फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Bombay high court reprimanded CWC on custody of child said We do not understand how you work

Bombay HC: बच्चे की कस्टडी पर सीडब्ल्यूसी को फटकार, कहा- आप कैसे काम करते हैं हमें तो समझ ही नहीं आता

Thu, 27 Jul 2023 07:37 AM IST
जलज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: जलज मिश्रा Updated Thu, 27 Jul 2023 07:37 AM IST
सार

कोर्ट ने कहा कि हमें समझ नहीं आता कि सीडब्ल्यूसी कैसे काम करती है। कैसे अपने मामलों को चला रही है। यह सिर्फ सीडब्ल्यूसी की मनमानी है, इसके अलावा कुछ और नहीं। क्या सीडब्ल्यूसी  कानून के ऊपर है।

विज्ञापन
Bombay high court reprimanded CWC on custody of child said We do not understand how you work
bombay high court

विस्तार

बॉम्बे हाईकोर्ट ने पिता द्वारा नाबालिग बच्चे की कस्टडी मांगने पर भी गोद देने के फैसले पर महाराष्ट्र बाल कल्याण समिति को फटकार लगाई। इसके साथ ही कोर्ट ने विभाग को 48 घंटे का समय भी दिया है।

विज्ञापन

यह है पूरा मामला
न्यायमूर्ति रेवती मोहिते डेरे और न्यायमूर्ति गौरी गोडसे की बेंच ने कहा कि गोद लेने की बात तभी सामने आएगी, जब माता-पिता दोनों बच्चों को छोड़ दें। बेंच ने कहा कि सीडब्ल्यूसी मनमाने ढंग से काम कर रही है। अगर 48 घंटे में आपने अपनी गलती नहीं सुधारी तो कोर्ट आदेश पारित करने के लिए बाध्य होगी। कोर्ट ने कहा कि अगर मां ने अपने बच्चे को छोड़ दिया है तो क्या पिता को अपने बच्चे की कस्टडी पाने का अधिकार नहीं है। हमें समझ नहीं आता कि सीडब्ल्यूसी कैसे काम करती है। कैसे अपने मामलों को चला रही है। यह सिर्फ सीडब्ल्यूसी की मनमानी है, इसके अलावा कुछ और नहीं। क्या सीडब्ल्यूसी  कानून के ऊपर है।

विज्ञापन

इस मामले में सुनवाई कर रही थी कोर्ट
बता दें, कोर्ट एक पिता की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। दरअसल, कुछ समय पहले याचिकाकर्ता 16 साल की एक किशोरी के साथ भाग गया था। उन्होंने शादी की और कुछ समय बाद किशोरी ने एक बच्चे को जन्म दिया। इधर किशोरी के परिवार ने युवक के खिलाफ केस दर्ज करवा दिया। पुलिस ने मामले की जांच कर आरोपी को जेल भेज दिया और किशोरी को परिवार को सौंप दिया। किशोरी जब बालिग हुई तो परिवार ने दूसरे युवक के साथ उसकी शादी करा दी और बच्चे को साथ रखने से मना कर दिया। याचिकाकर्ता जब जेल से बाहर आया तो उसने बच्चे की कस्टडी की मांग की, जिसे सीडब्ल्यूसी ने खारिज कर गोद लेने के लिए रख दिया। 

विज्ञापन
विज्ञापन

शुक्रवार को फिर से सुनवाई करेगी कोर्ट
याचिकाकर्ता के वकील आशीष दुबे का कहना है कि बच्चे को छोड़ा नहीं गया है। बच्चे अनाथ भी नहीं है, इसलिए सीडब्ल्यूसी बच्चे को किसी और को गोद नहीं दे सकती है। अतिरिक्त लोक अभियोजक प्राजक्ता शिंदे ने कहा कि सीडब्ल्यूसी आवेदन पर पुनर्विचार करेगी। हालांकि, शुक्रवार को अदालत ने अगली सुनवाई तय की है। 

शरद पवार के पोते की कंपनी के खिलाफ दर्ज केस में कार्रवाई पर लगी रोक
बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक लोक सेवक के पारित आदेश की अवज्ञा के आरोप में एनसीपी विधायक रोहित पवार की कंपनी बारामती एग्रो लि. के खिलाफ दायर एफआईआर पर आगे की कार्रवाई शुरू करने पर रोक लगा दी। रोहित एनसीपी प्रमुख शरद पवार के पोते और उपमुख्यमंत्री अजीत पवार के भतीजे हैं। कंपनी के कार्यकारी निदेशक, सुभाष गुलावे ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसमें भाजपा विधायक राम शिंदे की शिकायत के आधार पर दर्ज एफआईआर को रद्द करने की मांग की थी। शिंदे कर्जत-जामखेड निर्वाचन क्षेत्र से 2019 के विधानसभा चुनाव में रोहित पवार से हार गए थे। जस्टिस एन डब्ल्यू साम्ब्रे और जस्टिस आरएन लड्ढा की खंडपीठ ने 21 जुलाई को पारित आदेश में कहा था कि वह 11 सितंबर को याचिका पर सुनवाई करेगी। तब तक आगे की कार्यवाही पर रोक रहेगी।

 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed