फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Bombay HC Best interest of child doesn't necessarily mean love and care of primary caregiver parent

Bombay HC: ‘बच्चे का सर्वोत्तम हित सिर्फ मां का प्यार नहीं हो सकता’, अदालत ने पिता को सौंपी मासूम की कस्टडी

Fri, 15 Sep 2023 12:51 AM IST
जलज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: जलज मिश्रा Updated Fri, 15 Sep 2023 12:51 AM IST
सार

हाईकोर्ट ने याचिका की सुनवाई के दौरान महिला को आदेश दिया कि वह बच्चे की कस्टडी अमेरिका में रह रहे अपने पति को 15 दिन के भीतर लौटा दे। कोर्ट ने कहा कि अगर महिला अपने बच्चे के साथ जाना चाहती है तो वह जा सकती है।

विज्ञापन
Bombay HC Best interest of child doesn't necessarily mean love and care of primary caregiver parent
bombay high court

विस्तार

बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक बच्चे की कस्टडी मां से लेकर अमेरिका में रह रहे पिता को सौंप दी है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने गुरुवार को कहा कि बच्चे का सर्वोत्तम हित सिर्फ मां का प्यार और देखभाल नहीं हो सकता। बच्चे के सर्वोत्तम हित के संबंध में लिए जाने वाले निर्णय का आधार सिर्फ उसका बुनियादी अधिकार और जरूरत, पहचान, सामाजिक कल्याण, शारीरिक, भावनात्मक और बौद्धिक विकास होना चाहिए। 
विज्ञापन


पिता ने हाईकोर्ट में दायर की थी याचिका
बॉम्बे हाईकोर्ट की जस्टिस रेवती मोहिते डेरे और जस्टिस गौरी गोडसे की पीठ ने कहा कि बच्चे का सर्वोत्तम हित अपने आप में व्यापक है। इसका आधार सिर्फ बच्चे का बुनियादी मानवाधिकार होता है। दरअसल, पीठ एक एक याचिका की सुनवाई कर रही थी, जो साढ़े तीन साल के बच्चे के पिता द्वारा लगाई गई थी। याचिका में पिता ने कहा था कि उनका अपनी पत्नी से समझौता हुआ था कि जब वह दोनों अलग होंगे तो उनका बच्चा मां के साथ अमेरिका में ही रहेगा। लेकिन समझौते के बाद भी पत्नी बच्चे को लेकर भारत आ गई और बच्चे को वापस करने से इनकार कर दिया।
विज्ञापन


कोर्ट ने दिया यह आदेश
हाईकोर्ट ने याचिका की सुनवाई के दौरान महिला को आदेश दिया कि वह बच्चे की कस्टडी अमेरिका में रह रहे अपने पति को 15 दिन के भीतर लौटा दे। कोर्ट ने कहा कि अगर महिला अपने बच्चे के साथ जाना चाहती है तो वह जा सकती है। ऐसे मामले में पति बच्चे और महिला को आवास और मासिक भरण-पोषण प्रदान करेगा। फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने कहा कि बच्चे के कल्याण का फैसला करते हुए सिर्फ माता-पिता के विचारों को महत्व नहीं दिया जा सकता। बल्कि, अदालत को इसपर महत्व देना चाहिए कि बच्चे के सर्वोत्तम हित में क्या है। कोर्ट ने कहा कि मानना है कि कच्ची उम्र में बच्चे को माता-पिता दोनों का प्यार पाने का अधिकार है। 
विज्ञापन
विज्ञापन



 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed