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Bombay High Court: 'जंगली हाथी ओमकार को पकड़कर अस्थायी रूप से गुजरात के वनतारा भेजें'; कोल्हापुर पीठ का आदेश
Mon, 17 Nov 2025 05:30 PM IST
ज्योति भास्कर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई।
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Mon, 17 Nov 2025 05:30 PM IST
सार
बॉम्बे हाईकोर्ट ने जंगली हाथी ओमकार को पकड़ने और उसे गुजरात के वनतारा में अस्थायी रूप से स्थानांतरित करने की अपील स्वीकार कर ली है। एक याचिका पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की कोल्हापुर पीठ में दो जजों की बेंच ने जरूरी अनुमति दे दी। जानिए क्या है पूरा मामला
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गुजरात के वनतारा से जुड़े मुकदमे में बॉम्बे हाईकोर्ट की कोल्हापुर पीठ ने सुनाया अहम फैसला (सांकेतिक फोटो)
- फोटो : एएनआई
विस्तार
बॉम्बे हाईकोर्ट ने जंगली हाथी ओमकार को पकड़ने के बाद अस्थायी रूप से गुजरात के वनतारा भेजने की अपील को स्वीकार कर लिया। उच्च न्यायालय की कोल्हापुर पीठ में न्यायमूर्ति एमएस कार्णिक और न्यायमूर्ति अजीत कडेथांकर की पीठ ने पिछले सप्ताह पारित आदेश में कहा कि हाथी को पकड़ने का काम जरूरी सावधानियों के साथ किया जाएगा।
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न्यूनतम मानवीय हस्तक्षेप के साथ ओमकार की देखभाल
हाईकोर्ट की खंडपीठ ने कहा, यह सुनिश्चित किया जाएगा कि इस प्रक्रिया के दौरान ओमकार को कोई नुकसान न पहुंचे। वनतारा न्यूनतम मानवीय हस्तक्षेप के साथ ओमकार की देखभाल और प्रशिक्षण की देखरेख करेगा। हाईकोर्ट ने यह आदेश रोहित कांबले की ओर से दायर जनहित याचिका पर पारित किया।
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कर्नाटक से महाराष्ट्र पहुंचा जंगली हाथी ओमकार
अपने झुंड से भटक कर मानव बस्तियों में पहुंचे हाथी ओमकार के मामले में दायर याचिका में उसके संरक्षण और कल्याण पर चिंता जताई गई थी। रोहित कांबले ने राज्य वन विभाग की ओर से जारी ओमकार को वनतारा में स्थानांतरित करने संबंधी आदेश को चुनौती दी थी। उन्होंने अपनी दलील में कहा कि यह जगह जंगली हाथी के लिए उपयुक्त नहीं होगी। हाथी प्राकृतिक प्रवास के तहत कर्नाटक से महाराष्ट्र आ गया था, जिसके बाद वह अपने झुंड से भटक गया।
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गुजरात के वनतारा ट्रस्ट ने इंतजाम का भरोसा दिलाया
राज्य सरकार के वन विभाग ने सुनवाई के दौरान कहा, सिंधुदुर्ग और कोल्हापुर जिलों में घूम रहे ओमकार को पकड़ना इसलिए जरूरी था क्योंकि यह हाथी न केवल अपने लिए, बल्कि मानव जीवन और संपत्तियों के लिए भी खतरा पैदा कर रहा था। विभाग ने कहा, गुजरात का राधा कृष्ण मंदिर हाथी कल्याण ट्रस्ट (वनतारा) ने कहा है कि वह ओमकार को अपने यहां रखने, उसके आश्रय, प्रशिक्षण और पुनर्वास का इंतजाम करने का इच्छुक है। विभाग ने कोर्ट को बताया कि ओमकारा को अस्थायी तौर पर गुजरात भेजा जाएगा। सुप्रीम कोर्ट की तरफ से गठित एक उच्चाधिकार प्राप्त समिति ओमकार के लिए दीर्घकालिक योजना पर अपनी सिफारिशें भी बताएगी।
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पीआईएल में सरकार का विरोध, याचिकाकर्ता की दलीलों में कितना दम?
