Sanatan Controversy: सनातन विवाद पर आक्रामक रणनीति अपनाएगी BJP, लेकिन केवल धार्मिक मुद्दों से नहीं बनती है बात
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विस्तार
सनातन पर छिड़ा विवाद पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों और लोकसभा चुनाव को देखते हुए और ज्यादा आक्रामक हो सकता है। भाजपा ने इस मुद्दे पर राज्यों के स्तर पर लड़ाई तेज करने की योजना बनाई है। जिन राज्यों में भाजपा की सरकारें हैं, वहां संगठन और सरकार के शीर्ष नेताओं की ओर से सनातन पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाले नेताओं और उनकी पार्टी का विरोध किया जाएगा, जबकि जिन राज्यों में विपक्षी दलों की सरकारें हैं, वहां धरना और विरोध प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे। रैलियों के माध्यम से जनता को इन मुद्दों के प्रति जागरूक किया जाएगा। इस रणनीति में भाजपा के एनडीए में सहयोगी लगभग 36 दल भी उसके साथ होंगे।
इसके पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भाजपा नेताओं को सनातन विवाद पर आक्रामक रणनीति के साथ तथ्यों के साथ जवाब देने की सलाह दी थी। उन्होंने स्वयं इस मुद्दे पर लीड करते हुए सनातन पर की जा रही टिप्पणियों को देश के संस्कारों को समाप्त करने की कोशिश बताया और कहा कि देश इसका जवाब देगा। प्रधानमंत्री मोदी की इस टिप्पणी को भाजपा की सोची-समझी रणनीति के अंतर्गत दिया गया बयान बताया जा रहा है।
विपक्ष हुआ रक्षात्मक
भाजपा की इस संभावित रणनीति को भांपते हुए विपक्ष ने इस मुद्दे पर रक्षात्मक रुख अपना लिया है। डीएमके नेता उदयनिधि स्टालिन ने स्वयं ही अपने बयान पर सफाई देते हुए कहा है कि उनका उद्देश्य सनातन मानने वालों के खात्मे का नहीं, बल्कि उस छुआछूत के विरुद्ध था, जिसके कारण समाज में लोगों को भेदभाव का सामना करना पड़ता है। आम आदमी पार्टी सांसद संजय सिंह ने कहा कि हर धर्म का सम्मान होना चाहिए। कांग्रेस नेता गौरव गोगोई ने कहा कि उदयनिधि का बयान उनका व्यक्तिगत बयान है, इसे इंडिया गठबंधन का बयान नहीं माना जाना चाहिए।
क्यों रक्षात्मक हुआ विपक्ष
कांग्रेस सहित सभी विपक्षी दल यह जानते हैं कि सनातन या हिंदू धर्म के मुद्दे पर विवाद बढ़ने से मतदाताओं के बीच ध्रुवीकरण बढ़ेगा और यह उन्हें नुकसान कर सकता है। डीएमके की तमिलनाडु की स्थानीय राजनीति में हिंदुत्व या ब्राह्मण विरोध की राजनीति कारगर हो सकती है, लेकिन उत्तर भारत के राज्यों में यह इंडिया गठबंधन को भारी नुकसान पहुंचा सकती है। विशेषकर जब भाजपा राम मंदिर के उद्घाटन के सहारे हिंदू कार्ड को और ज्यादा मजबूती के साथ खेलने की कोशिश कर रही है, सनातन विवाद बढ़ने से भाजपा को ही लाभ हो सकता है। यही कारण है कि पूरा गणित समझते हुए विपक्ष के नेताओं ने इस पर बैकफुट होना ही बेहतर समझा है।
केवल धार्मिक मुद्दों से नहीं बनती है बात
विपक्ष का आरोप है कि धार्मिक मुद्दों को उठाकर सरकार असली मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश करती है। यदि इस आरोप को सही मानें, तो यह भी समझ में आता है कि केवल धार्मिक मुद्दों के सहारे कोई चुनाव नहीं जीता जा सकता है। इसका सबसे बड़ा प्रमाण हाल ही में संपन्न हुए कर्नाटक विधानसभा चुनावों के दौरान भी दिखाई पड़ा था, जहां भाजपा ने जमकर हनुमानजी के अपमान का मुद्दा उठाया, लेकिन इसके बाद भी वह वहां पर जीत हासिल करने में सफल नहीं हो पाई।
