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बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा: परिवार के सदस्य का वैध जाति प्रमाणपत्र भी सामाजिक स्थिति का प्रमाण देने के लिए उपयुक्त

Mon, 04 Apr 2022 09:11 AM IST
संजीव कुमार झा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: संजीव कुमार झा Updated Mon, 04 Apr 2022 09:11 AM IST
सार

बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि परिवार के किसी सदस्य का वैध जाति प्रमाण पत्र उनके पितृसत्तात्मक रिश्तेदार की सामाजिक स्थिति के निर्णायक प्रमाण के रूप में होगा।

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Bombay High court Says Validated Caste Certificate Of Family Member use as Conclusive Proof Of Social Status
बॉम्बे हाईकोर्ट

विस्तार

बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि परिवार के किसी सदस्य का वैध जाति प्रमाण पत्र उनके पितृसत्तात्मक रिश्तेदार की सामाजिक स्थिति के निर्णायक प्रमाण के रूप में होगा। जस्टिस एसबी शुक्रे और जीए सनप की खंडपीठ ने कहा कि भारत में अधिकांश परिवार पितृसत्तात्मक परिवार के पैटर्न का पालन करते हैं और इस प्रकार सभी सदस्यों को एक ही जाति या जनजाति से संबंधित माना जाना चाहिए।

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जानें अदालत ने और क्या कहा
अदालत ने यह भी कहा कि एक दस्तावेज जो एक व्यक्ति के लिए निर्णायक सबूत के रूप में है वह किसी अन्य व्यक्ति की सामाजिक स्थिति के निर्णायक प्रमाण के रूप में भी उपयुक्त है। यदि ऐसा अन्य व्यक्ति वैधता प्रमाण पत्र रखने वाले पहले व्यक्ति का पैतृक रिश्तेदार है तो वह इस प्रमाणपत्र को सामाजिक स्थिति के प्रमाण के रूप में दे सकता है।
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जाति जांच समितियां आदेश का पालन करें: बॉम्बे हाईकोर्ट
अपने फैसले में, हाईकोर्ट ने राज्य में जाति जांच समितियों को अदालतों के आदेशों की अवहेलना नहीं करने के लिए भी आगाह किया और कहा कि यदि ऐसी कोई समिति उच्च न्यायालय के आदेशों का उल्लंघन करती पाई गई तो भविष्य में गंभीर कार्रवाई की जाएगी। अदालत ने कहा कि हम न केवल ठाणे में जांच समिति को बल्कि अन्य सभी जांच समितियों को भी उच्च न्यायालयों के आदेशों की अवहेलना करने और उच्च न्यायालयों द्वारा जारी निर्देशों का ईमानदारी से पालन करने के खिलाफ चेतावनी देते हैं। हम यह स्पष्ट करते हैं कि, भविष्य में, यदि यह हमारे संज्ञान में आता है कि इन निर्देशों का किसी भी जांच समिति द्वारा पालन नहीं किया गया है, तो यह न्यायालय किसी भी जांच समिति द्वारा किए गए उल्लंघन पर गंभीरता से विचार करेगा। 

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