कांबले ने ओमकार को वनतारा में स्थानांतरित करने का विरोध करते हुए कहा, हाथी को महाराष्ट्र से गुजरात स्थानांतरित करने से उसकी प्राकृतिक प्रवृत्तियां खत्म हो जाएंगी। वन विभाग का विरोध करते हुए कांबले ने अपनी दलील में कहा, देश का कोई भी कानून वन्यजीवों को किसी निजी संस्था को सौंपने/हस्तांतरित करने की अनुमति नहीं देता। उन्होंने तर्क दिया कि वनतारा मुख्य रूप से बंदी और बंधुआ हाथियों को आश्रय देता है, जंगली हाथियों को नहीं। उन्होंने कहा कि कोल्हापुर के राधानगरी वन्यजीव अभयारण्य या कोल्हापुर के पास ही किसी अन्य प्राकृतिक आवास में ओमकारा के पुनर्वास का इंतजाम कराया जाना चाहिए।
ओमकार की आयु लगभग 10 वर्ष होने के कारण उसे जंगल में छोड़ना संभव नहीं
कांबले की जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान तमाम दलीलों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा, ओमकार कई बार नुकसान पहुंचा चुका है। अप्रैल में सिंधुदुर्ग जिले के डोडामार्ग में यह आक्रामक हो गया और एक व्यक्ति की जान ले ली। नवंबर में एक 'दुर्भाग्यपूर्ण और अमानवीय' घटना भी घटी, जिसमें कुछ लोगों ने ओमकार पर शक्तिशाली पटाखे फेंके थे। वन विभाग के अनुसार, इस समय ओमकार की आयु लगभग 10 वर्ष होने के कारण उसे जंगल में छोड़ना संभव नहीं होगा क्योंकि यह अपनी देखभाल स्वयं नहीं कर पाएगा।
हाथियों को भारत में संकटग्रस्त श्रेणी में रखा गया
उच्च न्यायालय ने कहा कि हाथी पारिस्थितिकी को संतुलित रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। उनकी गतिविधियां उनके निवास स्थान से जुड़ी होती हैं। न्यायमूर्ति एमएस कार्णिक और न्यायमूर्ति अजीत कडेथांकर की पीठ ने कहा, 'हाथियों को भारत में संकटग्रस्त श्रेणी में रखा गया है। इससे उनके सामने मौजूद गंभीर खतरों का पता लगता है।' कोर्ट ने कहा, भारत में हाथियों की आबादी, मानव-हाथी संघर्ष के कारण लगातार दबाव में है। ऐसे में वन पारिस्थितिकी के अस्तित्व और संतुलन को सुनिश्चित करने के लिए हाथी की प्रजातियों की रक्षा बेहद अहम है।
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हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा, ओमकार की उम्र को देखते हुए उसे झुंड में रखना और अन्य हाथियों के साथ उसका मेलजोल बढ़ाना जरूरी है। वन विभाग ने साफ किया है कि ओमकार का वनतारा में स्थानांतरण अस्थायी होगा। दीर्घकालिक प्रबंधन पर अंतिम निर्णय बाद में लिया जाएगा। इसके लिए एक उच्चाधिकार प्राप्त समिति की सिफारिशों पर विचार के बाद ही निर्णय लिया जाएगा।
खंडपीठ ने राज्य सरकार के वन विभाग से तीन दिनों के भीतर जवाब मांगा। हाईकोर्ट ने कहा, ओमकार के अस्थायी स्थानांतरण के संबंध में एक प्रस्ताव और दीर्घकालिक योजना तीन दिन के भीतर समिति के सामने प्रस्तुत किया जाए। समिति इस मुद्दे की जांच करेगी और दो सप्ताह के भीतर आवश्यक सिफारिशें करेगी।