इसके पहले जब 1992 में अयोध्या में विवादित ढांचा गिराया गया था, तब भी भाजपा ने पुरजोर तरीके से धार्मिक कार्ड खेला था। उस समय चर्चा यहां तक की जा रही थी कि उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के लिए खाता खोलना भी मुश्किल हो जाएगा। लेकिन सपा-बसपा ने वह चुनाव मिलकर लड़ा और भाजपा को पीछे छोड़ दिया। यह परिणाम भी बताता है कि मजबूत सामाजिक समीकरणों के सहारे गैर-भाजपाई विपक्षी दल धार्मिक कार्ड को पीछे छोड़ने में सफल हुआ है।
हालांकि कई चुनावों में धार्मिक कार्ड का असर भी दिखा है। भाजपा की दो सीटों से 303 सीटों तक की यात्रा में उसके राम मंदिर आंदोलन की बड़ी भूमिका रही है। लेकिन केवल इस कार्ड के सहारे वह अपने दम पर 180 सीटों की संख्या के आसपास आकर रुक गई थी। वह अकेले दम पर बहुमत पाने का करिश्मा तभी कर पाई, जब हिंदुत्व और राम के मुद्दे के साथ मोदी के नेतृत्व में विकास और रोजगार जैसे अहम मुद्दों को भी जोड़ा गया। ध्यान से देखें तो मोदी की 2024 की रणनीति में ये सभी मुद्दे शामिल दिखाई पड़ रहे हैं।
असली मुद्दों से भटकने नहीं देंगे चुनाव- राजद
राष्ट्रीय जनता दल प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने अमर उजाला से कहा कि सनातन विवाद को उठाकर भाजपा सरकार रोजगार-महंगाई जैसे असली मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है। वे इसे किसी भी स्थिति में कामयाब नहीं होने देंगे। बीच-बीच में जिस तरह अनावश्यक मुद्दों को हवा देकर चर्चाओं की दिशा प्रभावित की जा रही है, उससे भी सरकार की रणनीति समझ में आ रही है।
राष्ट्रीय जनता दल सहित इंडिया गठबंधन के कई नेता सनातन धर्म, रामायण, तुलसीदास पर टिप्पणियां कर भाजपा को इन मुद्दों पर खेलने का मौका दे रहे हैं। इससे इंडिया गठबंधन का नुकसान भी हो रहा है। इसे रोकने के लिए इंडिया गठबंधन क्या करेगा? अमर उजाला के इस प्रश्न पर राजद प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि उनके उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने यह स्पष्ट कर दिया है कि उनके लिए संविधान ही सर्वोच्च है। उन्होंने कहा कि इस तरह की कोई आपत्तिजनक बयानबाजी नहीं की जानी चाहिए जिससे भाजपा सरकार को रोटी-रोजगार और महंगाई के प्रश्नों से बचने का अवसर मिले।
कैसे करेंगे भाजपा की रणनीति का सामना
यदि भाजपा सनातन विवाद पर आक्रामक रुख अपनाती है, तो इंडिया गठबंधन इसका सामना कैसे करेगा? अमर उजाला के इस प्रश्न पर मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि इस चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार को अपने 10 साल के कामकाज का जवाब देना है। उन्होंने आरोप लगाया कि चूंकि केंद्र सरकार ने कोई काम नहीं किया है, वह सनातन विवाद जैसे मामलों को उठाकर मूल प्रश्नों से बचना चाहेगी। लेकिन वे असली मुद्दों को उठाकर उसे बचने का कोई अवसर नहीं देंगे।