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Bombay HC: 'हिंदुओं में शादी का पवित्र रिश्ता जोड़ों के बीच मामूली विवादों के कारण संकट में'; अदालत चिंतित

Tue, 15 Jul 2025 06:44 AM IST
शिव शुक्ला अमर उजाला नेटवर्क, मुंबई
अमर उजाला नेटवर्क, मुंबई Published by: शिव शुक्ला Updated Tue, 15 Jul 2025 06:44 AM IST
सार

बॉम्बे हाईकोर्ट ने हिंदुओं में शादी जैसे पवित्र रिश्ते के टूटने पर चिंता जताई है। पीठ ने कहा कि शादी महज सामाजिक बंधन नहीं है बल्कि एक आध्यात्मिक मिलन है, जो दो आत्माओं को एक साथ बांधती है। कोर्ट ने कहा कि वैवाहिक संबंधों को बेहतर बनाने के इरादे से कई अधिनियम बनाए गए पर लोग अक्सर उनका दुरुपयोग करते हैं।

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Bombay HC said sacred relationship of marriage among Hindus is in danger due to minor disputes between couples
बॉम्बे हाईकोर्ट - फोटो : एएनआई

विस्तार

बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक व्यक्ति और उसके परिवार के खिलाफ दायर दहेज उत्पीड़न के मामले को खारिज करते हुए कहा, हिंदुओं में पवित्र माना जाने वाला शादी का रिश्ता अब जोड़ों के बीच मामूली विवादों के कारण खतरे में है। जस्टिस नितिन साम्ब्रे व जस्टिस एमएम नेर्लिकर की नागपुर पीठ ने आदेश में कहा कि वैवाहिक विवादों में अगर जोड़ों का फिर से एक होना संभव नहीं है, तो शादी तत्काल समाप्त कर दी जानी चाहिए, ताकि इसमें शामिल पक्षों का जीवन बर्बाद न हो।

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याचिकाकर्ता ने अलग रह रही पत्नी की ओर से दिसंबर 2023 में उसके और उसके परिवार पर दर्ज कराए गए दहेज उत्पीड़न के मामले को रद्द करने का कोर्ट सेअनुरोध किया था। दंपती ने कोर्ट को सूचित किया कि उन्हें आपसी सहमति से तलाक मिल गया है। महिला ने कहा कि अगर मामला रद्द कर दिया जाता है, तो उसे आपत्ति नहीं होगी। पीठ ने मामले को खारिज करते हुए कहा, हालांकि आईपीसी व दहेज निषेध अधिनियम के दहेज उत्पीड़न और अप्राकृतिक यौन संबंध से जुड़े प्रावधान समझौता योग्य नहीं हैं, फिर भी न्याय के उद्देश्यों को सुरक्षित करने के लिए अदालतें कार्यवाही को रद्द कर सकती हैं।  
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शादी महज सामाजिक बंधन नहीं, यह आध्यात्मिक मिलन
पीठ ने कहा कि शादी महज सामाजिक बंधन नहीं है बल्कि एक आध्यात्मिक मिलन है, जो दो आत्माओं को एक साथ बांधती है। कोर्ट ने कहा कि वैवाहिक संबंधों को बेहतर बनाने के इरादे से कई अधिनियम बनाए गए पर लोग अक्सर उनका दुरुपयोग करते हैं, जिसके परिणामस्वरूप मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न, अंतहीन संघर्ष, वित्तीय नुकसान और परिवार के सदस्यों व बच्चों को अपूरणीय क्षति होती है।

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