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बॉम्बे हाईकोर्ट: मनगढ़ंत खबरों की आड़ में जज को पद से हटाने की साजिश, तीन वकीलों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई

Thu, 01 Feb 2024 08:53 PM IST
ज्योति भास्कर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: ज्योति भास्कर Updated Thu, 01 Feb 2024 08:53 PM IST
सार

बॉम्बे हाईकोर्ट ने तीन वकीलों के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू की है। वकीलों पर आरोप है कि इन्होंने मनगढ़ंत और झूठी खबरों के आधार पर जज को निशाना बनाने का प्रयास किया। जज को पद से हटाने का प्रयास करने के आरोपी वकीलों के खिलाफ अदालत ने अवमानना की कार्यवाही शुरू कर दी है।

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Bombay High Court Contempt Three Lawyers Targeting Judge fabricated news reports
बंबई उच्च न्यायालय (फाइल) - फोटो : पीटीआई

विस्तार

बॉम्बे हाईकोर्ट ने तीन वकीलों के खिलाफ अवमानना याचिका पर कार्रवाई शुरू करने का फैसला लिया है। इन वकीलों पर आरोप है कि इन्होंने झूठी खबरों के आधार पर जज को पद से हटाने की साजिश की। रिपोर्ट के मुताबिक जज के खिलाफ गलत खबरें चलाने के आरोपी तीनों वकीलों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई होगी। अदालत ने स्वत: संज्ञान लेकर इस मामले पर अवमानना की कार्यवाही शुरू की है। मामला उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को उनके मामले की सुनवाई से अलग होने के लिए मजबूर करने का है। तीनों वकील जज को पूर्वाग्रह से ग्रसित साबित करने के लिए मनगढ़ंत सबूत लेकर आए थे।
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अवमानना की कार्यवाही शुरू; अदालत ने नाराजगी भी
जस्टिस अनुजा प्रभुदेसाई और न्यायमूर्ति एनआर बोरकर ने इस संबंध में 29 जनवरी को आदेश पारित किया। हाईकोर्ट की खंडपीठ ने कहा, जानबूझकर किया गया, गलत नीयत से प्रेरित और अवमाननापूर्ण कृत्य न्यायपालिका की छवि खराब करता है। ऐसी हरकतों से न्याय देने का सिस्टम खराब होता है। इससे न्यायालय की गरिमा कम होती है। अमर मूलचंदानी बनाम प्रवर्तन निदेशालय (ED) के इस मुकदमे में हाईकोर्ट की खंडपीठ वकीलों की तरफ से दी गई स्पष्टीकरण से संतुष्ट नहीं थी। अवमानना की कार्यवाही शुरू करते हुए अदालत ने नाराजगी भी प्रकट की। कोर्ट ने कहा कि वकील अपने मुवक्किल का मुखपत्र नहीं होता। न्यायाधीश और अदालत जैसी संस्था को बदनाम करने के लिए एक पेशेवर के रूप में वह मुवक्किल से हाथ नहीं मिला सकता।
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अखबार के प्रकाशक और संपादक से पूछताछ
अदालत ने नोट किया कि एक युवा वकील होने की आड़ में न्यायिक प्रणाली को प्रदूषित करने का लाइसेंस नहीं मिल जाता। खंडपीठ ने वकील को बताया कि एक न्यायिक अधिकारी के रूप में वकील की जिम्मेदारी है कि वह मुवक्किल को आधारहीन और अनुचित टिप्पणी से बचने की सलाह दें। 25 पन्नों के अपने आदेश में बॉम्बे हाईकोर्ट की पीठ ने कहा कि अदालत के समक्ष दायर माफीनामा स्वीकार नहीं किया जाएगा। अदालत ने स्थानीय पुलिस आयुक्त को अखबार के प्रकाशक और संपादक से पूछताछ करने का निर्देश भी दिया।
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400 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जूनियर वकील का हस्तक्षेप
पूरा विवाद जूनियर वकील जोहेब मर्चेंट की तरफ से दाखिल समाचार क्लिपिंग के कारण उपजा। मर्चेंट के मुवक्किल भीष्म पाहुजा ने मूल याचिकाकर्ता- अमर मूलचंदानी की तरफ से दायर याचिका में हस्तक्षेप किया था। पाहुजा भी वकील हैं। मूलचंदानी पर 400 करोड़ रुपए से अधिक की मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया गया था। मूलचंदानी अपने खिलाफ दर्ज मामले को रद्द करने की अपील के साथ उच्च न्यायालय पहुंचे थे।


कहां से उपजा विवाद
मर्चेंट ने जो विवादित और मनगढ़ंत समाचार क्लिपिंग लगाई उसमें उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति नितिन साम्ब्रे को याचिकाकर्ता मूलचंदानी का दोस्त बताया गया। इस आधार पर रिपोर्ट में कहा गया कि अदालत से जमानत मिलने की पूरी संभावना है। नवंबर, 2023 में जस्टिस साम्ब्रे के सामने आई इस रिपोर्ट के बाद विवाद ने तूल पकड़ा। उन्होंने मर्चेंट से स्पष्टीकरण मांगते हुए हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। मर्चेंट और उनके सीनियर वकील मीनल चंदनानी ने अदालत में अविश्वास से इनकार करते हुए माफी मांगी लेकिन अदालत ने दोनों वकीलों की प्रामाणिकता का परीक्षण करने की बात कही और सुनवाई अगली तारीख के लिए स्थगित कर दी।
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