उत्तराखंड की राह पर त्रिपुरा: 2023 में डा. माणिक साहा के चेहरे पर खेलेगी भाजपा!
पिछले महीने त्रिपुरा भाजपा के 14 विधायकों ने बिप्लब देव के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। कई तरह के आरोप लगाए थे। इसमें बिप्लब देव की कार्यशैली के साथ-साथ, उनके कुछ करीबियों की कार्य प्रणाली को लेकर भी शिकायत की गई थी। हालांकि तब भाजपा नेतृत्व ने केवल इन शिकायतों को सुना था...
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शुक्रवार को बिप्लब देव गृहमंत्री अमित शाह से मिलने दिल्ली आए थे। मुलाकात के बाद दिल्ली से अगरतला लौटे और केंद्रीय नेतृत्व से मिले दिशा-निर्देशों के तहत पद से इस्तीफा दे दिया। केंद्रीय मंत्री भूपेन्द्र यादव और विनोद तावड़े पर्यवेक्षक बनकर गए और उनकी अगुवाई में विधायकों ने डा. माणिक साहा को अपना नेता चुन लिया। माणिक साहा त्रिपुरा भाजपा के अध्यक्ष हैं और राज्य में भाजपा की राजनीति में काफी सक्रिय हैं। भाजपा ने यह कदम राज्य भाजपा के नेताओं, कार्यकर्ताओं, विधायकों की नाराजगी को देखते हुए उठाया है। माना जा रहा है कि भाजपा ने त्रिपुरा में भी उत्तराखंड, कर्नाटक की तरह का प्रयोग किया है।
सरकार विरोधी लहर और गुटबाजी को खत्म करना जरूरी
बिप्लब देव भी भाजपा के बयानवीर मुख्यमंत्रियों में गिने जाते हैं। 2018 में राज्य का मुख्यमंत्री बनने के एक साल बाद ही पार्टी के विधायकों और नेताओं की नाराजगी सामने आने लगी थी। 2023 में त्रिपुरा राज्य विधानसभा चुनाव होना है। इस तरह से भाजपा ने एक तीर से कई निशाने साध लिए हैं। बिप्लब देव को पद से हटाने के बाद पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व को जहां राज्य सरकार के प्रति जनता में सरकार विरोधी लहर को साधने में मदद मिलेगी, वहीं पार्टी की आंतरिक गुटबाजी, विधायकों की नाराजगी को भी कम करने में मदद मिलेगी। ऐसा माना जा रहा है कि भाजपा ने यह प्रयोग उत्तराखंड में मुख्यमंत्री बदलने के बाद मिली सफलता को ध्यान में रखकर किया है। बिप्लब देव भाजपा के चौथे ऐसे मुख्यमंत्री हैं, जिन्हें हटाकर राज्य को मुख्यमंत्री का विकल्प दिया गया।
दिशा-निर्देश के तहत दिया इस्तीफा, चुनाव की तैयारी करनी है-बिप्लब
बिप्लब कुमार देव इस्तीफा देने के बाद मीडिया के सामने आए। उन्होंने कहा कि पार्टी सर्वोपरि है। वह भाजपा के निष्ठावान कार्यकर्ता हैं। बिप्लब ने कहा कि भाजपा आलाकमान ने मुझपर भरोसा जताया था और अब मुझे इस्तीफा देने को कहा है। इसलिए मैंने इस्तीफा दे दिया है। इस बारे में प्रधानमंत्री मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से बात हो चुकी है। उन्होंने कहा कि अभी चुनाव में देरी है और वह पार्टी की मजबूती के लिए काम करेंगे। इससे कयास लगाए जा रहे हैं बिप्लब देव को भाजपा त्रिपुरा का प्रदेश अध्यक्ष बना सकती है। हालांकि पार्टी के भीतर की गुटबाजी देखते हुए इस तरह की संभावना काफी कम है।
पिछले महीने भाजपा के विधायकों ने उठाई थी आवाज
पिछले महीने त्रिपुरा भाजपा के 14 विधायकों ने बिप्लब देव के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। कई तरह के आरोप लगाए थे। इसमें बिप्लब देव की कार्यशैली के साथ-साथ, उनके कुछ करीबियों की कार्य प्रणाली को लेकर भी शिकायत की गई थी। हालांकि तब भाजपा नेतृत्व ने केवल इन शिकायतों को सुना था। ऐसा कहा जा रहा है कि इन शिकायतों के बाद केंद्रीय गृहमंत्री ने त्रिपुरा से फीडबैक लिया और इसके बाद बिप्लब देव को नई दिल्ली तलब किया गया था। दिल्ली में उन्हें इस्तीफा देने के लिए कह दिया गया था।
11 महीने में चार राज्यों के बदले मुख्यमंत्री
पिछले 11 महीने के दौरान भाजपा ने चार राज्यों में मुख्यमंत्री बदला। उत्तराखंड में चार महीने के भीतर तीन बार मुख्यमंत्री का चेहरा बदला गया। कर्नाटक में बीएस येदियुरप्पा से इस्तीफा लेकर बसव राज बोम्मई, गुजरात में विजय रुपाणी के स्थान पर भूपेंद्र भाई पटेल को कमान सौंपी गई। चुनाव से उत्तर प्रदेश में भी मुख्यमंत्री बदलने की चर्चा ने जोर पकड़ा था, लेकिन वहां सत्ता में कोई बदलाव नहीं हो पाया। इस क्रम में चौथा राज्य त्रिपुरा है।