BJP: पूर्व कांग्रेसियों के सहारे पंजाब-आंध्र जीतना चाहती है BJP, ये नेता संभालेंगे इन राज्यों की जिम्मेदारी
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विस्तार
भाजपा ने सावन महीने के पहले ही दिन पार्टी में बदलावों के बादल बरसा दिये। कांग्रेस से आए 'घुमंतू' बादलों के ऊपर पार्टी को पंजाब और आंध्र प्रदेश की उस जमीन पर भाजपा को मजबूत बनाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जो उसके लिए अब तक लगभग ऊसर ही साबित हुआ है। पार्टी ने तेलंगाना में पूर्व पार्टी अध्यक्ष बंडी संजय कुमार के खिलाफ लगातार बढ़ते विद्रोह को थामते हुए उन्हें अध्यक्ष पद से हटा दिया है, तो जी. किशन रेड्डी को नए प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी देकर और ई. राजेंदर को चुनाव प्रबंध समिति का प्रमुख बनाकर चुनावी बिगुल भी फूंक दिया है।
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किशन रेड्डी को तेलंगाना की जिम्मेदारी
भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह द्वारा जारी पत्र के अनुसार, केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी को तेलंगाना का नया प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त कर दिया गया है। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष बंडी संजय कुमार के खिलाफ पार्टी में लगातार विरोध बढ़ता जा रहा था। पार्टी के कई नेताओं ने उनके खिलाफ बिगुल फूंक दिया था। वे लगातार खुद को भाजपा की तरफ से राज्य में मुख्यमंत्री पद के दावेदार के तौर पर पेश कर रहे थे, जिससे पार्टी के कई नेता असहज थे। यही कारण है कि पार्टी के आंतरिक विद्रोह को थामने के लिए पार्टी ने बंडी संजय कुमार को अध्यक्ष पद से हटा दिया।
किशन रेड्डी तेलंगाना-आंध्र प्रदेश के मजबूत रेड्डी समुदाय से संबंध रखते हैं। इन राज्यों में राजनीतिक तौर पर बहुत प्रभावशाली यह उच्च वर्णीय किसान समुदाय किसी भी राजनीतिक दल को बढ़त देने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। चूंकि आज के बदलाव में आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री किरण कुमार रेड्डी को भी पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में शामिल कर लिया गया है, इससे पार्टी को इन दक्षिणी राज्यों में मजबूती मिलने की संभावना है।
पार्टी ने तेलंगाना चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष के तौर पर वर्तमान विधायक और पूर्व मंत्री ई. राजेंदर (Etela Rajender) को नियुक्त कर केसीआर को सत्ता से हटाने के लिए चुनावी बिगुल भी फूंक दिया है। पार्टी तेलंगाना को लेकर बहुत आशान्वित है और उसे लगता है कि यदि कर्नाटक के बाद वह दक्षिण के किसी राज्य को भेद सकती है, तो वह तेलंगाना ही हो सकता है। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए गत वर्ष हैदराबाद में पार्टी ने राष्ट्रीय कार्यकारिणी का आयोजन कर इसके महत्त्व को रेखांकित कर दिया था।
पंजाब में भी पूर्व कांग्रेसी को कमान
भाजपा ने पूर्व कांग्रेस नेता सुनील कुमार जाखड़ को पंजाब का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त कर दिया है। इसके पहले कांग्रेस के पंजाब प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त कर राज्य में अपने विस्तार का संकेत दे दिया है। सुनील कुमार जाखड़ भी उन नेताओं में शामिल हैं, जो पंजाब में कैप्टन अमरिंदर सिंह के मुख्यमंत्री पद से हटते समय खुद को कांग्रेस की ओर से मुख्यमंत्री पद के दावेदार के रूप में देख रहे थे। लेकिन राहुल गांधी ने दलित समुदाय से आने वाले चरणजीत सिंह चन्नी को पंजाब का सीएम घोषित कर इनके इरादों पर पानी फेर दिया था।
इसका परिणाम हुआ था कि इन नेताओं ने चन्नी को अपेक्षित सहयोग नहीं दिया और कांग्रेस को पंजाब में पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा। अब सुनील कुमार जाखड़ के कंधे पर पंजाब में भाजपा को मजबूत करने की जिम्मेदारी है। राज्य में भाजपा की कोई ठोस जमीन नहीं रही है। वह अकाली दल से गठबंधन में राज्य की तीन लोकसभाओं पर लड़ती रही है। लेकिन किसानों के मुद्दे पर अकाली दल के अलग हो जाने के बाद पार्टी अपने बूते पंजाब में मजबूत होना चाहती है।
डी. पुरंदेश्वरी को आंध्र का जिम्मा
अपने मजबूत चुनावी अभियान से राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरने वाली डी. पुरंदेश्वरी को भाजपा ने आंध्र प्रदेश का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त कर दिया है। महिला होने के कारण वे बहुत लोकप्रिय रही थीं और उनके कई बयान काफी चर्चा में रहे थे। उनकी इसी क्षमता को देखते हुए पार्टी ने डी. पुरंदेश्वरी को दक्षिण के मजबूत राज्य आंध्र प्रदेश में पार्टी को मजबूत बनाने की जिम्मेदारी सौंपी है।
आंध्र में किरण कुमार रेड्डी को मजबूत किया
आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री किरण कुमार रेड्डी को राष्ट्रीय कार्यकारिणी का सदस्य बना दिया गया है। उन्होंने कुछ ही समय पहले भाजपा की सदस्यता ली थी। इससे पार्टी को आंध्र प्रदेश में मजबूत करने में मदद मिलेगी। भाजपा को उम्मीद है कि इस पूर्व कांग्रेस नेता की लोकप्रियता के सहारे वह दक्षिणी राज्यों में अपने विस्तार की महत्त्वाकांक्षा को पूरा कर सकेगी।
बाबूलाल मरांडी को झारखंड की जिम्मेदारी
भाजपा ने पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी पर एक बार फिर भरोसा जताया है और उन्हें झारखंड में पार्टी को मजबूत करने की जिम्मेदारी सौंपी है। झारखंड में अगले वर्ष के अंत में विधानसभा चुनाव होना है। इस तरह मरांडी के पास लगभग डेढ़ साल का समय है जब वे झारखंड मुक्ति मोर्चा और कांग्रेस के मुकाबले अपनी पार्टी को मजबूत कर उसे चुनावी जीत दिलाने की मुहिम के लिए काम करेंगे।