फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Bombay high court granted parole to a man farewell to his son

HC: 'दुख में पैरोल दे सकते हैं तो खुशी में क्यों नहीं', बेटे को विदेश भेजने के लिए शख्स को हाईकोर्ट ने दी राहत

Sat, 13 Jul 2024 10:22 AM IST
बशु जैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: बशु जैन Updated Sat, 13 Jul 2024 10:22 AM IST
सार

हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे  विवेक श्रीवास्तव ने आस्ट्रेलिया के एक विवि में पढ़ने जा रहे अपने बेटे की पढ़ाई और अन्य खर्चों के लिए 36 लाख रुपये का इंतजाम करने और उसकी विदाई के लिए एक महीने की पैरोल देने की मांग की थी।

विज्ञापन
Bombay high court granted parole to a man farewell to his son
Bombay High court - फोटो : ANI

विस्तार

बाम्बे हाईकोर्ट ने हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे एक पिता को आस्ट्रेलिया पढ़ने जा रहे बेटे की विदाई के लिए 10 दिन की पैरोल को मंजूरी दी। कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि जब दुख व्यक्त करने के लिए पैरोल दी जा सकती है, तो खुशी के मौके पर भी ऐसा किया जा सकता है। कोर्ट ने यह भी कहा कि ऐसे दोषी जो किसी के पिता, बेटे, भाई या पति हैं, उनको कुछ समय के सशर्त रिहाई की अनुमति दी जा सकती है। ताकि वे बाहरी दुनिया के संपर्क में रहें और अपने परिवार की जरूरतों को पूरा कर सकें। 

विज्ञापन


नौ जुलाई को जस्टिस भारती डेंगरे और मंजूषा देशपांडे की पीठ ने हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे विवेक श्रीवास्तव की याचिका पर सुनवाई करते हुए पैरोल मंजूर की। पीठ ने इसे दोषियों के प्रति मानवतावादी दृष्टिकोण बताया। विवेक श्रीवास्तव ने आस्ट्रेलिया के एक विवि में पढ़ने जा रहे अपने बेटे की पढ़ाई और अन्य खर्चों के लिए 36 लाख रुपये का इंतजाम करने और उसकी विदाई के लिए एक महीने की पैरोल देने की मांग की थी। मामले में अभियोजन पक्ष ने विरोध जताते हुए कहा कि पैरोल केवल आपातकालीन परिस्थितियों में ही दी जा सकती है। बेटे की पढ़ाई के लिए धन का इंतजाम करने और उसको विदा करने के लिए पैरोल नहीं दी जा सकती। हाईकोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष तर्क समझ से परे है। 
विज्ञापन


कोर्ट ने कहा कि यदि शादी के लिए पैरोल दी जा सकती है तो मौजूदा मामले में तो एक पिता को अपने बेटे की जरूरत को पूरा करना है। कोर्ट ने टिप्पणी की- दुख और खुशी एक भावना है। जब दुख व्यक्त करने के लिए पैरोल मंजूर हो सकती है तो खुशी के मौके पर भी ऐसा किया जाना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि अगर एक पिता पढ़ाई के लिए खर्च का इंतजाम नहीं कर पाता है तो उसका बेटा अच्छी पढ़ाई का मौका खो सकता है। विवेक श्रीवास्तव 2012 में हुई एक हत्या के मामले में सजा काट रहे हैं। 2018 में उनको आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। विवेक ने 2019 में सजा के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। 

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed