भाजपा का मंथन: 'संघ शक्ति' के बल पर ही 2022 में उत्तर प्रदेश के चुनावी रण में उतरेगी पार्टी
यूपी को लेकर टीम योगी का मानना है-सब मिलकर करें तैयारी और लड़ें चुनाव। दावा किया जा रहा है कि राज्य के जिला पंचायत चुनाव में तस्वीर बदलेगी
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भाजपा कोरोना संक्रमण से उपजे हालात को लेकर दिल्ली में मंथन कर रही है। संघ भी पूरे देश का फीडबैक लेकर चर्चा की मेज पर आया है। इस चर्चा में दो राज्य बहुत महत्वपूर्ण हैं। एक है उत्तर प्रदेश और दूसरा है उत्तराखंड। इसके बाद सब। यूपी के बारे में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का दृढ़ मत है कि 'संघ शक्ति' के बल पर ही 2022 के प्रस्तावित विधानसभा चुनाव में विजय पताका फहराई जा सकती है।
उत्तर प्रदेश के एक कैबिनेट मंत्री का कहना है कि अब तो चुनाव सिर पर है। यह समय मिलकर चुनाव की तैयारी करने और समय पर चुनाव लड़ने का है। श्रावस्ती से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आशीर्वाद प्राप्त भाजपा नेता का कहना है कि आखिरी समय में मंत्रिमंडल में फेरबदल से क्या फर्क पड़ेगा? वह कहते हैं कि शीर्ष नेताओं के ऊपर वह कोई सवाल नहीं उठा रहे हैं। उनका निर्णय सिर आंखों पर है, लेकिन अब तो चार-पांच महीने बाद चुनाव लड़ना है। हम उसकी तैयारी कर रहे हैं।
सूत्र का कहना है कि राज्य सरकार में कुछ मंत्री पद खाली हैं। इन्हें भरकर लोगों की भागीदारी बढ़ाई जा सकती है, लेकिन उथल-पुथल पैदा करके कुछ खास हासिल होने वाला नहीं है। यूपी भाजपा के एक अन्य नेता का कहना है कि थोड़ा सब्र कीजिए। जिला पंचायत के चुनाव होने हैं। इस चुनाव के बाद काफी कुछ तस्वीर बदलती नजर आएगी।
तीन दिनी मंथन जारी, उत्तराखंड में भी चेहरा बदलने से सब ठीक नहीं हुआ
उ.प्र. देश का सबसे बड़ा राज्य है। 80 लोकसभा सीटें अकेले इस प्रदेश से हैं। दिल्ली का रास्ता भी लखनऊ होकर आता है। भाजपा के नेता दबी जुबान से मानते हैं कि उत्तर प्रदेश के साथ उत्तराखंड में भी स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। वहां चेहरा बदल देने से सब कुछ ठीक नहीं हुआ है।
इसे केन्द्र में रखकर भाजपा और संघ के शीर्ष नेता दिल्ली में तीन दिनों का मंथन कर रहे हैं। इस मंथन से पहले संघ के सर कार्यवाह दत्तात्रेय हसबोले दो दिवसीय लखनऊ प्रवास कर आए हैं। उन्होंने संघ के नेताओं से फीडबैक लिया है।
लखनऊ से लौटकर आने के बाद उनकी प्रधानमंत्री, केन्द्रीय गृहमंत्री, भाजपा अध्यक्ष, संगठन महामंत्री बीएल संतोष, उ.प्र. के संगठन मंत्री सुनील बंसल, पार्टी के उ.प्र. प्रभारी राधामोहन सिंह से चर्चा हुई थी। इस चर्चा के बाद राधामोहन सिंह और बीएल संतोष ने लखनऊ का दौरा किया। संगठन महामंत्री बीएल संतोष ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत अन्य मंत्रियों से भी चर्चा की। इस चर्चा के बाद ही यह मंथन चल रहा है।
संघ ने लिया पूरे देश का फीडबैक, 2024 पर भी नजर
