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भाजपा ने एनसीपी पर ली चुटकी, शिवसेना का पलटवार- कोई पार्टी पूरी तरह खत्म नहीं होती
Thu, 05 Sep 2019 02:53 PM IST
Sneha Baluni
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: Sneha Baluni
Updated Thu, 05 Sep 2019 02:53 PM IST
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शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे (फाइल फोटो)
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शिवसेना ने गुरुवार को कहा कि कोई भी राजनीतिक दल कभी भी पूरी तरह खत्म नहीं होता है। यह कह कर पार्टी ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) नेता रोहित पवार के इस कथन से एक तरह से सहमति जताई है कि भाजपा अपने फायदे-नुकसान के हिसाब से उनके नाना शरद पवार की तारीफ और बुराई करती रहती है।
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केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने हाल ही में सोलापुर की एक रैली में पवार पर चुटकी लेते हुए कहा था कि जिस तरह लोग एनसीपी छोड़कर जा रहे हैं, उससे लगता है कि जल्द ही एनसीपी वन मैन पार्टी बन जाएगी। शिवसेना ने गुरुवार को अपने मुखपत्र सामना में लिखा है कि महाराष्ट्र के विकास में एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार के योगदान को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
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शिवसेना ने सामना में लिखा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद (पवार के गृह नगर) बारामती की यात्रा के दौरान पवार के योगदान को सराहा था। मोदी ने पवार को अपना गुरु बताया था। बहरहाल, रविवार को अमित शाह ने सोलापुर की रैली में वंशवाद की राजनीति और भ्रष्टाचार को लेकर पवार पर निशाना साधा था।
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अखबार ने पवार के नाती रोहित पवार के बयान का भी हवाला दिया है। रोहित ने भाजपा पर चुटकी लेते हुए कहा था कि भाजपा एक ओर पवार की तारीफ कर और दूसरी ओर महाराष्ट्र के विकास में उनके योगदान पर सवाल उठाकर दोहरे मानदंड वाली राजनीति कर रही है। सामना ने लिखा है कि भाजपा के इन बयानों का जवाब देने वाले रोहित पवार परिवार के पहले सदस्य हैं।
संपादकीय में लिखा है कि एनसीपी को सत्ता से बाहर हुए पांच साल हो गए हैं, इसके बावजूद पवार पर हमला जारी है। उसमें लिखा है 'महाराष्ट्र और देश, दोनों ही जगह पवार या कांग्रेस का शासन नहीं है, पिछले पांच साल से राज्य में भाजपा-शिवसेना की सरकार है। चुनाव प्रचार का मुख्य फोकस हमारी सरकार के कामकाज पर होना चाहिए।'
अखबार में लिखा है 'राजनीतिक बयार बदल गई है। राजनीतिक दल बने, वे कमजोर पड़े। लेकिन राजनीतिक परिदृश्य से कोई भी दल हमेशा के लिए खत्म नहीं होता। राजनीति में रहने वाले हर किसी को यह याद रखना चाहिए।' आगे संपादकीय में लिखा है कि हालांकि एनसीपी की हालत इस बात का संकेत है कि महाराष्ट्र की राजनीति में पवार की पकड़ कमजोर हुई है।