Vice President Post: सहयोगियों को साधकर उपराष्ट्रपति पद पास रखेगी भाजपा; मैराथन बैठकें कर शुरू हुआ मंथन का दौर
धनखड़ के इस्तीफे के बाद भावी रणनीति व नए उपराष्ट्रपति के चयन के संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को पार्टी के वरिष्ठ मंत्रियों के साथ मैराथन बैठक की। अपना उपराष्ट्रपति बनाने के लिए भाजपा के सामने सहयोगियों को साधने के अलावा कोई बड़ी चुनौती नहीं है। पार्टी के इरादों को देखते हुए चुनावी राज्य बिहार के सीएम नीतीश कुमार या किसी नेता को यह जिम्मेदारी मिलने की संभावना दूर-दूर तक नजर नहीं आती है।
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भाजपा उपराष्ट्रपति का पद किसी सहयोगी दल को देने के मूड में नहीं है। उपराष्ट्रपति के पास राज्यसभा संचालन की अहम जिम्मेदारी होने के कारण पार्टी कोई समझौता नहीं करना चाहती। पार्टी यह पद संविधान की बेहतर समझ और अच्छी छवि रखने वाले किसी व्यक्तित्व को देने की तैयारी में है।
धनखड़ के इस्तीफे के बाद भावी रणनीति व नए उपराष्ट्रपति के चयन के संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को पार्टी के वरिष्ठ मंत्रियों के साथ मैराथन बैठक की। अपना उपराष्ट्रपति बनाने के लिए भाजपा के सामने सहयोगियों को साधने के अलावा कोई बड़ी चुनौती नहीं है। पार्टी के इरादों को देखते हुए चुनावी राज्य बिहार के सीएम नीतीश कुमार या किसी नेता को यह जिम्मेदारी मिलने की संभावना दूर-दूर तक नजर नहीं आती है।
वर्तमान में राज्यसभा में 240, लोकसभा में 543 (कुल 783 सदस्य) हैं। बहुमत का आंकड़ा 392 (प्रथम वरीयता मत) है। भाजपा के पास लोकसभा में 240 और राज्यसभा में 99 सदस्य हैं। उसे 10 मनोनीत सदस्यों का समर्थन है। ऐसे में उसके पास 349 सदस्य हैं। यह आंकड़ा जीत के लिए जरूरी समर्थन से सिर्फ 43 कम है। सहयोगियों को जोड़ दें, तो संख्या 400 से ज्यादा है। पार्टी को उम्मीद है कि उपयुक्त दावेदार पर अगले हफ्ते तक सहमति बन जाएगी।
पांच साल का होगा नए उपराष्ट्रपति का कार्यकाल
संविधान के अनुच्छेद 66 (1) में प्रावधान है कि चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के अनुसार एकल संक्रमणीय मत के माध्यम से कराया जाएगा और ऐसे चुनाव में गुप्त मतदान होगा। नए उपराष्ट्रपति का चुनाव पूरे कार्यकाल के लिए होगा। इसका मतलब है कि जो भी उपराष्ट्रपति चुना जाएगा, वह 2027 तक नहीं बल्कि पूरे पांच साल पद पर रहेगा। 74 साल के धनखड़ देश के 14वें उपराष्ट्रपति थे और उनका कार्यकाल अभी 10 अगस्त 2027 तक था।
अगले उपराष्ट्रपति पद के लिए होने वाले चुनाव में संख्याबल के हिसाब से सत्तारूढ़ राजग मजबूत स्थिति में है। उपराष्ट्रपति के चुनाव में लोकसभा और राज्यसभा के सदस्य मतदान करते हैं। उच्च सदन के मनोनीत सदस्य भी वोट देने के पात्र होते हैं। 543 सदस्यीय लोकसभा में एक सीट खाली है, जो पश्चिम बंगाल की बसीरहाट सीट है। 245 सदस्यीय राज्यसभा में पांच सीट रिक्त हैं, जिनमें से चार जम्मू-कश्मीर और एक पंजाब से है।
394 वोटों की होगी जरूरत
लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों की प्रभावी संख्या 786 है और उपराष्ट्रपति के चुनाव में विजयी उम्मीदवार को 394 वोट जीतने की जरूरत होगी, बशर्ते कि सभी पात्र मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करें। लोकसभा में भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए के पास 293 सदस्य हैं, वहीं राज्यसभा में भी उसे 129 सदस्यों का समर्थन प्राप्त है, जिसमें मनोनीत सदस्य भी शामिल हैं। इस तरह सत्तारूढ़ गठबंधन को 786 सदस्यों में से 422 सदस्यों का समर्थन प्राप्त है, जो उपराष्ट्रपति के निर्वाचन के लिए जरूर 394 वोट से बहुत अधिक है।