बॉम्बे हाई कोर्ट: गिरफ्तारी और जमानत के बाद भी जारी की एलओसी, केंद्रीय एजेंसियों को लगी फटकार
पीठ यस बैंक के संस्थापक राणा कपूर की बेटी रोशनी कपूर द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें सीबीआई द्वारा उनके खिलाफ जारी एलओसी को चुनौती दी गई थी।
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बॉम्बे हाई कोर्ट ने बुधवार को किसी की गिरफ्तारी और जमानत दिए जाने के बाद भी लुक आउट सर्कुलर (एलओसी) जारी करने पर केंद्रीय एजेंसियों को फटकार लगाई और पूछा कि क्या वे संसद से ऊपर हैं। न्यायमूर्ति ए एस गडकरी और न्यायमूर्ति एम एन जाधव की खंडपीठ ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) दोनों से उस कानून के बारे में पूछताछ की जिसके तहत आरोपी को सुप्रीम कोर्ट द्वारा जमानत दिए जाने के बाद भी एलओसी जारी किया गया था। एक बार जमानत मिल जाने के बाद आरोपी उस अदालत की हिरासत में होता है जिसने जमानत दी है। आप (एजेंसी) इस तरह के न्यायिक आदेशों का उल्लंघन कैसे कर सकते हैं? क्या आप संसद से ऊपर हैं? आप अब संसद, अदालत से आगे निकल रहे हैं।
यस बैंक के संस्थापक राणा कपूर की बेटी रोशनी कपूर की याचिका
पीठ यस बैंक के संस्थापक राणा कपूर की बेटी रोशनी कपूर द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें सीबीआई द्वारा उनके खिलाफ जारी एलओसी को चुनौती दी गई थी। रोशनी कपूर दो अलग-अलग मामलों में आरोपी हैं। एक कथित भ्रष्टाचार के लिए जिसकी सीबीआई जांच कर रही है और दूसरा ईडी द्वारा डीएचएफएल मामले के संबंध में मनी लॉन्ड्रिंग के लिए। उन्हें गिरफ्तार किया गया था और बाद में अक्टूबर 2021 में शीर्ष अदालत ने जमानत दे दी थी। अपनी याचिका में रोशनी कपूर ने कहा कि एक व्यक्ति के खिलाफ एलओसी जारी रखना जिसे पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है और जमानत दी गई है, कानून का उल्लंघन करता है।
सीबीआई की ओर से पेश अधिवक्ता हितेन वेनेगांवकर ने उच्च न्यायालय को बताया कि आरोपी को जमानत मिलने के बाद भी एलओसी लंबित रखी गई ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वह फरार न हो जाए। पीठ ने जानना चाहा कि गिरफ्तार किए गए व्यक्ति के खिलाफ एलओसी कैसे जारी किया जा सकता है। लुकआउट नोटिस सिर्फ फरार आरोपियों के लिए है। एक बार जब आरोपी गिरफ्तार हो जाता है तो लुकआउट नोटिस खत्म हो जाना चाहिए। याचिका के मुताबिक, विशेष अदालत से अनुमति मिलने के बावजूद रोशनी कपूर इस साल लंदन की यात्रा नहीं कर सकीं।
अदालत ने कहा कि एलओसी जारी करने के पीछे का उद्देश्य किसी आरोपी को कानून की उचित प्रक्रिया के बिना देश से भागने से रोकना है। पीठ ने कहा, लेकिन यहां जमानत की शर्तें हैं। वे (एजेंसियां) महाशक्ति नहीं हो सकतीं और कानून से ऊपर नहीं जा सकतीं। जमानत देते समय अदालत द्वारा लगाई गई शर्तों में से एक यह थी कि आरोपी देश नहीं छोड़ेगा।