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शिवाजी स्मारक पर रोक लगाने से हाईकोर्ट का इंकार, याचिकाकर्ता बोले- राज्य में हैं सूखे के हालात
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Updated Fri, 02 Nov 2018 04:05 PM IST
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chhatrapati shivaji
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सरदार पटेल की प्रतिमा का अनावरण होने के बाद अब लोगों की नजर छत्रपति शिवाजी की मूर्ति के अनावरण पर है। इसी बीच याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए बांबे हाईकोर्ट ने छात्रपत्रि शिवाजी स्मारक पर रोक लगाने से इंकार कर दिया है। बता दें की महाराष्ट्र में कई जगहों पर सूखे के हालात हैं। इस कारण लोग मूर्ति के निर्माण पर रोक लगाने की मांग कर रहे हैं।
याचिका में कहा गया था कि महाराष्ट्र में सूखे के हालात हैं। ऐसे में मूर्ति के बजाय ध्यान देने के लिए दूसरे मुद्दे भी हैं। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि इस पैसे को कहीं सही जगह लगाकर बिगड़ रही स्थिति को सुधारा जा सकता है। बिगड़ती स्थिति को देखने की बजाय सरकार 3600 करोड़ रुपए स्मारक पर खर्च कर रही हैं।
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बता दें कि देश के पहले गृहमंत्री और सरदार के नाम से मश्हूर वल्लभ भाई पटेल के सम्मान में विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा का अनावरण हो गया है। दो भारतीय कंपनियों ने मिलकर 45 महीने में स्टैच्यू ऑफ यूनिटी को तैयार किया है।
विश्व के इस सबसे ऊंची (182 मीटर) प्रतिमा को दो देशी कंपनियों ने बनाया है। इस प्रतिमा को बनाने के लिए करीब 2979 करोड़ रुपये खर्च हुए, जिसमें से अधिकांश पैसा गुजरात सरकार ने दिया है। हालांकि केंद्र सरकार ने भी इस प्रोजेक्ट के लिए मदद दी थी।
गुजरात सरकार ने इसके लिए एक ट्रस्ट का गठन भी किया था। सरदार वल्लभ भाई पटेल राष्ट्रीय एकता ट्रस्ट के जिम्मे ही पूरी निर्माण प्रक्रिया थी। देश की दिग्गज इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी लार्सन एंड टुर्बो (एलएंडटी) और सरदार सरोवर नर्मदा निगम लिमिटेड के 250 इंजीनियर और 3400 मजदूरों ने मिलकर 3 साल 9 महीने में इस प्रतिमा को तैयार किया।
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याचिका में कहा गया था कि महाराष्ट्र में सूखे के हालात हैं। ऐसे में मूर्ति के बजाय ध्यान देने के लिए दूसरे मुद्दे भी हैं। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि इस पैसे को कहीं सही जगह लगाकर बिगड़ रही स्थिति को सुधारा जा सकता है। बिगड़ती स्थिति को देखने की बजाय सरकार 3600 करोड़ रुपए स्मारक पर खर्च कर रही हैं।
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Bombay High Court has refused to give interim stay on the construction of Chhatrapati Shivaji statue in the Arabian Sea near Mumbai. #Maharashtra
— ANI (@ANI) November 2, 2018
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बता दें कि देश के पहले गृहमंत्री और सरदार के नाम से मश्हूर वल्लभ भाई पटेल के सम्मान में विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा का अनावरण हो गया है। दो भारतीय कंपनियों ने मिलकर 45 महीने में स्टैच्यू ऑफ यूनिटी को तैयार किया है।
विश्व के इस सबसे ऊंची (182 मीटर) प्रतिमा को दो देशी कंपनियों ने बनाया है। इस प्रतिमा को बनाने के लिए करीब 2979 करोड़ रुपये खर्च हुए, जिसमें से अधिकांश पैसा गुजरात सरकार ने दिया है। हालांकि केंद्र सरकार ने भी इस प्रोजेक्ट के लिए मदद दी थी।
गुजरात सरकार ने इसके लिए एक ट्रस्ट का गठन भी किया था। सरदार वल्लभ भाई पटेल राष्ट्रीय एकता ट्रस्ट के जिम्मे ही पूरी निर्माण प्रक्रिया थी। देश की दिग्गज इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी लार्सन एंड टुर्बो (एलएंडटी) और सरदार सरोवर नर्मदा निगम लिमिटेड के 250 इंजीनियर और 3400 मजदूरों ने मिलकर 3 साल 9 महीने में इस प्रतिमा को तैयार किया।