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राज्यों में सफलता के लिए नई रणनीति और डायनामिक्स पर विचार करेगी भाजपा

Mon, 23 Dec 2019 08:29 PM IST
देव कश्यप शशिधर पाठक, नई दिल्ली
शशिधर पाठक, नई दिल्ली Published by: देव कश्यप Updated Mon, 23 Dec 2019 08:29 PM IST
सार

  • एनआरसी समेत अन्य मुद्दों पर विपक्ष के भ्रमजाल से नुकसान
  • कांग्रेस छोटे दलों के आगे टेक रही है घुटने
  • आर्थिक मुद्दों का करना पड़ेगा समाधान, झारखंड की भी करेंगे समीक्षा
  • पीएम मोदी और शाह लगातार बने हैं जनप्रिय

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BJP will consider new strategy and dynamics for success in states
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह - फोटो : PTI

विस्तार

देश के राज्यों में एक के बाद एक पर भाजपा की पकड़ ढीली हो रही है। भाजपा पहले महाराष्ट्र, फिर झारखंड में सत्ता से दूर हो गई है। इससे पहले हरियाणा के नतीजे भी उसमें उत्साह लाने वाले नहीं थे। भाजपा नेता गोपाल कृष्ण अग्रवाल का कहना है कि हम इस पर समीक्षा करेंगे और बदले हुए राजनीतिक परिवेश पर विचार करके पार्टी अपनी रणनीति तथा डायनामिक्स में नया बदलाव ला सकती है। गोपाल कृष्ण अग्रवाल का कहना है कि भाजपा राष्ट्रीय पार्टी है और राष्ट्रीय राजनीति करती है। पार्टी ने हरियाणा में गैर जाट मनोहर लाल खट्टर, महाराष्ट्र में गैर मराठा देवेन्द्र फडणवीस, झारखंड में गैर आदिवासी रघुवर दास पर भरोसा करके जाति, उपजाति, क्षेत्र की राजनीति से ज्यादा राष्ट्रीयता को महत्व दिया है। जबकि कांग्रेस ने छोटी-छोटी पार्टियों के आगे घुटने टेक दिए।

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क्यों राज्यों में सत्ता से दूर हो रही है भाजपा?

गोपाल कृष्ण अग्रवाल का कहना है कि पार्टी इस पर समीक्षा करेगी। अभी जो तात्कालिक कारण समझ में आ रहे हैं, उनमें एक कांग्रेस का छोटे-छोटे दलों के आगे घुटने टेकना, गठबंधन करके सत्ता में आने की रणनीति अपनाना है। यह तो मौकापरस्ती का गठबंधन सत्ता में आ रहा है। दूसरा कारण विपक्षी दलों द्वारा देश में एनआरसी जैसे मुद्दों पर भ्रमजाल फैलाना है। गोपाल कृष्ण कहते हैं कि झारखंड में पार्टी का तीन प्रतिशत के करीब वोट बढ़ा है। यह बात अलग है कि भाजपा 13 सीटों का नुकसान उठा रही है और विपक्ष को 22 सीटों का फायदा भी हो रहा है, लेकिन भाजपा मूल्यों की राजनीति कर रही है। पार्टी राष्ट्रीय स्तर पर कड़े निर्णय लेने से परहेज नहीं कर रही है। गोपाल कृष्ण अग्रवाल इसके साथ मानते हैं कि भाजपा की केन्द्र सरकार को आर्थिक मुद्दों का भी समाधान करना पड़ेगा। हालांकि वह कहते हैं कि आर्थिक मामले अब अंतरराष्ट्रीय बाजार से बहुत प्रभावित हो रहे हैं।

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क्या ढीला पड़ रहा है मोदी और शाह का असर?

पार्टी के नेता अग्रवाल का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष तथा केन्द्रीय गृहमंत्री का असर लगातार बढ़ रहा है। झारखंड में तीन प्रतिशत अधिक वोट मिलना इसका परिचायक है। पार्टी 2014 से 2019 में अधिक सीटें लेकर आई है। उन्होंने कहा कि भाजपा के राज्यों में सत्ता में पिछडऩे का कारण राज्य स्तरीय स्थानीय मुद्दे, जातिगत समीकरण तथा तमाम छोटे-मोटे मुद्दे हैं। राज्यों में यह चुनाव को प्रभावित करते हैं। अग्रवाल का कहना है कि भाजपा राष्ट्रीयता से समझौता नहीं करती। इसलिए हमें नुकसान उठाना पड़ा। यह पूछे जाने पर कि क्या भाजपा राज्यों में स्थानीय स्तर के मुद्दों के समाधान में फेल हो रही है? अग्रवाल ने कहा नहीं ऐसी बात नहीं है। हमें वोट शेयर अधिक मिला है। बस हम मौकापरस्त गठबंधन से पीछे रह गए। इसलिए नए सिरे से, नए साथी और राजनीति में नई रणनीति तथा डायनामिक्स को अपनाने पर पार्टी विचार करेगी।

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