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सतर्कता: अस्पताल में भर्ती करने से पहले मधुमेह की जांच जरूरी, आहार भी हुआ तय

Thu, 03 Jun 2021 02:57 AM IST
देव कश्यप अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: देव कश्यप Updated Thu, 03 Jun 2021 02:57 AM IST
सार

  • स्वास्थ्य मंत्रालय ने फंगस के मामलों को देखते हुए दिशा-निर्देश किए जारी
  • अस्पताल में भर्ती होने के 24 घंटे के अंदर मधुमेह के लिए रक्तजांच अनिवार्य
  • मधुमेह रोगियों में स्टेरॉयड दवाओं के इस्तेमाल को लेकर भी नियम बनाए

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Black Fungus Impact Diabetes screening is necessary before hospitalization diet also decided
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock

विस्तार

अस्पताल में भर्ती करने से पहले अब मरीज की मधुमेह जांच करना जरूरी होगा। साथ ही भर्ती करने के 24 घंटे के अंदर उसकी मधुमेह से संबंधित रक्त जांच होना अनिवार्य है। इतना ही नहीं मधुमेह रोगियों के लिए दिन भर में क्या क्या आहार देना है? यह सभी भी तय कर दिया गया है।

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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्यों को भेजे दिशा-निर्देशों में कोरोना रोगियों में मधुमेह को लेकर खास सतर्कता बरतने के लिए कहा है क्योंकि इन मरीजों में फंगस होने की आशंका काफी ज्यादा हो सकती है। अगर कोई मरीज कोरोना के साथ मधुमेह ग्रस्त भी है तो उसके लिए स्टेरॉयड युक्त दवाओं का सेवन कब और कितनी मात्रा में करवाना है इसके लिए भी निर्देश तय किए जा चुके हैं।
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दरअसल, दुनिया में सबसे ज्यादा मधुमेह ग्रस्त रोगी भारत में हैं। डॉक्टरों के अनुसार ज्यादातर मरीजों को यह नहीं पता होता है कि वह मधुमेह के शिकार हैं। जिन्हें जानकारी होती है उनमें से भी ज्यादातर रोगी तय समय पर दवा नहीं लेते हैं और परहेज भी कम करते हैं। ऐसे मरीजों के लिए नुकसान तब बढ़ा जब कोरोना महामारी के चलते वह संक्रमित हुए और फिर फंगस की चपेट में आने लगे हैं। देश में अब तक 16 हजार से ज्यादा फंगस के मामले सामने आए हैं जिनमें से काफी मरीज अनियंत्रित मधुमेह और स्टेरॉयड दवाओं के सेवन की वजह से भर्ती हुए हैं।
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इसी स्थिति से बचने और जिला अस्पताल स्तर पर कार्यरत स्वास्थ्य कर्मचारियों को जानकारी देने के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय ने सचित्र एक-एक विकल्प को स्पष्ट किया है।


वहीं, बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज, गोरखपुर के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. राज किशोर सिंह का कहना है कि ब्लैक फंगस एक ऐसी बीमारी है जिससे भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है। यह आदिकाल से मधुमेह के कुछेक (अत्यल्प) मरीजों में देखने को मिलती रही है। फंगस संक्रमण की समुचित परिस्थिति (सड़न व अनियंत्रित रक्त शर्करा) के बिना इसका न तो एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में प्रसार होता है और न ही हर कोविड मरीज को यह बीमारी होती है। कोविड के गंभीर मरीजों का लाइन ऑफ ट्रीटमेंट सही रखा जाए तो उन्हें भी यह दिक्कत नहीं होगी। वह खुद कोविड मरीजों के इलाज में शुरू से ही जुड़े हुए हैं व सपरिवार संक्रमित होकर ठीक भी हुए हैं। 

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