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फैसले पर सवाल: अपने ही जजों के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचा राजस्थान हाई कोर्ट, जानिए पूरा मामला 

Sat, 02 Oct 2021 10:27 PM IST
Amit Mandal पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: Amit Mandal Updated Sat, 02 Oct 2021 10:27 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट में ऐसा एक दुर्लभ मामला आया जहां राजस्थान हाई कोर्ट ने अपने ही जजों के दो आदेशों को लेकर शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था।

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Blanket ban on listing bail pleas infringes upon personal liberty of incarcerated, says SC
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ani

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान हाई कोर्ट के फैसले पर टिप्पणी करते हुए कहा है कि जमानत या सजा के निलंबन के लिए याचिकाओं को सूचीबद्ध करने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाना बंदी की निजी स्वतंत्रता का उल्लंघन है। अदालत ने कहा कि इस तरह के आदेश देकर राजस्थान हाई कोर्ट के न्यायाधीश न्यायिक अधिकार के दायरे से परे चले गए हैं। 

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अपने जजों के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचा हाई कोर्ट 
शीर्ष अदालत ने यह टिप्पणी एक दुर्लभ मामले में की जहां राजस्थान हाई कोर्ट ने अपने ही जजों के दो आदेशों को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। इनमें से एक आदेश पिछले साल 31 मार्च को दिया गया था। इसमें रजिस्ट्री से कहा गया था कि जमानत की याचिकाएं, अपील, सजा का निलंबन और बहुत जरूरी मामलों को तब तक सूचीबद्ध न किए जाए जब तक कि केंद्र सरकार लॉकडाउन के आदेश को पूरी तरह वापस न ले लेती।
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इसी जज का दूसरा आदेश जिसे हाई कोर्ट ने चुनौती दी थी, वह 17 मई 2021 का था, जिसमें पुलिस को तीन साल की जेल की अवधि तक के अपराधों के लिए 17 जुलाई तक गिरफ्तारी नहीं करने का निर्देश दिया गया था। 
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न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव और न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस की पीठ ने कहा कि हमारे विचार में 31 मार्च 2020 और 17 मई 2021 को पारित अपील के तहत आदेशों ने राजस्थान उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की प्रशासनिक शक्ति का अतिक्रमण किया है। इस तरह के आदेश पारित करने के लिए न्यायाधीश के अधिकार क्षेत्र पर पीठ ने कहा कि हमारी निर्णय प्रणाली में इस तरह के आदेश कानून के विपरीत होंगे क्योंकि कार्यवाही की जानकारी के बिना कई व्यक्ति ऐसे आदेशों से प्रभावित होंगे। 

बता दें कि शीर्ष अदालत ने संबंधित न्यायाधीश के दोनों आदेशों पर तीन अप्रैल 2020 और 25 मई 2021 को रोक लगा दी थी। 

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