशोधन के लिए कदम उठाए जाएंगे।

अब दिसंबर आ गया
पीठ ने कहा कि रिपोर्ट फरवरी में सौंपी गई थी और अब दिसंबर आ गया है। अबतक कोई कदम नहीं उठाया गया है। सरकार क्या कर रही है? किसी भी तरह की ढिलाई को स्वीकार नहीं किया जा सकता। अदालत ने शहरी विकास विभाग के प्रधान सचिव को निर्देश दिया कि वह शुक्रवार को अदालत को सूचित करें कि वह इस मामले पर कितना समय लेगा।


तय समय सीमा बताने को कहा
अदालत ने प्रधान सचिव से एक तय समय सीमा बताने को कहा। बता दें, पीठ अधिवक्ता आभा सिंह द्वारा 2019 में दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें संवेदनशील इमारतों में अग्नि सुरक्षा के लिए 2009 के मसौदा विशेष नियमों और विनियमों को लागू करने की मांग की गई थी। 26/11 के मुंबई आतंकवादी हमलों के बाद 2009 में ये नियम जारी किए गए थे।

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