{"_id":"65e06dc9ec4e05892d0b1863","slug":"bombay-hc-dismisses-cbi-plea-seeking-stay-on-release-of-web-series-on-indrani-mukerjea-sheena-bora-murder-2024-02-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"Indrani Mukerjea Series: इंद्राणी मुखर्जी पर बनी वेब सीरीज की रिलीज का रास्ता साफ, CBI की याचिका खारिज","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
Indrani Mukerjea Series: इंद्राणी मुखर्जी पर बनी वेब सीरीज की रिलीज का रास्ता साफ, CBI की याचिका खारिज
Thu, 29 Feb 2024 05:13 PM IST
गुलाम अहमद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: गुलाम अहमद
Updated Thu, 29 Feb 2024 05:13 PM IST
सार
सीबीआई की याचिका खारिज होने से वेब-सीरीज को ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज करने का रास्ता साफ हो गया है।
विज्ञापन
बॉम्बे हाईकोर्ट
- फोटो : सोशल मीडिया
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
बॉम्बे हाईकोर्ट ने गुरुवार को मुंबई के बहुचर्चित शीना बोरा हत्याकांड और इंद्राणी मुखर्जी पर आधारित वेब-सीरीज की रिलीज पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। सीबीआई की याचिका खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि शीना बोरा की हत्या की आरोपी इंद्राणी मुखर्जी पर आधारित नेटफ्लिक्स बेव-सीरीज में अभियोजन पक्ष (सीबीआई) के खिलाफ कोई बात नहीं मिली है। अदालत के इस फैसले से सीरीज को ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज करने का रास्ता साफ हो गया है।
विज्ञापन
जस्टिस रेवती मोहिते डेरे और जस्टिस मंजूषा देशपांडे की खंडपीठ ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। सीबीआई ने शीना बोरा हत्याकांड की सुनवाई पूरी होने तक वेब-सीरीज की रिलीज पर रोक लगाने की मांग की थी। पीठ ने कहा कि उसने सीरीज देखी है, लेकिन इसमें ऐसा कुछ भी नहीं मिला, जिससे मुकदमे या अभियोजन पक्ष पर विपरीत प्रभाव पड़े।
विज्ञापन
'द इंद्राणी मुखर्जी स्टोरी: द बरीड ट्रुथ' नाम की वेब-सीरीज का प्रीमियर 23 फरवरी को स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स पर होने वाला था। लेकिन सीबीआई की याचिका पर हाईकोर्ट ने पिछले हफ्ते नेटफ्लिक्स को सीबीआई अधिकारियों और वकीलों के लिए सीरीज की स्पेशल स्क्रीनिंग आयोजित करने का निर्देश दिया था। नेटफ्लिक्स ने अदालत को सूचित किया था कि वह गुरुवार (29 फरवरी) तक सीरीज की स्ट्रीमिंग नहीं करेगा।
विज्ञापन
सीबीआई ने दी यह दलील
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल देवांग व्यास गुरुवार को सीबीआई की ओर से अदालत में पेश हुए। उन्होंने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि यह सीरीज न्याय और निष्पक्ष सुनवाई के तंत्र को प्रभावित करती है। उन्होंने दावा किया कि इस सीरीज से आम लोगों के बीच एक अलग धारणा बन सकती है, जो न्यायिक विचार को प्रभावित करेगी। इस पर खंडपीठ ने कहा, हमने भी सीरीज देखी। इसमें ऐसा कुछ भी नहीं है जो अभियोजन पक्ष या मुकदमे के खिलाफ जाता हो। हमने इसे हर तरह से देखने की कोशिश की, लेकिन ईमानदारी से कहें तो हमें कुछ नहीं मिला।
मीडिया ट्रायल नई बात नहीं...
अदालत ने कहा कि सीरीज में जिन गवाहों के साक्षात्कार को शामिल किया गया है, उनमें से किसी ने भी अभियोजन पक्ष के खिलाफ एक भी शब्द नहीं कहा है। हाईकोर्ट ने कहा, हमें ज्यादा बात नहीं करनी चाहिए क्योंकि सीरीज अभी रिलीज होनी है। हमें बताएं कि किस गवाह ने अभियोजन पक्ष के खिलाफ बात कही है? हकीकत में यह अभियोजन पक्ष के समर्थन में है। अदालत ने आगे कहा कि मीडिया ट्रायल और ऐसे मामलों पर बहस कोई नई बात नहीं है। इसमें कोई सेंसरशिप नहीं हो सकती है।
पीठ ने कहा कि आम धारणाएं अखबार की खबरों और अन्य चीजों से प्रभावित हो सकती हैं। लेकिन न्यायपालिका इन सब से प्रभावित नहीं होती है। हम केवल सबूतों पर चलते हैं। आम धारणा अदालत के लिए सबसे कम चिंता का विषय है। पीठ ने कहा कि लोग ऐसी सीरीज और फिल्में देखते हैं और आगे बढ़ जाते हैं और कोई भी इसे अपने साथ नहीं रखता।