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HC: इंडियन टेलीग्राफ एक्ट की संवैधानिकता को चुनौती, याचिकाकर्ता का दावा- कंपनियां गलत इस्तेमाल कर रहीं

Mon, 18 Dec 2023 11:50 AM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पणजी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पणजी Published by: नितिन गौतम Updated Mon, 18 Dec 2023 11:50 AM IST
सार

याचिकाकर्ता ने उसकी जमीन पर बिजली के खंभे लगाने और अन्य सहायक काम को चुनौती दी है। याचिकाकर्ता का कहना है कि इससे उसकी खेती और हॉर्टिकल्चर को नुकसान पहुंच रहा है।

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bombay high court goa bench dispose plea against telegraph act constitutional validity
Bombay High Court - फोटो : PTI (File)

विस्तार

गोवा के एक निवासी ने गोवा सरकार द्वारा गोवा तमनार ट्रांसमिशन प्रोजेक्ट के तहत लगाए जा रहे बिजली के खंभों और इलेक्ट्रिक लाइन बिछाने के खिलाफ याचिका दायर की थी। बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा पीठ ने याचिका खारिज कर दी है। खंडपीठ के जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस वाल्मिकी एस मेनजेस ने याचिका खारिज कर दी और याचिकाकर्ता को मजिस्ट्रेट कोर्ट जाने को कहा है। बता दें कि गोवा तमनार ट्रांसमिशन प्रोजेक्ट लिमिटेड, गोवा सरकार की अंतर प्रादेशिक ट्रांसमिशन सिस्टम परियोजना है, जिसके तहत गोवा सरकार राज्य में बिजली के अतिरिक्त स्त्रोत बनाने की योजना पर काम कर रही है। 
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याचिका में टेलीग्राफ एक्ट को दी गई थी चुनौती
याचिकाकर्ता ने उसकी जमीन पर बिजली के खंभे लगाने और अन्य सहायक काम को चुनौती दी है। याचिकाकर्ता का कहना है कि इससे उसकी खेती और हॉर्टिकल्चर को नुकसान पहुंच रहा है। याचिकाकर्ता ने जीटीटीपीएल के तहत कराए जा रहे काम पर रोक की मांग की है। साथ ही याचिका में इंडियन टेलीग्राफ एक्ट की संवैधानिकता को भी चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता ने ये भी कहा कि जब साल 1885 में टेलीग्राफ एक्ट लागू किया गया था, उस वक्त लकड़ी के खंभे लगते थे लेकिन अब कंपनियां कानून का दुरुपयोग कर बड़े मैटेलिक खंभे लगा रही हैं, जो 200 वर्ग मीटर का इलाका घेरते हैं और इसके चलते इतनी जमीन किसी काम की नहीं रहती। इसी कानून के तहत जीटीटीपीएल का काम कराया जा रहा है। बता दें कि टेलीग्राफ अथॉरिटी ही देश में बिजली की लाइनें, खंभे और पोस्ट लगाने और उनकी देखरेख का काम करती है। 
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सरकार के वकील बोले- मजिस्ट्रेट कोर्ट ने मुआवजे का दिया है निर्देश
सरकार की ओर से एडवोकेट जनरल डी पनगम हाईकोर्ट में पेश हुए। उन्होंने हाईकोर्ट को बताया कि इस संबंध में मजिस्ट्रेट कोर्ट ने हाल ही में मुआवजा देने  संबंधी निर्देश दिया है। वहीं हाईकोर्ट ने इंडियन टेलीग्राफ एक्ट की संवैधानिकता के मुद्दे पर कोई आदेश नहीं दिया। बता दें कि याचिकाकर्ता का कहना है कि उसकी जमीन जिस इलाके में आती है, वह इको सेंसिटिव जोन है और वहां निर्माण कार्यों और अन्य वजहों से पानी का प्राकृतिक बहाव बाधित हो रहा है।  
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