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High Court: कानून का शासन है या बाहुबल का? अवैध निर्माण को लेकर उच्च न्यायालय की तीखी टिप्पणी

Sun, 20 Apr 2025 02:14 PM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: नितिन गौतम Updated Sun, 20 Apr 2025 02:14 PM IST
सार

पीठ ने कहा कि अधिकारी अपने वैध कर्तव्यों का पालन करते हुए पर्याप्त पुलिस सुरक्षा पाने के हकदार हैं और अवैध कार्यों को रोकना और कानून का शासन स्थापित करना अधिकारियों का कर्तव्य है।

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bombay high court on illigal construction said Rule of law prevails or rule of muscle power
बंबई उच्च न्यायालय - फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

महाराष्ट्र के नवी मुंबई में एक प्लॉट पर बने अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई न किए जाने पर बॉम्बे उच्च न्यायालय ने कड़ी नाराजगी जाहिर की है। उच्च न्यायालय ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि राज्य में कानून का शासन है या बाहुबल का? इसके साथ ही अवैध निर्माण न हटा पाने के लिए उच्च न्यायालय ने महाराष्ट्र की शहर योजना एजेंसी सिडको को लताड़ लगाई। 
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अदालत ने सिडको के कामकाज पर उठाए सवाल
जस्टिस एएस गडकरी और जस्टिस कमल की खंडपीठ ने इस महीने की शुरुआत में पारित आदेश में कहा कि सिटी एंड इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (सिडको) के अधिकारी अवैध निर्माणों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के इच्छुक नहीं हैं। सिडको ने अदालत को बताया कि जब उन्होंने अवैध निर्माणों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू करने की कोशिश की, तो उन्हें बोकाडवीरा गांव के सरपंच ने धमकाया। इसके बाद पीठ ने कहा कि अधिकारी अपने वैध कर्तव्यों का पालन करते हुए पर्याप्त पुलिस सुरक्षा पाने के हकदार हैं और अवैध कार्यों को रोकना और कानून का शासन स्थापित करना अधिकारियों का कर्तव्य है। हाईकोर्ट ने कहा, 'हम ये नहीं समझ पा रहे हैं कि हम ऐसे राज्य में रहते हैं, जहां कानून का शासन है या बाहुबल का शासन है।'
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एक सप्ताह में कार्रवाई करने का दिया आदेश
अदालत ने कहा कि बोकाडवीरा गांव के सरपंच द्वारा दी गई धमकियों को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता, क्योंकि CIDCO के अधिकारी अपने कर्तव्यों का पालन कर रहे हैं। अदालत साल 2016 में एक दंपति द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही है। याचिका में मुंबई में उनकी जमीन पर बने अवैध निर्माण को हटाने के लिए सिडको को निर्देश देने की मांग की गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि उनकी 123 वर्ग मीटर जमीन पर अवैध दुकानों का निर्माण किया गया है। अदालत ने सिडको को अवैध ढांचा हटाने के लिए एक सप्ताह का समय दिया है। साथ ही सिडको अधिकारियों को सुरक्षा देने के लिए मुंबई पुलिस आयुक्त को निर्देश दिया है। 

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