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देशव्यापी अभियान चलाकर कृषि कानून के फायदे गिनाएगी भाजपा
Sat, 12 Dec 2020 03:04 AM IST
Jeet Kumar
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
Published by: Jeet Kumar
Updated Sat, 12 Dec 2020 03:04 AM IST
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : पीटीआई
कूषि कानूनों के समर्थन में भाजपा देश भर में आक्रामक अभियान चलाएगी। पार्टी ने कानूनों से जुड़ी आपत्तियों का जवाब देने और उसके फायदे गिनाने के लिए इसी महीने देश के सभी जिलों में चौपाल लगाने और प्रेस कांफ्रेंस करने की योजना बनाई है। उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री मोदी सहित भाजपा के शीर्ष नेता लगातार इन कानूनों की अच्छाई बता रहे हैं।
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पार्टी सूत्रों ने बताया कि जल्द ही इस अभियान की शुरुआत होगी। पूरे देश में करीब 700 कार्यक्रम होंगे, जिसमें पार्टी के राष्ट्रीय नेताओं के साथ-साथ केंद्रीय मंत्री भी शिरकत करेंगे। कार्यक्रमों के जरिये भाजपा कृषि कानूनों के फायदे बताएगी आंदोलन को ले कर सरकार के रुख से भी लोगों को अवगत कराएगी।
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यह है सरकार की रणनीति
सरकार किसान संगठनों से सीधा टकराव नहीं चाहती है। यही कारण है कि किसान यूनियनों द्वारा प्रस्ताव ठुकराए जाने के बावजूद सरकार लगातार वार्ता की अपील कर रही है। सरकार कानून वापस लेने से इनकार करते हुए किसान यूनियनों से इसके प्रावधानों में बदलाव पर सुझाव मांग रही है। वार्ता की लगातार अपील करते हुए सरकार यह संदेश देना चाहती है कि वह बातचीत से पीछे नहीं हट रही।
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मुख्य मांगों पर फंसा है पेच
आंदोलनरत किसान संगठनों की कई मांगे हैं। इनमें से मुख्य मांग कृषि कानूनों को वापस लेने और एमएसपी की कानूनी गारंटी देने की है। सरकार दोनों मुख्य मांगों को अस्वीकार कर चुकी है, हालांकि एमएसपी जारी रखने का लिखित आश्वासन देना चाहती है।
वहीं पराली संबंधी प्रदूषण कानून में बदलाव करने, खरीदारों के लिए कर और पंजीयन अनिवार्य करने, किसानों को सिविल कोर्ट जाने की इजाजत देने संबंधी मांग को स्वीकार करने के लिए भी तैयार है। दरअसल मुख्य मांगों पर ही पेच फंसा है, ऐसे में किसान आंदोलन के तत्काल खत्म होने की संभावना नहीं है।