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कांग्रेस मुक्त वाली भाजपा यूपी में चाह रही है कांग्रेस की मजबूती

Thu, 20 Oct 2016 04:43 AM IST
एम संजय/ अमर उजाला,नई दिल्ली 
एम संजय/ अमर उजाला,नई दिल्ली  Updated Thu, 20 Oct 2016 04:43 AM IST
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bjp wants strong congress in up election
कांग्रेस मुक्त भारत का नारा देने वाली भाजपा दिल्ली की तरह यूपी में भी अब कांग्रेस के मजबूत होने की आस लगा रही है। सपा में चाचा-भतीजा के बीच मचे आपसी झगड़े ने मिशन 2017 के लिए भाजपा की रणनीति को इस कदर बिगाड़ दिया है कि अब पार्टी रणनीतिकारों को अपने सबसे बड़े सियासी दुश्मन के मजबूत होने की आस लगानी पड़ रही है। यूपी की उलझन को साधने के लिए भगवा रणनीतिकार कांग्रेस के मजबूत होने की कामना कर रहे हैं। 
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भगवा रणनीतिकारों का आंकलन है कि सपा के कमजोर होने से भाजपा की लड़ाई सीधे बसपा के साथ आ जाएगी। ऐसे में उसे मुस्लिमों के एकमुश्त रूप से बसपा के पाले में जाने की आशंका सता रही है। यदि ऐसा हुआ तो भाजपा के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं। पहले के चुनावी परिणाम भी यही बताते हैं कि आमने-सामने की चुनावी लड़ाई के बजाय भाजपा को त्रिकोणीय मुकाबला ज्यादा रास आता है। 
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यही वजह है कि भगवा रणनीतिकार यूपी में कांग्रेस के भी मजबूत होने की कामना कर रहे हैं।  यूपी की चुनावी रणनीति से जुड़े संघ के एक वरिष्ठ नेता के अनुसार कांग्रेस के मजबूत चुनाव लडने से मायावती कमजोर होंगी। अल्पसंख्यक और दलित वोट सीधे बसपा के पाले में जाने के बजाय कांग्रेस के बीच भी बंटेगा। 
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भगवा रणनीतिकारों को आज भी याद है केजरिवाल के सामने भाजपा का हश्र

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केजरिवाल के सामने भाजपा के हश्र का भगवा रणनीतिकारों को पूरा भान है। दिल्ली में कांग्रेस के एकदम कमजोर पडने से भाजपा की लड़ाई केजरिवाल के खिलाफ आमने-सामने की हो गई थी। पार्टी के वोट प्रतिशत में बढ़ोत्तरी के बावजूद भी 70 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा 3 सीटों पर सीमट कर रह गई। हालांकि भगवा रणनीतिकारों को मुलायम सिंह यादव की छवि पर पूरा भरोसा है। 

उन्हें उम्मीद है कि मुस्लिम समाज मुलायम को पूरी तरह से नहीं छोड़ सकता है। अपने नेटवर्क के जरिए संघ परिवार मुस्लिम समाज के बीच जमीन पर चल रही चर्चाओं पर लगातार नजर रख रहा है। सूत्र बताते हैं कि  संघ के संगठन भी मुस्लिम समाज के अंदर चल रही पल-पल की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं। जमियात और अन्य मुस्लिम संगठनों की सक्रियता के बावजूद संघ को लगता है कि मुस्लिम समाज के बीच से मुलायम का मोह जल्दी नहीं जाएगा। लेकिन सपा की आपसी खंचितान को लेकर बेचैनी भी है। 

उन्हें लग रहा है कि सपा की लड़ाई यदि जल्द न थमी तो भाजपा को मात देने के लिए मुस्लिमों के पास बसपा के सिवाय कोई चारा भी नहीं बचेगा। इसीलिए प्रदेश की भगवा गतिविधियों से जुड़े नेता कांग्रेस के दिन बहुरने की उम्मीद  लगा रहे हैं। ताकि यूपी का चुनावी मुकाबला त्रिकोणीय हो सके। वैसे मुस्लिमों के बसपा के पक्ष में जाने का ही संकेत है कि संघ को भाजपा के खाते में पश्चिमी यूपी के बजाय पूर्वी यूपी से ज्यादा सीटें मिलने के आसार नजर आ रहे हैं। वह भी ऐसे में जब पश्चिमी यूपी को भाजपा का सदैव से गढ़ माना जा रहा है। 
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