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राकेश सिंह तो असली 'टिकैत' निकले, सरकार के सामने टिक गए

Fri, 29 Jan 2021 04:52 PM IST
Harendra Chaudhary अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Fri, 29 Jan 2021 04:52 PM IST
सार

  • राकेश सिंह की अपील के बाद लगातार यूपी बॉर्डर पहुंच रहे हैं किसान,
  • अपने साथ कोई ला रहा पराठे तो कोई पानी की बोतलें

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BKU Leader Rakesh singh tikait called farmers to participate in protest against 3 farm bills at Ghazipur
गाजीपुर बॉर्डर पर किसान - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

राकेश सिंह टिकैत के नाम में जुड़ा 'टिकैत' शब्द किसी जाति का सूचक नहीं है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश और पंजाब-हरियाणा के क्षेत्रों में इस शब्द का प्रयोग उन जातीय नेताओं के लिए किया जाता था, जिनका चयन जाति विशेष के नेता एक पंचायत के माध्यम से किया करते थे। माना जाता था कि यह नेता जातीय हितों-परंपराओं की रक्षा के लिए अपनी कही गई बात पर हमेशा टिका रहेगा। इसीलिए उसे टिकैत का नाम दिया जाता था इसका अर्थ होता था जो अपनी बात पर टिका रहे।

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चुनाव के बाद टिकैत चौधरी चुनने की परंपरा भी वंशानुगत हो गई, जिसे पहले तो राकेश सिंह टिकैत के पिता महेंद्र सिंह टिकैत ने अपनाई। उपनामों के चयन पर कोई प्रतिबंध न होने के कारण बाद में महेंद्र सिंह टिकैत के सभी बेटों ने भी इसे अपने नाम के साथ जोड़ लिया। राकेश सिंह के नाम में 'टिकैत' शब्द इसी क्रम में शामिल किया गया है।
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असली 'टिकैत' निकले राकेश सिंह

भारतीय किसान यूनियन बागपत के नेता किशोर सिंह ने अमर उजाला को बताया कि गाजियाबाद प्रशासन सख्ती करके किसान आंदोलन खत्म कराने की तैयारी कर रहा था। आंदोलन से कुछ लोगों के वापस होने की भ्रामक खबरों के बाद कुछ किसान नेताओं को भी लगा कि उनकी अब तक की मेहनत पानी में जाने वाली है। इसके बाद भावुक हुए राकेश सिंह टिकैत ने रोते हुए किसानों से यूपी बॉर्डर पहुंचने की अपील की और आंदोलन से पीछे न हटने की बात कही।


किशोर सिंह के मुताबिक राकेश सिंह की इस अपील का किसानों पर बड़ा असर हुआ और रातोंरात हजारों किसान यूपी बॉर्डर की ओर चल पड़े। किसानों के आने का यह क्रम अभी भी जारी है और शनिवार तक इसके बने रहने की उम्मीद है। किसान नेता के मुताबिक इसके बाद पूऱे क्षेत्र में राकेश सिंह टिकैत के पक्ष में भावनाओं का ज्वार उमड़ पड़ा। किसानों को लग रहा है कि यही असली टिकैत है जो किसानों के हितों के लिए अड़े हुए हैं।

सरकार ने किसानों का पानी बंद कर दिया है। इसे देखते हुए राकेश सिंह टिकैत ने घोषणा की थी कि अब उनके घर से पानी आएगा तभी वे जल ग्रहण करेंगे। इस अपील को देखते हुए यूपी बॉर्डर पहुंच रहे किसान अपने साथ पानी की बोतलें लेकर पहुंच रहे हैं। कई किसान अपने साथ पराठे, छाछ, दही, चूड़ा और अन्य सामान लेकर पहुंच रहे हैं। यूपी बॉर्डर पर राकेश सिंह टिकैत की गिरफ्तारी और किसानों को धरना स्थल से हटाने की तैयारी फिलहाल रुकती दिख रही है।

तेज हो रही आंदोलन की आंच

आंदोलनकारियों के लिए पानी जैसी मूलभूत सुविधा हटा लिए जाने के बाद यह संदेश गया है कि सरकार ने अपनी तरफ से आंदोलनकारियों को कोई भी सहयोग देना बंद कर दिया है। लेकिन सरकार के इस रुख का आंदोलनकारियों पर कोई असर नहीं पड़ा है। सहारनपुर से आंदोलन के समर्थन में यूपी बॉर्डर पहुंचे किसान चौधरी हरिपाल सिंह ने कहा कि वे आंदोलन को और तेज करने की तैयारी कर रहे हैं। इसकी आंच धीमे-धीमे और तेज की जा रही है। सरकार से अगले दौर की वार्ता के पूर्व किसान नेता इस पर जल्दी ही बड़ा निर्णय ले सकते हैं।

मनीष सिसोदिया, जयंत चौधरी के पहुंचने से आंदोलन को मिली ताकत

सरकार से आंदोलन को सहयोग मिलना बंद होने के बाद राकेश सिंह टिकैत ने दिल्ली सरकार से पानी और अन्य सुविधाओं की मांग की। इसके बाद दिल्ली सरकार ने किसानों को पूरी मदद देने का आश्वासन दिया। दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया शुक्रवार को यूपी बॉर्डर पहुंचकर किसानों का पूरा समर्थन किया। उन्होंने किसानों को हर संभव मदद देने की बात भी कही।

इसके पहले आरएलडी नेता जयंत चौधरी भी धरना स्थल पर पहुंचे और किसानों को अपना समर्थन दिया। आरएलडी की जमीन भी पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसान वोटरों पर ही निर्भर करती है और उसके बड़ी संख्या में इस क्षेत्र में समर्थक मौजूद हैं। ऐसे में जयंत चौधरी के राकेश सिंह टिकैत के साथ आने से किसान आंदोलन को नई मजबूती मिली है।

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