संघ कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर में मची तबाही के बाद पूरे देश से फीडबैक लेकर आया है। कुल मिलाकर लक्ष्य 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले होने वाले राज्यों के विधानसभा चुनाव में जनता की नाराजगी दूर करके जीत सुनिश्चित करना है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा और संघ नेता भी केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की संगठनात्मक पकड़ का लोहा मानते हैं। भाजपा के नेता भी मानते हैं कि अमित शाह के भाजपा अध्यक्ष रहने के दौरान विषम परिस्थिति में भी पार्टी का लगातार ग्राफ बढ़ा है। इस आधार पर समझा जा रहा है कि केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा के साथ मिलकर संगठनात्मक मजबूती को धार देंगे।
हर माह उप्र का दौरा कर सकते हैं शाह
अमित शाह अब हर महीने और किसी महीने में एक से अधिक बार जेपी नड्डा के साथ अथवा अलग कार्यक्रम बनाकर उ.प्र. का दौरा करेंगे। संगठन मंत्री सुनील बंसल के साथ तालमेल बनाकर संगठनात्मक परिवर्तन, बूथ स्तर तथा पन्ना प्रमुखों को सक्रिय करके पार्टी जनता के बीच में छवि सुधारने पर काम करेगी। इसके लिए संघ के कार्यकर्ता भी सहयोग करेंगे।
मंथन का अच्छा परिणाम आएगा
इसके अलावा प्रधानमंत्री भी राज्य में दौरा कर सकते हैं। उ.प्र. से आने वाले भाजपा के एक बड़े नेता का कहना है कि हम यह नहीं कहेंगे कि कुछ नहीं हो रहा है। जो मंथन चल रहा, वह दिखाई दे रहा है। अभी केवल इतना कह सकते हैं कि इसका अच्छा परिणाम आएगा।
क्या उ.प्र. सरकार में कोई बदलाव होगा?
छह मंत्री बनाए जा सकते हैं
मार्च 2017 में मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी आदित्यनाथ मंत्रिमंडल का पहला विस्तार 22 अगस्त 2019 को हुआ था। योगी मंत्रिमंडल में कुल 60 मंत्री हो सकते हैं। इस समय 23 कैबिनेट, 9 स्वतंत्र प्रभार, 22 राज्यमंत्री समेत कुल 54 मंत्री हैं। छह मंत्री और बनाए जा सकते हैं।
समझा जा रहा है कि जल्द ही एक मंत्रिमंडल विस्तार का निर्णय लेकर छह चेहरों को शपथ दिलाई जा सकती है। कुछ के विभाग बदल सकते हैं। यदि दो-चार चेहरे प्रदर्शन के आधार पर बाहर हुए तो कुछ नए विधायकों को अवसर मिल सकता है, लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ही रहेंगे।
इसके अलावा पंचम तल, मुख्यमंत्री कार्यालय और कुछ विभाग के अधिकारियों में भी फेरबदल संभव है। कुल मिलाकर मकसद पार्टी के कार्यकर्ताओं और नेताओं में उत्साह जनक संदेश देकर चुनाव की तैयारी का मानस तैयार करना रहेगा।
संगठन में भी कुछ नए चेहरे होंगे
उ.प्र. भाजपा संगठन में भी बदलाव हो सकता है। सह संगठन मंत्री भवानी सिंह समेत कई भाजपा नेताओं को कोरोना संक्रमण में जान गंवानी पड़ी है। इन पदों पर नए चेहरों को स्थान दिया जाएगा। पूर्वी उ.प्र., मध्य तथा पश्चिमी उ.प्र. में कुछ नेताओं की जिम्मेदारी में भी फेरबदल की संभावना है।
असरदार ब्राह्मण चेहरे, जातियों को जोड़ने की जरूरत
पार्टी को उ.प्र. में विधानसभा चुनाव से पहले एक असरदार ब्राह्मण चेहरे को भी खड़ा करना है। ताकि 2022 के चुनाव में अपेक्षित परिणाम लाए जा सकें। अन्य पिछड़ा वर्ग के नेताओं की सक्रियता बढ़ानी है तथा भाजपा से छिटक रही जातियों को साथ लाने की चुनौती है। इसे ध्यान में रखकर कुछ निर्णय लिए जाने की उम्मीद है।